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क्या कासगंज में चंदन गुप्ता की मौत कमल सोनकर की चलाई गोली से हुई?

कौन है ये कमल सोनकर, जिससे जुड़ी खबर के बारे में लोग फेसबुक पर खूब शेयर कर रहे हैं.

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क्या कासगंज में हुए सांप्रदायिक दंगे के बीच मारे गए चंदन गुप्ता को मारने वाली गोली कमल सोनकर नाम के शख्स की पिस्तौल से निकली थी. क्या इसी शख्स ने चंदन गुप्ता को मारा है?
क्या कासगंज में 'हिंदू' ही 'हिंदू' की गोली का शिकार बना? क्या चंदन गुप्ता को मारने वाली गोली किसी हिंदू ने चलाई थी? क्या चंदन को मारने वाले का नाम कमल सोनकर है?
ये सारे सवाल उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े हैं. 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन यहां दंगा हुआ. VHP-ABVP के लोगों और एक मुस्लिम बहुल इलाके के लोगों के बीच. वहां काफी तनाव बना हुआ है. तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं. सोशल मीडिया पर कई नए खुलासे हो रहे हैं. उनमें से ही एक खुलासा है कमल सोनकर. फेसबुक पर चल रहा है कि चंदन गुप्ता की मौत जिस गोली से हुई, वो गोली चलाने वाला शख्स कमल सोनकर था. इस पोस्ट को खूब शेयर किया जा रहा है. हजारों लोग लाइक कर रहे हैं. फॉरवर्ड, शेयर सब जमकर हो रहा है.

क्या लिखा है इस पोस्ट में? वायरल हो रहे पोस्ट के मुताबिक 26 जनवरी को कासगंज में हुए सांप्रदायिक टकराव के दौरान मारे गए शख्स चंदन गुप्ता के हत्यारे का पता चल गया है. ऐसी पोस्ट्स में उसका नाम कमल सोनकर बताया जा रहा है. इसमें लिखा जा रहा है कि कमल सोनकर ने अपनी पिस्तौल से तीन गोलियां चलाईं और इन्हीं गोलियों ने चंदन गुप्ता की जान ली. पोस्ट की भाषा काफी आक्रामक है. गालियों का इस्तेमाल करते हुए सवाल किया गया है कि अब तो हिंदू संगठनों को चुप हो जाना चाहिए. क्योंकि हिंदू को मारने वाला भी हिंदू ही है.

सच क्या है? ये कमल सोनकर नाम काल्पनिक नहीं है. मगर इसको कासगंज दंगे से जोड़ना ऐसा ही है, जैसे 'कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा' करना. कमल सोनकर ने सच में गोली चलाई थी. मगर मध्य प्रदेश में. गोली चलाकर वो भाग गया था. और उसकी गोली से कोई मरा नहीं था. मध्य प्रदेश में हुई इस अलग घटना को उत्तर प्रदेश के कासगंज से फिट किया जा रहा है.
जबलपुर में क्या हुआ ये घटना मध्य प्रदेश में जबलपुर के बेलबाग इलाके में हुई. इस बारे में वहां के अखबार दैनिक भास्कर और नई दुनिया में छपी खबर के मुताबिक गणतंत्र दिवस जुलूस के दौरान बड़ी ओमती से छोटी ओमती की तरफ जाते वक्त हवाई फायरिंग हुई. किसी ने तीन हवाई फायर किए थे. इससे इलाके में दहशत फैल गई. फायरिंग करने वाला भाग गया. पुलिस ने चौराहों पर लगे CCTV को चेक किया. इसके बाद आरोपी कमल सोनकर को गिरफ्तार किया. पुलिस ने उसके पास से पिस्टल और कारतूस बरामद किए.

कासगंज में अब तक की जांच का क्या नतीजा है? पुलिस ने पांच FIR दर्ज की हैं. 112 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से 31 आरोपी हैं, जबकि बाकियों को एहतियातन अरेस्ट किया गया है. जहां तक कमल सोनकर की बात है, तो इसका कोई जिक्र नहीं है. मीडिया में कई जगह मुख्य आरोपी का नाम शकील बताया जा रहा है. ये भी गलत खबर है. मुख्य आरोपी यानी वो शख्स जिसने गोली चलाई. हमने कासगंज पुलिस से बात की. SSI मुहर सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी मुस्लिम समुदाय का ही है. मगर उसके नाम का खुलासा नहीं किया गया है. पुलिस को उसके पास से एक दुनाली बंदूक भी मिली है. वो इस बंदूक का लाइसेंस पुलिस को नहीं दिखा पाया. इस बंदूक को जांच के लिए भेज दिया गया है. बंदूक का लाइसेंस किसके नाम पर है, ये भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है. जहां तक आरोपियों की बात है, तो इनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग शामिल हैं.
आप फेसबुक पर हिंदी में कमल सोनकर टाइप करके देखिए. पोस्ट्स की लाइन लग जाएगी.
आप फेसबुक पर हिंदी में कमल सोनकर टाइप करके देखिए. पोस्ट्स की लाइन लग जाएगी.

क्यों फैलाया जा रहा है ये कासगंज में हुई घटना बस कासगंज का माहौल नहीं खराब कर रही. बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और उससे भी आगे निकलकर इसका असर पूरे देश पर पड़ रहा है. सोशल मीडिया कैसे पीछे रहेगा. इस पर किसी और ग्रह के लोग तो होते नहीं. हम और आप ही होते हैं. तो कुछ हिंदू और कुछ मुस्लिम अलग-अलग अजेंडा लेकर बैठे हैं. ये जो कमल सोनकर वाली बात है, वो भी इसी के तहत आई है. ये थिअरी कि मुस्लिम ने नहीं, बल्कि किसी हिंदू ने ही चंदन गुप्ता (हिंदू) को मारा, हाथोहाथ कैच की जा रही है. ऐसा नहीं कि बस मुस्लिम ही शेयर कर रहे हों. कई हिंदू भी इसे शेयर कर रहे हैं. शेयर करके कह रहे हैं कि कमल सोनकर का नाम आना इस बात का सबूत है कि ये हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं था. कि दोनों समुदायों के बीच कोई दिक्कत नहीं हुई. बल्कि इसके पीछे कोई साजिश है. साजिश का खुलासा और इसका ब्योरा तो फिलहाल पुलिस के पास है. जहां तक दंगे की बात है, तो काश हम कह पाते कि दंगा नहीं हुआ. दोनों समुदायों में टकराव तो यकीनन हुआ और इसी टकराव ने हिंसा की शक्ल ली.
मरता इंसान है, धर्म जिंदा ही रहता है कासगंज दंगे को लेकर कई तरह की अफवाहें सोशल मीडिया पर टहल रही हैं. इनकी वजह से वहां दोबारा हिंसा भड़की. इसी वजह से एहतियात बरतते हुए पुलिस ने यहां इंटरनेट पर अस्थायी बैन लगा दिया है. ये जिस पोस्ट की हम बात कर रहे हैं, वो बहुत तेजी से वायरल हो रही है. ऐसा नहीं कि भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बातें बस एक समुदाय द्वारा की जा रही हैं. दोनों ही तरफ के लोग जमकर लिख रहे हैं. इस नफरत के चक्कर में मत पड़िएगा. इस नफरत ने किसी का भला नहीं किया. जिंदगी और मौत इंसान की होती है. धर्म तो जिंदा ही रहता है. उसका खून नहीं बहता कभी.








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