पालघर में पहले भी हुए हमले, वक्त रहते महाराष्ट्र सरकार ने कदम क्यों नहीं उठाए?
पालघर मॉब लिंचिंग का ज़िक्र करते हुए जावेद अख़्तर ने पूरे समाज को आईना दिखा दिया है
ये भी कहा कि दोषियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.
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जावेद अख़्तर अक्सर अलग-अलग सोशल मुद्दों पर अपनी राय रखते रहते हैं. कई बार विवादों में भी घिर जाते हैं. (फाइल फोटो- PTI)
स्क्रीन राइटर, गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर ने महाराष्ट्र के पालघर मॉब लिंचिंग पर कड़ा रिएक्शन दिया है. जावेद अख़्तर ने 20 अप्रैल को ट्वीट किया कि जो लोग दो साधुओं और उनके ड्राइवर की लिंचिंग के लिए ज़िम्मदार हैं, उन पर सख़्त एक्शन लिया जाना चाहिए और उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए. उन्होने लिखा कि लिचिंग जैसे जघन्य अपराध की किसी भी सभ्य समाज में जगह नहीं हो सकती है.
जावेद अख़्तर इससे पहले भी अलग-अलग सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते रहे हैं. कई बार वो विवादों में भी घिर चुके हैं. उन्होंने इससे पहले एक वीडियो मैसेज दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ग्लोबल महामारी कोरोना वायरस से लड़ने के लिए देश में लोगों का एकजुट रहना अहम है. क्या हुआ था पालघर में? महाराष्ट्र के पालघर के गड़चिनचले गांव में 16 अप्रैल की रात भीड़ ने तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. मृतकों में जूना अखाड़े के दो साधु- 35 साल के सुशील गिरी महाराज, 70 साल के चिकणे महाराज कल्पवृक्ष गिरी और उनका एक उनका ड्राइवर 35 साल का नीलेश तेलगड़े शामिल हैं. दोनों साधुओं ने अपने एक दोस्त के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कांदिवली से करीब 120 किलोमीटर का रास्ता भी तय कर लिया था. पीटीआई के अनुसार, कुछ लोगों ने तीनों को रोक लिया और उन्हें गाड़ी से निकाल कर पीट-पीटकर मार डाला. भीड़ को इन पर चोर होने का शक था. वहीं मौके पर पहुंची पुलिस जब घायलों को गाड़ी में ले जाने लगी, तो ग्रामीणों ने पुलिस पर भी हमला कर दिया था. पुलिस गाड़ी और घायलों को छोड़ भाग खड़ी हुई. इस हमले में कुछ पुलिसवाले भी घायल हुए थे.
पालघर में पहले भी हुए हमले, वक्त रहते महाराष्ट्र सरकार ने कदम क्यों नहीं उठाए?
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