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1200 करोड़ ₹ जलाने के लिए थैंक्यू, क्योंकि ये आग अच्छी है

और इस आग को लगाए जाने की वजह भी बढ़िया है.

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फोटो क्रेडिट: Reuters
उत्तराखंड के जंगलों में आग लगी हुई है. बुझाने की कोशिश की जा रही है. सब चाहते हैं कि ये आग बुझ जाए. लेकिन शनिवार को ऐसी आग लगाई गई, जिसके लिए हम सबको थैंक्यू बोलना चाहिए. क्योंकि ये आग अच्छी है. अच्छे मकसद से लगाई गई है.
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केन्या में हाथी दांत को बेचना या खरीदना जुर्म है. बैन है उधर ये सब. लेकिन जब कोई चीज कहीं क्राइम होती है तो पैदा होते हैं स्मगलर. मुनाफा कमाने के लिए करते हैं धड़ल्ले से जुर्म. हाथी के दांतों की पूरे दुनिया में डिमांड है. इंडिया में भी आए दिन दो-तीन हाथी दांतों के साथ चोर लुच्चके पकड़े जाते हैं.
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जहां-जहां हाथी पाए जाते हैं. वहां का यही हाल है. लोग छिपछिप कर हाथियों को मारते हैं. हाथी दांत बेचते और खरीदते हैं. केन्या सरकार ने इसी गोरखधंधे को रोकने के लिए करीब 8000 हाथियों के 16 हजार दांत जलाकर राख कर दिए. केन्या सरकार ने हाथियों के दांत के अलावा 343 गैंडों के सींग भी जलाए. न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी.
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मार्केट में दोनों की कीमत कुल मिलाकर करीब 1200 करोड़ रुपये बताई जा रही है. हाथियों के दांत की कीमत 664 करोड़ रुपये और गैंडों के की सींग करीब 531 करोड़ रुपये. बताते हैं कि दुनिया में हाथी के दांतों एक साथ पहली बार इतनी बड़ी क्वांटिटी में जलाया गया है.
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केन्याई सरकार ने कहा, 'इस आग को लगाने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद था. शिकारियों और स्मगलर्स को ये मैसेज देना कि जानवरों के दांत, सींग बेचने का ये धंधा चलने नहीं देंगे.' केन्या सरकार ने इन दांतों और सींगों को जलाने के लिए हजारों लीटर डीजल यूज कर डाला.
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बता दें कि ये हाथी दांत और सींग शिकारियों और स्मगलर्स के पास से बीते कुछ सालों में जब्त किए गए थे. हालांकि इसमें उन हाथियों और गैंडों के दांत और सींग शामिल थे, जिनकी अपने आप मौत हो गई थी. केन्या के नैरोबी नेशनल पार्क में इस काम को अंजाम दिया गया.
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केन्या के प्रेसिडेंट उहूरू केन्याटा ने कहा, 'हाथियों की मौत का मतलब है, कुदरत की मौत. हम बिजनेस के लिए हाथियों को मारे जाने की निंदा करते हैं. ऐसे किसी भी काम को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.'

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