3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई थी (तस्वीर: इंडिया टुडे)
सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच को लेकर नए निर्देश दिए हैं. सोमवार 15 नवंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वो इस हिंसा की जांच में जरूरी सुधार करे. इस सुधार के तहत सुप्रीम कोर्ट ने SIT टीम में सीनियर पुलिस अधिकारियों को शामिल करने का सुझाव दिया है. साथ ही कहा है कि एक रिटायर्ड जज इस पूरी जांच की निगरानी करे ताकि मामले की सही तरीके से जांच की जा सके. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक यूपी सरकार ने भी कोर्ट के इस सुझाव का समर्थन किया है. उसने कहा है कि अदालत अपनी तरफ से जज की नियुक्ति कर सकती है. मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी.
क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?
इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में दो जजों के नाम पहले भी बतौर सुझाव ले चुका है. ये हैं पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट (PHHC) के रिटायर्ड जज रंजीत सिंह और राकेश कुमार जैन. सोमवार को हुई सुनवाई में सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने जस्टिस राकेश जैन का नाम फिर लिया. उसने कहा,
'हम PHHC के पूर्व न्यायाधीश राकेश जैन और दूसरे जजों के नामों पर विचार कर रहे हैं. हम उनसे राय-मशविरा करेंगे.'
वहीं इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार से कहा कि फिलहाल SIT टीम में जितने भी अधिकारी हैं, वे सभी इन्स्पेक्टर रैंक के हैं. इस लिए कोर्ट उन आईपीएस अधिकारियों के नामों पर विचार कर रहा है, जो उत्तर प्रदेश कैडर से तो हों, लेकिन राज्य के मूल निवासी ना हों. इस पर यूपी सरकार ने कोर्ट को ये भरोसा दिलाया कि अगली सुनवाई से पहले SIT टीम को अपग्रेड कर दिया जाएगा.
हालांकि यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि जांच टीम को लीड करने के लिए केवल उन जजों के नामों पर विचार ना हो, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट के बाहर के हैं. साल्वे ने कहा कि शीर्ष अदालत किसी व्यक्ति को नियुक्त करने की बात कर रहा है, ना कि PHHC की जांच-पड़ताल कर रहा है.
आशीष मिश्रा की जमानत पर सुनवाई पूरी हुई
इस बीच लखीमपुर हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत पर सुनवाई पूरी हो गई. आजतक/इंडिया टुडे से जुड़े संतोष कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक सेशन कोर्ट ने सुनवाई कर आशीष मिश्रा की बेल पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक फैसला सोमवार 15 नवंबर को ही सुनाया जा सकता है.