उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर आए आदेश पर विवाद जारी है. अब इसे लेकर NDA के सहयोगी दल भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं. उत्तर प्रदेश में BJP की सहयोगी पार्टी RLD ने भी इसे लेकर सरकार को घेरा है. RLD प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा है कि सब कांवड़ यात्रियों की सेवा करते हैं (jayant chaudhary on kanwar yatra contoversay). कांवड़ लेकर जाने वाला व्यक्ति किसी की पहचान नहीं करता है.
'क्या कुर्ते पर भी लिख लें नाम... ' नेमप्लेट विवाद पर सहयोगी जयंत चौधरी की ये बातें BJP को अच्छी न लगेंगी
Jayant Chaudhary का कहना है कि कांवड लेकर जाने वाले लोग जाति-धर्म के आधार पर सेवा नहीं लेते. धर्म से इस मुद्दे को नहीं जोड़ा जाना चाहिए. और क्या सुना दिया जयंत ने BJP को?


जयंत चौधरी ने आगे कहा,
कांवड़ यात्री जाति-धर्म के आधार पर सेवा नहीं लेते. धर्म से इस मुद्दे को नहीं जोड़ा जाना चाहिए. BJP ने फ़ैसला ज्यादा सोच-समझकर नहीं लिया है, बस फैसला ले लिया. अभी भी समय है कि सरकार को फ़ैसला वापस लेना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा,
अब कहां-कहां लिखें अपना नाम. क्या अपना नाम अपने कुर्ते पर भी लिख लें, नाम देखकर हाथ मिलाओगे मुझसे?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा वाले रास्तों पर पड़ने वाली खाने-पीने की दुकानों पर उनके मालिकों का नाम लिखने का आदेश दिया था. राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए ये फैसला लिया गया है. 20 जुलाई को उज्जैन के मेयर ने भी दुकान के मालिकों को अपने नाम और फोन नंबर वाली नेमप्लेट लगाने के लिए कह दिया.
इस मामले को लेकर LJP अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी सवाल उठाया था. PTI के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था,
‘गरीबों के लिए काम करना हर सरकार की जिम्मेदारी है जिसमें समाज के सभी वर्ग जैसे दलित, पिछड़े, ऊंची जातियां और मुस्लिम भी शामिल हैं. जब भी जाति या धर्म के नाम पर इस तरह का विभाजन होता है, मैं न तो इसका समर्थन करता हूं और न ही इसे प्रोत्साहित करता हूं.’
चिराग का आगे कहना था कि उन्हें नहीं लगता कि उनकी उम्र का कोई भी शिक्षित युवा ऐसी चीजों से प्रभावित होता है. ये भी बोले कि वो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के सामने अपनी आपत्तियां उठाएंगे.
सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया मामलाकांवड़ियों पर यूपी सरकार का आदेश अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है. एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके यूपी सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग की है. यह याचिका 20 जुलाई की सुबह 6 बजे ऑनलाइन दाखिल की गई है. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट कर लिया है. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच 22 जुलाई को सुनवाई करेगी.
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