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CRPF कैंप पर हमला करने वाले 16 साल के आतंकी का वीडियो सामने आया है

बोला- जब ये वीडियो रिलीज होगा, मैं जन्नत पहुंच चुका होउंगा.

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सीआरपीएफ कैंप पर हमला करने वाले आतंकी ने पहले वीडियो रिकॉर्ड किया था.
जम्मू-कश्मीर में चल रहे ऑपरेशन ऑलआउट के तहत चुन-चुन कर आतंकियों का सफाया किया जा रहा है. पिछले कुछ महीनों में खासतौर पर इन आतंकी संगठनों के कई सरगनाओं को खत्म कर दिया गया. इससे बौखलाए आतंकियों ने पुलवामा में सीआरपीएफ के ट्रेनिंग कैंप पर 2017 के आखिरी दिन हमला किया. 36 घंटे बाद ये ऑपरेशन खत्म हो गया है. दो आतंकियों की बॉडी पहले ही मिल गई थी. अब तीसरे आतंकी की भी डेड बॉडी मिल गई है. हमले को रोकने में हालांकि 5 जवान भी शहीद हो गए. Capture जो तीन आतंकी मारे गए, उनमें से एक कश्मीर के त्राल का रहने वाला फरदीन अहमद खआंदे था. इसके पिता जम्मू-कश्मीर पुलिस में कॉन्सटेबल हैं. 16 साल का फरदीन 15 सितंबर 2017 से गायब था. और अब आया तो फिदायीन बनके. इस बीच उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है. बम और हथियारों के बीच बैठा फरदीन इस वीडियो में उर्दू और हिंदी में बोल रहा है. इसमें उसने कहा है कि जब ये वीडियो रिलीज होगा वो जन्नत पहुंच चुका होगा. सही ही कहा था उसे 72 हूरों के पास भेज दिया गया है. उसने कश्मीरी युवकों से भारत के खिलाफ लड़ने की अपील की. इसके साथ ही उसने कहा कि - # भारत का कहना है कि कश्मीरी युवक बेरोजगारी के कारण आतंक की राह पकड़ रहे हैं. ये गलत और प्रोपगैंडा है. असल में ये भारत के कश्मीर में किए गए काम का जवाब है. जेहाद है. # बोला कि भारतीय सेना ने हमारी जमीनों पर कब्जा कर लिया है, हमारी महिलाओं की इज्जत खतरे में है. इसलिए हम जेहाद कर रहे हैं. # आठ मिनट के इस वीडियो में उसने बाबरी मस्जिद, पठानकोट, टांगधार, पुलवामा पुलिस लाइन पर किए गए अटैक का जिक्र किया. # जैश-ए-मोहम्मद को खत्म करने के दावे को उसने गलत बताया. कहा कि हमें कभी खत्म नहीं किया जा सकता. उसने भारत के भी मुस्लिम युवाओं से आतंक की राह पकड़ने को अपील की. # जैश लीडर मौलाना मसूद अजहर और अफजल गुरू को उसने अपना प्रेरणास्रोत बताया. पूरे सम्मान के साथ दी गई शहीदों को विदाई आतंकी हमले को रोकते भारत के पांच जवान शहीद हो गए थे. इसमें कैप्टन शरीफ-उद-दीन गनाइ, तौफील अहमद, राजेंद्र नैन, प्रदीप कुमार पंडा और इंस्पेक्टर कुलदीप रॉय शामिल हैं. शहीदों को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी गई है. देखें- जैश-ए-मोहम्मद ने 2016 में भी इसी तरह से नए साल के जश्न के बीच ही हमला किया था. पठानकोट एयरबेस पर. बस तब तारीख 1 जनवरी थी. और समय रात का था. इसमें भी सात सैनिक शहीद हो गए थे. सवाल उठता है कि ऐसी घटनाएं सुरक्षाबलों के कैंप में बार-बार कैसे हो जाती हैं. हम पिछली घटनाओं से सीखते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम क्यों होते हैं. सरकारों और सुरक्षाबलों को इसके बारे में और अलर्ट होना होगा और जरूरी कदम उठाने होंगे.
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