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'कुत्ते ने बिल्ली को काटा, बिल्ली ने बाप-बेटे को' तीनों की मौत, एंटी रेबीज की जगह कौन सी वैक्सीन लगवाई?

UP के Kanpur dehat में बिल्ली के काटने का मामला सामने आया है, पिता-पुत्र की मौत हुई है. बिल्ली हिंसक हो गई थी, और क्या-क्या पता लगा?

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कुत्ते ने कुछ रोज पहले ही बिल्ली को काटा था

कानपुर देहात (Kanpur dehat) से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. यहां एक पिता-पुत्र की मौत हो गई है, जिसका कारण कथित तौर एक पालतू बिल्ली का काटना बताया जा रहा है. दोनों मौतें एक हफ्ते के अंदर हुई हैं. ये मामला कानपुर देहात के अकबरपुर के अशोक नगर इलाके का है. स्थानीय लोगों ने बताया कि 58 साल के इम्तियाज उद्दीन प्राइमरी स्कूल में टीचर थे. उनके घर पर एक पालतू बिल्ली थी, जिसने कथित तौर पर इन दोनों को काट लिया था.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक करीब दो महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने बिल्ली को काट लिया था. तब उसका इलाज भी इम्तियाज उद्दीन ने कराया था. लेकिन, इसके बाद भी पिछले दिनों रेबीज से संक्रमित होकर बिल्ली हिंसक हो गई. बिल्ली ने कथित तौर पर इम्तियाज उद्दीन और उनके 25 साल के बेटे अजीम को काट लिया. इसके कुछ दिन बाद बिल्ली की मौत हो गई. अखबार के मुताबिक बिल्ली के काटने के बाद इम्तियाज और अजीम ने एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई, बल्कि टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया था.

कैसे हुई इम्तियाज और अजीम की मौत?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 नवंबर को अजीम भोपाल गया था. यहां वो एक शादी में शामिल हुआ था. वहीं अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई. परिजन उसे लेकर कानपुर आए और उसका इलाज करवाया. इलाज के दौरान ही अजीम की मौत हो गई.

इसके बाद बुधवार, 29 नवंबर को देर रात इम्तियाज उद्दीन की भी तबीयत बिगड़ गई. परिवार के लोग उन्हें तुरंत पीजीआई सैफई लेकर पहुंचे. अगले दिन उनकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई. हालांकि, मृतक इम्तियाज उद्दीन की पत्नी ने पति के रेबीज संक्रमित होने से इंकार किया है. उन्होंने मौत की वजह हार्ट अटैक बताई है. उनके मुताबिक इम्तियाज बीपी और शुगर से भी पीड़ित थे. हालांकि, दैनिक भास्कर को आसपड़ोस के लोगों ने बताया है कि पिता-पुत्र दोनों में रेबीज के लक्षण दिखने लगे थे.

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इस मामले में एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई संक्रमित पशु किसी व्यक्ति को काटे तो उसे 24 से 48 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए. वैक्सीन लगवाने में देरी करने से खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर्स के मुताबिक जरूरी नहीं कि रेबीज के लक्षण तुरंत ही सामने आएं, ये कई महीनों बाद और कई सालों बाद भी सामने आ सकते हैं. इसलिए, वैक्सीन लगवाने में ढिलाई नहीं करनी चाहिए.

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