अमेरिका ने भारी टैरिफ लगाकर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है, वहीं दूसरी तरफ जापान ने भारत पर अपना पूरा भरोसा (Japan Indian Investment) दिखाया है. जापान ने भारत में अपने निवेश लक्ष्य को दोगुना कर दिया है. इसे 5 ट्रिलियन येन (लगभग 2.99 लाख करोड़ रुपये) से बढ़ाकर 10 ट्रिलियन येन (लगभग 5.98 लाख करोड़ रुपये) कर दिया गया है.
जापान भारत में बंपर पैसा लगा रहा, इन नए समझौतों के बारे में जानकर ट्रंप को अच्छा नहीं लगेगा!
Australia के बाद, भारत को Japan का भी साथ मिला है. जिस भारत को Donald Trump ने 'मृत अर्थव्यवस्था' कहा था, वहां जापान ने अपने निवेश लक्ष्य को दोगुना कर दिया है.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के लिए जापान में थे. 30 अगस्त को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन की सवारी के साथ उन्होंने अपनी यात्रा का समापन किया. अब वो चीन में हैं.
भारत पर जापान का भरोसाभारत में जापान का बढ़ता निवेश, दोनों देशों के बीच विश्वास का एक मजबूत संकेत है. दोनों पक्षों ने साल 2026 तक पब्लिक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और फाइनेंस के लिए 5 ट्रिलियन येन का लक्ष्य रखा था. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ये लक्ष्य 2025 में ही हासिल कर लिया गया है. इसलिए इसे बढ़ाकर 10 ट्रिलियन येन कर दिया गया. रिपोर्ट है कि दो साल में दोनों देशों ने 170 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के कारण, भारत पर भारी टैरिफ लगाया है. 25 प्रतिशत टैरिफ में 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ, पेनल्टी के तौर पर जोड़ा गया है. ऐसे में ये बहुत अहम हो जाता है कि भारत के साथ कौन-कौन देश खुलकर खड़े हैं. इस फेहरिस्त में जापान के अलावा ऑस्ट्रेलिया भी है.
ट्रंप ने भारत को निशाना बनाते हुए, यहां की अर्थव्यवस्था को मृत कह दिया था. लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने इस पर सहमति नहीं दिखाई. ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और व्यापार मंत्री डॉन फैरेल ने साफ कहा कि वो भारत को अपार संभावनाओं वाले देश के तौर पर देखते हैं. डॉन फैरेल ने कहा कि वो भारत के साथ व्यापार समझौते करना चाहते हैं, जिसके लिए बातचीत चल रही है. उन्होंने ट्रंप के लाए टैरिफ का भी समर्थन नहीं किया.
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जियोपॉलिटिक्स के मद्देनजर, भारत के परिपेक्ष्य में एक और ऐसी घटना घट रही है, जिस पर दुनिया भर की नजर है. अमेरिका भारत-रूस तेल व्यापार को लेकर नाराज है, जबकि रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वालों में चीन सबसे आगे है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त चीन में हैं, जहां उनकी बैठक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होगी.
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