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जंग खत्म, इमरजेंसी हटी, अब नेतन्याहू पर इजरायल की कोर्ट में चलेगा मुकदमा

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ने वाली है. उनके खिलाफ चल रहे मुकदमें में फिर से सुनवाई शुरू होने वाली है. इजरायली पीएम के खिलाफ साल 2020 में ट्रायल शुरू हुआ था. इस मुकदमे में दोषी करार दिए जाने पर उन्हें जेल जाना पड़ सकता है.

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बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ने वाली है. (इंडिया टुडे)

ईरान से चल रहे युद्ध में सीजफायर के बाद इजरायल में ‘इमरजेंसी’ हटा ली गई है. इमरजेंसी हटने के साथ ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए परेशान करने वाली खबर आई है. एक इजरायली कोर्ट के प्रवक्ता ने बताया कि नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे में फिर से सुनवाई शुरू की जाएगी. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो हफ्तों की सीजफायर के घोषणा हुई. इसके बाद इजरायल में लागू इमरजेंसी हटा लिया गया है. 

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सीजफायर के बाद से इजरायल में ईरान की ओर से कोई भी मिसाइल आने का अलर्ट नहीं मिला है. इमरजेंसी के चलते तेल अवीव और दूसरे शहरों में स्कूल और वर्कप्लेस बंद कर दिए गए थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली कोर्ट ने एक बयान जारी कर बताया कि इमरजेंसी खत्म होने के बाद अदालतें फिर से काम शुरू कर देंगी. मामलों की सुनवाई शुरू हो जाएगी. इसमें ये भी बताया गया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई 12 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच शुरू होने की संभावना है. 

बेंजामिन नेतन्याहू पहले ऐसे इजरायली प्रधानमंत्री हैं, जिन पर किसी तरह के क्राइम का आरोप लगा है. कई सालों की जांच के बाद साल 2019 में उन पर रिश्तवतखोरी, फ्रॉड और विश्वासघात के आरोप लगाए गए हैं. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इन आरोपों से इनकार किया है. इजरायली पीएम के खिलाफ साल 2020 में ट्रायल शुरू हुआ था. इस मुकदमे में दोषी करार दिए जाने पर उन्हें जेल जाना पड़ सकता है. कई अलग-अलग कारणों से मुकदमें में बार-बार देरी हुई है. 

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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस मामले में बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन किया है. उन्होंने इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से उन्हें माफी देने की अपील की है.

इजरायल में नेतन्याहू पर उठ रहे सवाल

इजरायली मीडिया और विपक्ष सीजफायर को लेकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर हमलावर है. विपक्षी नेता याएर लापिड ने इसे राजनीतिक आपदा करार दिया है. वहीं याएर गोलान ने इसे बड़ी नाकामी करार दिया है. इजरायली मीडिया रपटों में कहा गया कि नेतन्याहू ने ट्रप को ऐसी योजना दी थी, जिसमें कुछ हफ्तों में ईरान की मिसाइल क्षमता नष्ट करने, रिजीम बदलने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने का दावा किया गया था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया. 

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इजरायली न्यूजपेपेर हारेत्ज के डिफेंस एक्सपर्ट अमोस हरेल ने कहा कि अमेरिका के सामने इजरायल की साख काफी कमजोर हुई है. अब आरोप लग रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप को बेकार युद्ध में घसीटा गया. 

वीडियो: ईरान-अमेरिका सीजफायर पर नेतन्याहू का बयान, ट्रंप के अकेले का फैसला था?

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