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हाई कोर्ट ने ट्विटर पर 50 लाख का जुर्माना ठोका, सरकार के आदेश को चुनौती दी थी

केंद्र सरकार ने ट्विटर को कुछ लोगों के अकाउंट, ट्वीट और URL ब्लॉक करने के आदेश दिए थे.

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सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित ने कहा कि ट्विटर को सरकार के आदेशों का पालन करना चाहिए था. (फ़ोटो/आजतक/Unsplash)

कर्नाटक हाई कोर्ट ने ट्विटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ लगाई गई ट्विटर की याचिका को खारिज करते हुए कंपनी पर ये जुर्माना ठोका है. केंद्र सरकार ने ट्विटर को कुछ लोगों के अकाउंट, ट्वीट और URL ब्लॉक करने के आदेश दिए थे. सोशल मीडिया कंपनी ने आदेश के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित ने कहा कि ट्विटर को सरकार के आदेशों का पालन करना चाहिए था. उन्होंने ऐसा करने के लिए ट्विटर पर 50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया.

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हाई कोर्ट ने क्या कहा?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की सिंगल बेंच ने फैसला देते हुए कहा,

“हम सरकार के इस स्टैंड से सहमत हैं कि उसके पास न केवल ट्वीट ब्लॉक करवाने की शक्ति है, बल्कि वह अकांउट भी ब्लॉक करवा सकती है. कंपनी की याचिका में कोई दम नहीं है. कंपनी ने अदालत को वजह भी नहीं बताई कि केंद्र का ट्वीट ब्लॉक करने का आदेश क्यों नहीं माना गाया. ट्विटर एक मल्टी बिलेनियर कंपनी है, कोई किसान या फिर आम आदमी नहीं, जिसे कानून नहीं पता है. कानून कहता है कि सरकार का आदेश न मानने पर 7 साल की सजा और फाइन लगाया जा सकता है. यह जानते हुए भी ट्विटर ने सरकार के आदेशों का पालन नहीं किया." 

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कोर्ट ने आगे कहा कि उसके आदेश के बाद ट्विटर जिसका भी ट्वीट ब्लॉक करेगी उसे इसका कारण भी बताएगी. आगे हाई कोर्ट ने ट्विटर को 45 दिन के भीतर कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के यहां जुर्माने की रकम भरने का आदेश दिया. अगर नहीं भरा तो इस अवधि के बाद हर दिन 5 हजार और देने होंगे.  

ट्विटर ने याचिका में क्या दलील दी थी?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्विटर ने कोर्ट में यह तर्क दिया था कि एक विदेशी कंपनी के रूप में भी उसके पास संविधान के आर्टिकल 14 के तहत कुछ अधिकार हैं. याचिका में ट्विटर ने कहा,

“केंद्र के पास सोशल मीडिया पर अकाउंट ब्लॉक करने का जनरल ऑर्डर इश्यू करने का अधिकार नहीं है. अगर ऐसा कोई ऑर्डर सरकार देती है तो उसमें वजह भी बताई जानी चाहिए ताकि हम इसे यूजर्स को बता सकें. अगर ऑर्डर जारी करते वक्त वजह नहीं बताई जाती है तो इस बात की आशंका बनी रहती है कि बाद में कारण बनाए भी जा सकते हैं.”

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ट्विटर ने ये भी दावा किया था कि सरकार के आदेश सेक्शन 69 A का उल्लंघन करते हैं. सेक्शन 69 A के तहत अकाउंट यूजर्स को उनके ट्वीट और अकाउंट ब्लॉक किए जाने पर जानकारी देनी होती है. लेकिन मंत्रालय ने उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया.

