हमास से जंग में इजरायल में भी लोग दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं. कई लोग किसी भी हालत में हमास को बख्शने के मूड में नहीं हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गाजा में इजरायली सेना द्वारा की जा रही बमबारी का विरोध कर रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए इजरायल के पुलिस चीफ कोबी शबताई का एक बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि इजरायल में गाजा के समर्थन में प्रोटेस्ट्स से निपटने के लिए इजरायली पुलिस 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएगी.
इजरायल पुलिस चीफ अपने ही लोगों से- 'गाजा का समर्थन किया तो बस में बिठाकर वहीं भेज देंगे'
कई लोग किसी भी हालत में हमास को बख्शने के मूड में नहीं हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गाजा में इजरायली सेना द्वारा की जा रही बमबारी का विरोध कर रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए इजरायल के पुलिस चीफ कोबी शबताई का एक बयान सामने आया है.


पुलिस चीफ शबताई का एक वीडियो इजरायली पुलिस के टिक-टॉक चैनल पर मंगलवार को शेयर किया गया. इसमें शबताई प्रोटेस्टर्स को कह रहे हैं कि गाजा का सपोर्ट न करें. इजरायली मीडिया में उनका बयान तब चर्चा में आया जब पुलिस ने हाइफा में एक रैली को तितर-बितर किया और 6 लोगों को गिरफ्तार किया. ये रैली गाजा पट्टी के लोगों के समर्थन में निकाली जा रही थी. कोबी शबताई कहते हैं,
“जो भी इजरायली नागरिक बनकर रहना चाहता है, उसका स्वागत है. जो कोई भी गाजा के साथ अपनी पहचान जोड़कर देखता है, उनका भी स्वागत है. मैं उन्हें वहां जा रही बसों में बिठा दूंगा.”
टिक-टॉक पर जारी शॅार्ट वीडियो में शबताई आगे कहते हैं,
“उकसावे के इरादे से किए गए किसी भी काम के लिए इजरायली पुलिस 'ज़ीरो टॉलरेंस' अपनाएगी. विरोध प्रदर्शनों के लिए कोई परमिशन नहीं है. इजरायल इस समय जंग की स्थिति में है. ऐसी स्थिति में नहीं जहां हम सभी को आकर खुद को आजमाने देंगे.”
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार इजरायली पुलिस के प्रवक्ता एली लेवी ने आर्मी रेडियो को बताया कि 7 अक्टूबर से शुरू हुई जंग के बाद से अब तक इजरायल में 63 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों को आतंकवाद का समर्थन करने और लोगों को उकसाने के लिए हिरासत में लिया गया है.
वहीं इजरायली पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर ड्रॉर असरफ ने इस पूरे मामले पर कहा,
"ऑपरेशन गार्डियन ऑफ वॉल्स (2021 में गाजा से युद्ध जिसमें कई शहरों में अरब-यहूदी लोगों के बीच झड़प हुई थी) के बाद से हमने अपना सबक सीख लिया है. हमने एक वॉर रूम बनाया है जो इस तरह के उकसावे वाले प्रदर्शनों से निपटने का काम करता है. हमारा वॉर रूम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी किसी भी उकसावे की योजना की पहचान करता है. इन योजनाओं का टारगेट पब्लिक आर्डर को नुकसान पहुंचाना होता है."
इसी बीच इजरायली संसद के 'एथिक्स पैनल' ने एक लेफ्ट विचारधारा के सांसद ओफर कैसिफ को 45 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया है. यह पैनल इजरायली संसद में नैतिक मूल्यों का ध्यान रखता है.

कैसिफ ने एक इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गाजा पर किए जा रहे हमले की तुलना नाज़ियों के 'फाइनल सॉल्यूशन' से की थी. एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने विदेशी मीडिया से कहा,
“इजरायल ये हिंसा चाहता था.”
सस्पेंड होने के बाद कैसिफ ने सोशल मीडिया पर अपने सस्पेंशन को 'अभिव्यक्ति की आज़ादी के ताबूत में एक और कील' बताया.
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