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'चुपके से आंबेडकर की मूर्ति लाए और लगाने लगे... ', लखीमपुर और कासगंज में आंबेडकर जयंती पर बवाल

Ambedkar Jayanti Violence: उत्तर प्रदेश के Lakhimpur Kheri में एक कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग अचानक डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति लेकर पहुंच गए और उसे स्थापित करने की कोशिश करने लगे. इसी बात पर कार्यक्रम वालों और मूर्ति लाने वालों के बीच कहासुनी शुरू हो गई. मूर्ति खंडित होने पर हिंसा भड़क उठी. वहीं, Kasganj में भी बाबा साहेब की शोभायात्रा पर अचानक पथराव शुरू हो गया.

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लखीमपुर खीरी और कासगंज में आंबेडकर जयंती पर भड़की हिंसा. (ITG)

14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और कासगंज में माहौल तनावपूर्ण हो गया. दोनों जगहों पर अलग-अलग कारणों से विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसा में बदल गया. कहीं पत्थरबाजी हुई, तो कहीं पुलिसवाले घायल हो गए.

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पहले लखीमपुर खीरी की बात करते हैं, जहां मैलानी थाना क्षेत्र के बांकेगंज कस्बे में आंबेडकर जयंती के कार्यक्रम के दौरान हिंसा भड़क गई. बांकेगंज में सरकारी जमीन पर बाबा साहब की मूर्ति स्थापित करने को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था.

इंडिया टुडे से जुड़े अभिषेक वर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच समझौता हुआ था कि इस जगह पर सिर्फ आंबेडकर जयंती के दिन बाबा साहब की तस्वीर रखकर माल्यार्पण किया जाएगा. लेकिन इस बार कार्यक्रम के दौरान कुछ लोग अचानक मूर्ति लेकर पहुंच गए और उसे स्थापित करने की कोशिश करने लगे. इसी बात पर कार्यक्रम वालों और मूर्ति लाने वालों के बीच कहासुनी शुरू हो गई. विवाद के बीच ही मूर्ति गिर गई और खंडित हो गई. इसके बाद माहौल और ज्यादा बिगड़ गया.

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देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया. कई पुलिस गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज करना पड़ा. इस झड़प में करीब 20 पुलिसवाले और एक स्थानीय पत्रकार घायल हो गए.

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की. एडिशनल एसपी वेस्ट अमित कुमार राय ने कहा,

"आज (14 अप्रैल) बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर मैलानी के बांकेगंज कस्बे में सरकारी जमीन पर बाबा साहेब का फोटो रखकर माल्यार्पण का प्रोग्राम था. इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा चुपके से बाबा साहेब की एक मूर्ति लाकर माल्यार्पण के स्थान पर स्थापित किया जाने लगा. इसी क्रम में वहां जो कार्यक्रम के आयोजक थे, उनमें से कुछ लोगों द्वारा इसका विरोध किया गया. दोनों पक्षों में आपस में विवाद हुआ. इस दौरान मूर्ति गिरने से खंडित हो गई. तब तक पुलिस को इसकी सूचना मिल चुकी थी."

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एडिशनल एसपी वेस्ट अमित कुमार राय ने आगे बताया,

"पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने स्थिति को संभाला. मूर्ति को लेकर अलग कराया गया और उसे थाने भिजवा दिया गया. इसी दौरान कुछ अराजक तत्वों द्वारा पुलिस के साथ झड़प की गई और कुछ लोगों द्वारा पत्थरबाजी की गई. इस पर पुलिस द्वारा हल्का बल प्रयोग करके इधर-उधर कर दिया गया. वर्तमान में पुलिस व्यवस्था यहां मजबूत है. किसी प्रकार की कोई लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं है. इस घटना के दौरान किसी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई है. सभी पुलिसकर्मी सुरक्षित हैं."

कासगंज में भी हुआ बवाल

कासगंज जिले के सहावर थाना क्षेत्र के चहका गुनार गांव में आंबेडकर जयंती की शोभायात्रा के दौरान भी हालात बिगड़ गए. जैसे ही शोभायात्रा एक मोहल्ले से गुजर रही थी, अचानक पथराव शुरू हो गया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक जमकर पत्थरबाजी होती रही.

हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों ने सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाकर रास्ता जाम कर दिया. इस दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया. भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया.

इस मामले में एक महिला समेत करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है. प्रशासन का कहना है कि वीडियो फुटेज के आधार पर बाकी आरोपियों की पहचान की जा रही है और सख्त कार्रवाई होगी. राजीव कुमार जाटव, (उपाध्यक्ष शोभायात्रा) ने कहा कि प्रशासन की अनुमति से शोभायात्रा निकाली जा रही थी, लेकिन मोहल्ले में पहुंचते ही पथराव शुरू हो गया.

इंडिया टुडे से जुड़े देवेश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, कासगंज के जिलाधिकारी (DM) प्रणय सिंह ने कहा,

"करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है. बाकी की पहचान कर कार्रवाई होगी."

कासगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) ओमप्रकाश सिंह ने जानकारी दी,

"जिले में कई शोभायात्राएं निकल रही थीं, गुनार गांव में कुछ लोगों द्वारा पथराव किया गया… लोगों से जो बात हुई है, उससे ये स्पष्ट हो रहा है कि खासकर, जानबूझकर, पता नहीं उसके पीछे की क्या राजनीतिक मंशा है? साजिश क्या है? ये तो हमारी जांच से क्लियर हो जाएगा, लेकिन खासकर यादव बिरादरी के लोगों द्वारा जानबूझकर इसे (शोभायात्रा को) अवरुद्ध किया गया, जबकि ये शोभायात्रा परंपरागत रूप से थी… अब स्थिति नियंत्रण में है."

फिलहाल दोनों जिलों में भारी पुलिस बल तैनात है. प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी है.

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