कैसे हो रहा है ये काम?

मेल टुडे की खबर के हिसाब से 300 लोगों का भरा पूरा कॉल सेंटर कराची में चल रहा है. कॉल सेंटर को हेड दो हैकर्स कर रहे हैं. नाम है साजिद राणा और आबिद राणा. बताते हैं कि इन दो बंदों ने मिलकर हजारों आर्मी के ऑफिसर्स से चैटिंग के बहाने जरूरी डेटा हैक कर डाला है. ये सारा काम ISI ने इस साल जनवरी के बाद शुरू किया है.

साजिद राणा और आबिद राणा
ये पाकिस्तानी हैकर्स एक ऐसा चैटिंग ऐप यूज कर रहे हैं, जिससे चैटिंग कर रहे सामने वाले बंदे का डेटा चुराया जा सके. नेशनल सिक्योरिटी डेटाबेस के डायरेक्टर राजशेखर मूर्ति ने कहा, 'हमने पाया कि ये दो बंदे एक ऐप का यूज कर रहे हैं. ये ऐप सामने वाले के फोन का जरूरी डेटा चुरा लेता है.'

ISI के ये कॉल सेंटर कुछ फर्जी वेबसाइट्स भी चला रहे हैं. ये वेबसाइट्स इंडियन आर्मी से रिलेटेड नजर आती हैं. लोग इन वेबसाइट्स से जुड़ते जाते हैं. क्योंकि सामने वाले से अच्छे से चैटिंग हो रही होती है. इसलिए ये फर्जी प्रोफाइल वाले लोग वेबसाइट्स, ऐप्स लिंक्स का आदान-प्रदान करते हैं.
क्लिक करना ही जहर है

पहले ISI के कॉल सेंटर में लड़कियों के फर्जी प्रोफाइल के पीछे बैठे हैकर्स का खुरपेच समझिए. ये हैकर्स इंडियन आर्मी के जवानों से फेसबुक के जरिए जुड़ते हैं. अच्छी-खासी बातें शुरू होती हैं. तस्वीरों को भी भेजा जाता है. अब चैटिंग का रिश्ता पक्का समझिए. अगली स्टेज ये होती है कि चैटिंग में एक ऐप या ऐप लिंक भेजा जाता है. इस लिंक को जैसे ही डाउनलोड अथवा क्लिक किया जाता है. मोबाइल या लैपटॉप का सारा डाटा ISI के पास पहुंच जाता है. मिशन सक्सेसफुल!










