ये हमारा डेढ़ दिमाग नहीं है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (माने वो बैंक जहां खाता खुलवाने में लोगों की उम्र निकल जाती है) में सयाने लोग काम करते हैं. उन्होंने ढेर सारी रिसर्च के बाद एक रिपोर्ट बनाई है जिसका इशारा कुछ यूं है कि देहात में जिन लोगों ने जनधन खाता खुलवाया, उन्होंने तंबाकू पीटना और शराब गटकना कुछ कम कर दिया है.

जनधन योजना के तहत ज़्यादातर खाते नोटबंदी के बाद खुले (फोटोःएपी)
SBI में एक इकोनॉमिक रिसर्च विंग है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस विंग ने अलग-अलग राज्यों में जनधन खातों के असर पर रिसर्च की है. इस रिसर्च में शहरी और देहाती इलाकों में कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स में आए बदलाव की पड़ताल की गई है. कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स माने खुदरा बाज़ार में सामान के दाम में उतार-चढ़ाव का हिसाब. इसी के आधार पर बैंक की रिपोर्ट में कुछ दावे किए गए हैं-
# जिन राज्यों के देहाती इलाकों में जनधन खातों की संख्या 50% से ऊपर है, वहां महंगाई में कमी आई है.
# महंगाई में कमी के अलावा जनधन खातों की वजह से तंबाकू और शराब जैसी नशीली चीज़ों के सेवन में कमी आई है.
# SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइज़र सौम्य कांति घोष के मुताबिक शराब और तंबाकू पर कम हुआ खर्च नोटबंदी के बाद लोगों के बर्ताव में आए बदलाव की वजह से हो सकता है. माना जाता है कि नोटबंदी के बाद लोगों ने अपने खर्च में कटौती की.
# अक्टूबर 2016 के बाद से बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र और राजस्थान में स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा है.

जनधन खाते खुलने के बाद से डिजिटल पेमेंट में उछाल आने की बात की जाती है
टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस मामले में चीफ स्टैटीशियन रहे प्रोनब सेन का बयान छापा है. प्रोनब का मानना है कि हमारे पास पैसा किसी रूप में उपलब्ध है, इस से हमारे खर्च करने का तरीका तय होता है. कैश होने और पैसा बैंक में जमा होने की सूरत में हम अलग-अलग तरह से खर्च करते हैं. तो हो सकता है कि जनधन खातों के चलते लोगों में बचत को लेकर जागरूकता पैदा हुई हो और वो तंबाकू और शराब जैसी चीज़ों पर कुछ कम खर्च कर रहे हों
लेकिन इस मामले में सबकी एक राय नहीं है. कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि लोगों के बर्ताव में आए बदलाव और जनधन खातों के खुलने के बीच सीधा ताल्लुक साबित करने के लिए ठोस डाटा और तगड़ी रिसर्च चाहिए. खर्च करने के पैटर्न में बदलाव जनधन खातों के अलावा और बहुत सारी चीज़ों से हो सकता है, जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार और बाज़ारों तक पहुंच.
SBI की रिपोर्ट फिलहाल तैयार हो रही है. इस साल के अंत तक इसके सामने आने के आसार हैं. प्रधानमंत्री जनधन योजना से आम आदमी का भला हुआ कि नहीं, इस पर बहस जारी है. हो सकता है कि इस रिपोर्ट के आने के बाद इस बहस को नई दिशा मिले.
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