पैकेज्ड फूड पर हेल्थ वार्निंग लेबल लगाने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को फटकार लगाई है. FSSAI यानी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया. जिसका काम फूड सेफ्टी का काम ठीक नहीं हो रहा है कि नहीं, इसे जांचना होता है.
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को लगाई फटकार, पूछा- 'फूड पैकेट पर लेबल लगाने में देरी क्यों हो रही?'
10 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने FSSAI के खिलाफ कुछ शिकायतें कीं. वकील ने कहा कि आज FSSAI ने पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है, जो पहले तय हुआ था उससे अलग रुख अपना लिया है. मामला फूड पैकेट पर लेबल लगाने से जुड़ा है.

पूरा मामला पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर हेल्थ वार्निंग लेबल से जुड़ा है. जिसमें अधिक चीनी, नमक और फैट के अमाउंट की जानकारी कंज्यूमर तक साफ तरीके से पहुंचाने की मांग की गई थी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से कई सवाल पूछे. जैसे फूड पैकेजिंग पर वार्निंग लेबल लगाने में देरी क्यों हो रही है? नमक और सोडियम के अमाउंट पर वार्निंग को लेकर क्या फैसला हुआ है?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?10 सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने कुछ और शिकायतें भी की. वकील ने कहा कि आज FSSAI ने पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है, जो पहले तय हुआ था उससे अलग रुख अपना लिया है.
सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि ICMR (इंडियन कॉउन्सिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च) गाइडलाइंस में दो कैटेगरी हैं. हमने सुझाव दिया है कि टेस्टिंग खास शर्तों पर होनी चाहिए. यानी टेस्टिंग 100 ग्राम की मात्रा पर और साथ ही हर सर्विंग की मात्रा पर भी होनी चाहिए. ताकि कंज्यूमर को सही जानकारी मिल सके.
सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने आगे कहा कि ICMR स्टैंडर्ड के सिर्फ एक प्लान का पालन किया जा रहा है. जबकि दूसरी शर्तों का पालन नहीं हो रहा है. इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि आप अपनी बात लिखित में दें.
जस्टिस पारदीवाला ने आगे कहा कि कोर्ट ने भी इस टॉपिक पर अपने लेवल पर स्टडी की है. एक आदेश जारी किया जाएगा जिसे शाम तक या कल तक अपलोड कर दिया जाएगा. जस्टिस पारदीवाला ने वकीलों से कहा कि वो आदेश को पढ़ें और उसके बाद अदालत में वापस आएं. साथ ही FSSAI और केंद्र सरकार को कोर्ट का आदेश ध्यान से पढ़ने के लिए कहा गया. ताकि आगे की सुनवाई में इस पर सही तरीके से बात हो सके.
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फ्रंट ऑफ़ पैक लेबल की मांगसुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और न्यूट्रिशनल फूड अलग-अलग कैटेगरी में होने चाहिए. दूसरा मुद्दा वेज और नॉन-वेज का है. इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि उन्होंने सेहत, खासकर बच्चों की सेहत को बहुत गंभीरता से लिया है.
‘3S एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ नाम के एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर पैकेज्ड फूड पर अनिवार्य वार्निंग लेबल लगाने की मांग की थी. इस मामले पर सुनवाई के दौरान FSSAI ने कोर्ट को सूचित किया था कि वह ज्यादा फैट, ज्यादा चीनी और नमक वाले खाने-पीने की चीजों के पैकेट पर सामने की तरफ एक लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाएगा.
फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग से पता चलता है कि फूड हेल्दी है या अनहेल्दी. FSSAI ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि वो जल्द ही वार्निंग लेबल लगाएगा. पर अब तक वार्निंग लेबल नहीं लगा. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को फटकार लगाई है.
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