ये बात टोटली गलत है भाईसाब. और इस ट्वीट में एक नहीं दो गलतियां हैं. पहली तो ये कि ये वीडियो दिवाली नहीं नवरात्रों का है. दूसरी गलती कि ये मोदी की मां नहीं हैं. हमारी बात मानते हो हमको इसका पक्का भरोसा है लेकिन क्या है कि बिना सुबूत और गवाह कोर्ट भी कोई बात नहीं सुनती. जहां ये बात कहोगे उसे कहते हैं सोशल मीडिया. वो सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर वाली संस्था है. वहां तत्काल फैसले और गालियां मिलती हैं. तो ये सुबूत ले लो. ये वीडियो यूट्यूब पर 3 अक्टूबर को अपलोड हुआ था.
इस वीडियो में कौन सी माता जी हैं इसका पता अभी चल नहीं पाया है. लेकिन हीराबेन नहीं हैं ये पक्का है. दोनों की तस्वीरें देखकर अंदाजा लगा लो. दोनों के चेहरे में पर्याप्त अंतर है. और पीएम की माता जी चश्मा भी लगा के रखती हैं.

पीएम मोदी को आशीर्वाद देती हुई माता जी का चेहरा डांस करने वाली माता जी से नहीं मैच करता.
पिछली बार जब माते दिल्ली वाले घर आईं थी तो पीएम मोदी ने उनको व्हील चेयर पर घुमाया था. फाल्गुनी पाठक के गाने "ईंधणा बींण वगइती मोरे सैंया" पर वो इतने अच्छे स्टेप्स से डांस कर पाएंगी ऐसा लगता नहीं है.

तस्वीर: ट्विटर
ये खबर पब्लिश होने के 4 घंटे बाद किरन बेदी की तरफ से दूसरा ट्वीट भी आया कि उन्हें गलत जानकारी दी गई थी. देखो भई साफ बात है. इंसान गलतियों का पुतला है. सबसे गलती होती है लेकिन बिना समझे बूझे आगे न ठेलें.

बाकी सब बातें ठीक हैं लेकिन आजकल कोई गंगा में खड़े होकर कुछ शेयर कर रहा हो तो उसको शेयर करने से पहले चेक जरूर कर लेना. हैप्पी दिवाली.
अब एक वीडियो लल्लनटॉप का भी देखते जाओ.
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