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दुआ कीजिए, चंदू बाबूलाल को भी उस पार कैद में ऐसा ही पाकिस्तानी अफसर मिला हो!

इस पाकिस्तानी अफसर ने ऐसा काम किया, जो दोनों मुल्कों के ज्यादातर लोग सोच भी नहीं सकते.

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फोटो - thelallantop
एक सरहद खींची गई थी कुछ साल पहले. तमाम टोबा टेक सिंह बीच में खड़े रह गए. जो बीच में नहीं रह गए. वो दो हिस्सों में बंट गए. एक धड़ा इंडिया कहलाया. एक धड़ा पाकिस्तान. दोनों धड़े अपने-अपने धड़ों के साथ कई बार लड़ चुके हैं. जाहिर है हर बार की लड़ाई में जो धड़ा जीता, वो इंडिया था. जो हारा, वो पाकिस्तान.
अब हार-जीत से इतर बात करते हैं. एकदम ताजा वाली लड़ाई से ठीक पहले की बात. जब करगिल वॉर चल रही थी, तब दोनों मुल्कों के तमाम जवान मारे गए. कुछ पाकिस्तानी सैनिकों ने इंडियन आर्मी के शहीदों की लाश के टुकड़े-टुकड़े करके भेजे. इधर अपने जवानों के शवों के साथ ऐसा सलूक देखकर जाहिर है कि हम सब का दिल दुखा. उधर की आर्मी के जवानों के लिए मन में घृणा सी हो गई.
लेकिन अब जब करगिल युद्ध के करीब 17 बरस बीत चुके हैं. PoK में सर्जिकल स्ट्राइक हो चुकी है. लेकिन दुखद कि हमारा एक जवान बाबूलाल चौहान पाकिस्तान की गिरफ्त
में है.  तो आपको एक कहानी सुनाते हैं. पाकिस्तानी एयरफोर्स के एक फाइटर पायलट कैसर तुफैल की 'जेंटलमैनशिप' न छोड़ने की कहानी. वो भी उस दौर में, जब दोनों मुल्कों के बीच बातचीत सिर्फ बमों और तोपों से हो रही थी.
करगिल वॉर के वक्त पाकिस्तानी एयरफोर्स के डायरेक्टर्स ऑफ ऑपरेशंस थे कैसर तुफैल. हल्की उम्र का लड़का, जो साल 1975 में पाकिस्तानी एयरफोर्स में शामिल हुआ था. ये कैसर तुफैल पाकिस्तान की कई लड़ाइयों में अगुवाई करने वालों में शामिल रहे. ये कहानी है कैसर तुफैल और इंडिया के एक ग्रुप कैप्टन कमबमपति नचिकेता की. कहानी समझने के लिए साल 1999 लौटना पड़ेगा, तब जब पाकिस्तानी सरहद में इंडियन एयरफोर्स के मिग प्लेन के क्रैश होने के बाद कैसर तुफैल ने नचिकेता को टॉर्चर से बचाया.
Kaiser Tufail pakistan

28 मई 1999. फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता मिग-27 फाइटर प्लेन उड़ा रहे थे. नचिकेता को टास्क मिला था दुश्मन के बिलकुल करीब जाकर 17 हजार फुट से रॉकेट दागे जाएं. तभी इंजन में गड़बड़ी आने से उनका फाइटर प्लेन क्रेश हो गया. नचिकेता उस इलाके में गिरे, जो पाकिस्तान में था. नचिकेता के वहां गिरने के करीब आधे घंटे बाद वहां कई पाकिस्तानी जवान आ गए. पाक आर्मी के ये जवान नचिकेता को टॉर्चर करने लगे. तभी वहां सीनियर ऑफिसर कैसर तुफैल आते हैं और नचिकेता को जवानों के पास से हटाकर अपने साथ एक दूसरे कमरे में ले जाते हैं.

'पाकिस्तानी जवानों ने मुझे पकड़ रखा था. वो मुझे मारने की कोशिश कर रहे थे. क्योंकि उनके लिए मैं बस एक दुश्मन पायलट था, जिसने उनके इलाकों में फायरिंग की थी. लेकिन तभी वहां एक समझदार ऑफिसर आता है. वो शायद मेरी सिचुएशन अच्छे से समझ पाए. ये ऑफिसर कैसर तुफैल थे.

तुफैल और नचिकेता (बाएं और दाएं)
तुफैल और नचिकेता (बाएं और दाएं)

तुफैल नचिकेता को एक दूसरे कमरे में ले गए. उस कमरे में तुफैल ने नचिकेता से उनकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछा. तुफैल ने मुझे बताया कि उनके पापा की हार्ट की दिक्कत है और वो बहन की शादी की तैयारियों में लगे हुए हैं. तुफैल ने मुझसे बहुत दोस्ताना तरीके से बात की. हम दोनों ने चाय पी. मेरे लिए कुछ शाकाहारी स्नैक्स मंगवाए. हम दोनों ने फ्लाइंग्स को लेकर बात की.'

करगिल वॉर के दस बरस पूरे होने पर नचिकेता ने ये बातें द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कही थीं. बता दें कि जब नचिकेता का मिग विमान क्रैश होकर पाकिस्तान में गिरा था. तब थैंक्स टू तुफैल. नचिकेता का वो हाल नहीं हुआ, जो शहीद सौरभ कालिया के साथ करगिल की लड़ाई में हुआ था. प्लेन क्रैश की खबरें इंटरनेशनल मीडिया में रहीं. पाकिस्तानी सरकार पर दबाव रहा. और एक हफ्ते बाद पाकिस्तानी आर्मी ने नचिकेता को इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस को सौंपा. जिसके बाद नचिकेता को वाघा बॉर्डर के रास्ते इंडिया भेजा गया.
4 जून 1999 को वाघा बॉर्डर पर इंडिया लौटे नचिकेता. फोटो क्रेडिट: ap
4 जून 1999 को वाघा बॉर्डर पर इंडिया लौटे नचिकेता. फोटो क्रेडिट: ap

पाकिस्तानी आर्मी की गिरफ्त में आने के एक हफ्ते के भीतर. तारीख थी 4 जून 1999.
तुफैल इस किस्से को याद करते हुए बताते हैं,

'हम दोनों में बहुत कुछ कॉमन था. ये जानकर मुझे बहुत गजब लगा. मैंने नचिकेता से पूछा कि वो मिशन से पहले क्या करते हैं. नचिकेता ने मुझे बताया कि वो अपनी बहन की शादी के चलते छुट्टी पर था. और पता है इधर पाकिस्तान में मेरी बहन की भी शादी थी. हम दोनों की मुलाकात बहुत यादगार रही.'

Kambampati Nachiketa-2

हालांकि ऐसी भी खबरें हैं कि तुफैल के साथ के अलावा नचिकेता पाकिस्तान में जब तक रहे, तब तक उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लेकिन तुफैल ने जिस तरह से पाकिस्तानी फौजियों से नचिकेता को बचाया, वो काबिल-ए-तारीफ है. और उस बेहद कठिन वक्त में एक इंडियन का साथ इमोशनली जिसने दिया, वो एक पाकिस्तानी था.
गुलज़ार दद्दा सही कहते हैं,

'लकीरें हैं तो रहने दो, किसी ने गुस्से में आकर खींच दी होंगी'




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