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शराबबंदी के खिलाफ प्रशांत किशोर के ये 3 तर्क सुनकर नीतीश कुमार नाराज़ हो जाएंगे!

प्रशांत किशोर शुरू से ही शराब बंदी के ख़िलाफ़ हैं. क्योंकि इससे बिहार को हर साल 20 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है.

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प्रशांत किशोर का दावा है कि शराब बंदी से बिहार को हर साल 20 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है. (फ़ोटो/आजतक)

प्रशांत किशोर. राजनीति की दुनिया में सफल रणनीतिकार हैं. और सफल राजनेता बनने के आकांक्षी. चुनावी राजनीति की शुरुआत बिहार से करना चाहते हैं. और इसके लिए जनसुराज अभियान के बैनर तले पदयात्रा निकाल रहे हैं. चलते-चलते लोगों से भी बात करते हैं और प्रेस से भी. सो बयान आते रहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी से लेकर राम मंदिर तक. अब फिर कुछ बयान आए हैं, जिनके निशाने पर उनके पुराने दोस्त नीतीश कुमार हैं. प्रशांत ने कहा है कि नीतीश की शराबबंदी से बिहार को कोई फायदा नहीं हुआ है. बकौल प्रशांत, शराबबंदी को लेकर महात्मा गांधी की बातों को गलत तरीके से कोट किया जा रहा है. और इसके चलते न सिर्फ बिहार को सालाना 20 हज़ार करोड़ का नुकसान हो रहा है, बल्कि वंचित वर्ग अदालतों के चक्कर भी लगा रहा है.

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प्रशांत किशोर से पूछा गया कि उन्होंने तो 2015 में नीतीश कुमार के साथ काम किया था, तब वो शराब बंदी के खिलाफ कैसे हैं? तो उन्होंने कहा कि चुनाव में उन्होंने कई मुद्दे उठाए थे, लेकिन उसमें कहीं शराब बंदी का जिक्र नहीं था. चुनाव तो सात निश्चयों पर लड़ा गया था. प्रशांत ने कहा,

“मैं सिरे से शराबबंदी के विरोध में हूं. जब इन्होंने शराब बंदी लागू की, तब तो मैं यहां नहीं था. मेरे रहते हुए शराबबंदी की बात हो ही नहीं सकती है. दुनिया में कोई ऐसा प्रमाण नहीं है कि शराबबंदी के जरिए किसी समाज ने, किसी देश ने, किसी राज्य ने अपना आर्थिक-सामाजिक विकास किया हो. आज के परिपेक्ष्य में लोग एविडेंस बेस्ड पॉलिसी की बात करते हैं. लेकिन दुनिया में इसका कोई एविडेंस नहीं है कि शराबबंदी के जरिए आर्थिक-सामाजिक लाभ हो सकता है.”

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प्रशांत ने आगे कहा कि शराबबंदी को लेकर दूसरा तर्क ये दिया जाता है कि गांधी जी ने ऐसा कहा था. लेकिन वो दो साल से लोगों से कह रहे हैं कि उन्हें गांधी जी का लिखा हुआ/ बोला हुआ वाक्य दिखाया जाए, जिसमें गांधी जी ने कहा है कि राज्यों को कानून बनाकर शराबबंदी लागू करनी चाहिए.

बकौल प्रशांत,  

“गांधी जी ने शराबबंदी को एक सामाजिक-नैतिक काम बताया. उन्होंने समाज के प्रयास की बात की. उन्होंने ये नहीं कहा कि आप कानून बना दीजिए. यह तो ऐसे हो गया कि गांधी जी वेजिटेरियन होने के पक्ष में थे, और आज कोई सरकार आकर यह कह दे कि जो वेजिटेरियन नहीं रहेगा, उसे जेल में डाल दिया जाएगा. फिर उसको गांधी के नाम पर बेचोगे?”

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प्रशांत किशोर ने दावा किया कि शराबबंदी के लिये कानून है, लेकिन ज़मीन पर लागू नहीं हो पा रहा है. सूबे में शराब की दुकानें बंद हुई हैं लेकिन होम डिलीवरी चालू है. और शराब बंदी से राज्य को हर साल 20 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है.

प्रशांत ने ये भी कहा कि शराबबंदी के चलते गांव-गांव में युवा पीढ़ी के लोग अवैध शराब के काम में लग गए हैं. बकौल प्रशांत,

''नीतीश कुमार ने शराब बंदी कानून वुमन एंपावरमेंट के लिए बनाया था. लेकिन इससे सबसे ज़्यादा महिलाएं ही प्रताड़ित हो रही हैं. मैं आपको एक आंकड़ा दे रहा हूं, जब से 2016 से शराबंदी लागू की गई है, करीब-करीब 6 लाख़ 37 हजार शराब बंदी के केस आए हैं. इसमें से लगभग 1 लाख़ 10 हजार लोग या तो जेल में हैं, या फिर कोर्ट में केस लड़ रहे हैं. इसमें ज़्यादातर लोग गरीब और वंचित वर्ग से हैं. पैसे वाला कोई भी नहीं पकड़ा गया है. जब तक गरीब आदमी जेल में रहता है तब तक उसके घर की महिलाएं थाने के चक्कर लगाती हैं. केस होने पर वकील की पैसे देने पड़ते हैं.”

अब देखना होगा कि शराबबंदी के खिलाफ दिये इन तीन तर्कों को लेकर नीतीश कुमार प्रशांत किशोर को क्या जवाब देते हैं. आप पूछेंगे कि हमें कैसे पता कि प्रशांत ने ये सब कहा, तो बात ये है कि प्रशांत किशोर हाल ही में दी लल्लनटॉप के पॉलिटिकल इंटरव्यूज़ की सीरीज़ जमघट के मेहमान थे. पूरा इंटरव्यू देखना चाहें, तो लिंक ये रहा.

वीडियो: प्रशांत किशोर ने बीजेपी, राम और धीरेंद्र शास्त्री पर क्या बयान दे दिया?

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