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

लाइव लॉ कि रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने कहा कि ट्विटर एक विदेशी कंपनी है, इसलिए भारत के आर्टिकल 19 और 21 के तहत भारत के नागरिकों को दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजी स्वतंत्रता का अधिकार ट्विटर को नहीं दिया जा सकता है. आगे कोर्ट ने कहा,

“कोर्ट में ट्विटर को अपील दायर करने का अधिकार नहीं है. क्योंकि ट्विटर अपने यूजर्स की तरफ से नहीं बोल सकता है. जो भी ट्वीट, अकांउट ब्लॉक करवाने का आदेश दिए गए थे वो बिना विवेक के एकतरफा तरीके से नहीं लिए गए थे. ये फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए लिए गए थे. और ट्विटर को ब्लॉक करने के आदेश इसलिए दिए गए थे, ताकि लिंचिंग और मॉब वॉयलेंस की घटनाओं को रोका जा सके.”

पूरा माजरा क्या है?

- केंद्र सरकार ने फरवरी 2021 से फरवरी 2022 के बीच ट्विटर को 1,474 अकांउट, 175 ट्वीट, 256 URL और एक हैशटैग ब्लॉक करने के आदेश दिए थे. सरकार ने यह आदेश इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के सेक्शन 69 A के तहत दिए थे.
- बाद में सरकार ने पहले 4 जून, 2022 और फिर 6 जून, 2022 को ट्विटर को नोटिस जारी किया. इसमें कंपनी से पूछा गया कि ब्लॉकिंग से जुड़े आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया है और आदेश पर कार्रवाई शुरू क्यों नहीं की जानी चाहिए. 
- ट्विटर ने 9 जून को जवाब दिया कि जिस कंटेंट के खिलाफ सरकार के आदेशों का पालन नहीं किया गया है, उसके लिए ट्विटर को लगता है कि वे सेक्शन 69 A का उल्लंघन नहीं करते हैं.
- 27 जून को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने ट्विटर को नोटिस भेजकर कहा कि केंद्र सरकार के आदेश न मानने पर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
- ट्विटर ने 39 URL को ब्लॉक करने के सरकार के 10 आदेशों को कोर्ट में चुनौती दी. 26 जुलाई, 2022 को जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की सिंगल जज बेंच ने इस पर पहली बार सुनवाई की. इसके बाद केंद्र सरकार और ट्विटर दोनों ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा.
- हाई कोर्ट ने इस साल 21 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसले का मुख्य भाग 30 जून को सुनाया गया.

मोदी सरकार पर जैक डोर्सी ने क्या कहा था?

ट्विटर के को-फाउंडर जैक डोर्सी ने 12 जून को एक यूट्यूब चैनल - ब्रेकिंग पॉइंट्स को इंटरव्यू दिया था. इस इंटरव्यू में उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा है कि भारत में हुए किसान आंदोलन के दौरान सरकार की तरफ से उन पर दबाव डाला गया था. कई बार कहा गया था कि उन ट्विटर अकाउंट को बंद कीजिए, जो किसान आंदोलन को कवर कर रहे हैं और इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा,

"उदाहरण के तौर पर भारत है. भारत ने किसान आंदोलन के दौरान (ट्विटर अकाउंट ब्लॉक करने की) बहुत सारी रिक्वेस्ट हमें भेजी थीं. ये उन पत्रकारों को लेकर थीं, जो किसान आंदोलन के दौरान सरकार की आलोचना कर रहे थे. ये रिक्वेस्ट इस तरह से की गई थीं- 'हम भारत में ट्विटर बंद कर देंगे... आपके कर्मचारियों के घरों में रेड करेंगे', जो उन्होंने किया भी. कहा गया था कि अगर आपने हमारी बात नहीं मानी तो हम आपका (ट्विटर का) ऑफिस बंद कर देंगे... और देखिए ये भारत है, जो एक लोकतांत्रिक देश है."

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने जैक डोर्सी के लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि सार्वजनिक तौर पर ऐसे पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनसे पता लगता है कि किसान आंदोलन के दौरान जैक डोर्सी ट्विटर में मनमानी करते थे, भेदभावपूर्ण फैसले लेते थे और अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल भी किया करते थे.

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