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'आपके पास बेलगाम शक्ति नहीं..' केरल के राज्यपाल के इस फैसले को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया

Kerala High Court में राज्यपाल Arif Mohammad Khan ने बयान दिया था कि नामांकन करने की कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं है.

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हाई कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को रद्द कर दिया है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) के एक फैसले को निरस्त कर दिया है. पिछले साल उन्होंने केरल विश्वविद्यालय की सीनेट के लिए 4 विद्यार्थियों को नामित किया था. राज्यपाल के इस फैसले पर विवाद हुआ था और मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा था. कोर्ट ने पिछले साल राज्यपाल के इस फैसले पर रोक लगा दी थी. अब 21 मई को केरल हाई कोर्ट ने राज्यपाल के द्वारा किए गए नामांकनों को रद्द कर दिया है. और राज्यपाल को 6 हफ्ते के भीतर नए नाम सौंपने को कहा है.

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लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति मोहम्मद नियास सीपी की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा,

“ये सामान्य बात है कि नामांकन करते समय चांसलर (राज्यपाल) के पास कोई बेलगाम शक्ति नहीं होती. अगर ये नामांकन कानून की आवश्यकता के विपरीत है या यदि जरूरी बातों पर विचार नहीं किया गया है या यदि निर्णय लेने में अप्रासंगिक कारकों पर विचार किया गया है, तो ऐसी स्थिति में नामांकन की प्रक्रिया में न्यायालयों को हस्तक्षेप करना होगा."

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राज्यपाल ने कोर्ट में अपने एक बयान में कहा कि कानून में नामांकन करने की कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं है. ये भी कहा कि नामित व्यक्तियों की योग्यता का आकलन करने के बाद नामांकन किया गया था. सरकारी प्रतिनिधियों के नामांकन के बारे में कहा गया कि वे राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र से वर्षों से जुड़े हुए हैं और उनके पास पर्याप्त अनुभव है.

केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने उम्मीद जताई  है कि ये फैसला अनावश्यक विवादों को खत्म कर देगा.

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पिछले साल जब ये विवाद हुआ था तब CPI(M) और उसकी छात्र शाखा SFI ने राज्यपाल पर आरोप लगाया था. कहा था कि नामित चार छात्र RSS और ABVP के कार्यकर्ता थे. आरोप ये भी लगा था कि संघ परिवार ने उनकी सिफारिश की थी. ये भी कहा गया कि विश्वविद्यालय ने जिन 8 छात्रों की सूची भेजी थी, राज्यपाल ने उनमें से किसी को नामित नहीं किया और उससे अलग 4 छात्रों को नामित किया. 

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