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नर्मदा में चढ़ाया गया 11000 लीटर दूध, पर्यावरण एक्सपर्ट टेंशन में क्यों आ गए?

दूध को टैंकरों में भरकर नदी के किनारे तक लाया गया. श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंत्रोच्चार किया गया और इसी बीच दूध को बहते नदी की धारा में प्रवाहित कर दिया गया.

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नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध चढ़ाया गया. (फोटो- इंडिया टुडे)

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में एक धार्मिक आयोजन के दौरान 11 हजार लीटर दूध चढ़ाने का मामला चर्चा में है. यह आयोजन भैरूंदा तहसील क्षेत्र के सप्त ऋषियों की तपोभूमि सातदेव स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में किया गया. ये आयोजन 21 दिनों तक चले विशाल धार्मिक अनुष्ठान के समापन पर अवसर पर दूध के टैंकर से करीब 11 हजार लीटर दूध से नर्मदा नदी का अभिषेक किया गया.  

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सोशल मीडिया पर नर्मदा में दूध चढ़ाने का वीडियो वायरल होने लगा, जिसके बाद पर्यावरण से जुड़े लोगों ने इस पर बोलना शुरू किया. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्रोग्राम बुधवार, 8 मार्च को जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर भैरूंदा इलाके के सतदेव गांव में एक 'महायज्ञ' के दौरान हुआ. प्रोग्राम के आयोजकों ने बताया कि यह दूध नदी में जल को पवित्र करेगा. साथ ही तीर्थयात्रियों के कल्याण और समृद्धि के लिए किए गए प्रार्थनाओं तौर पर नदी को चढ़ाया गया. 

दूध को टैंकरों में भरकर नदी के किनारे तक लाया गया. श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंत्रोच्चार किया गया. इसी बीच दूध को बहते नदी की धारा में प्रवाहित कर दिया गया.

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इस बीच, पर्यावरण से जुड़े लोगों ने इस पर चिंता जताई है. साथ ही इससे नदी के इकोसिस्टम पर पड़ने वाले असर को लेकर चेतावनी भी दी है. पर्यावरण के लिए काम करने वाले अजय दुबे ने कहा,

इतनी बड़ी मात्रा में दूध पानी में घुली ऑक्सीजन को कम कर सकते हैं. इससे नदी के इकोसिस्टम पर बुरा असर पड़ता है. इसका असर उन लोकल लोगों पर पड़ता है, जो पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर हैं. साथ ही ये पानी में रहने वाले जीवों के साथ पालतू जानवरों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं.

दुबे ने आगे जोर देते हुए कहा कि धार्मिक चढ़ावे प्रतीकात्मक और सोच-समझकर ही किए जाने चाहिए. इस मामले पर पर्यावरण मामलों के जानकार सुभाष पांडे ने कहा कि 11 हजार लीटर दूध एक बड़ा जैविक प्रदूषक (organic pollutant) है. पांडे ने आगे बताया, 

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इसमें ऑक्सीजन की बहुत ज्यादा जरूरत होती है और यह ऑक्सीजन की कमी कर सकता है. इससे जलीय जीवों की मौत, यूट्रोफिकेशन यानी नदी में पोषक तत्वों की अधिकता और पानी के पीने लायक न रहने का कारण बन सकता है.

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बता दें कि नर्मदा नदी राज्य के अमरकंटक से निकलती है और पश्चिम की ओर फैली हुई है. यह महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरती है और अंत में  खंभात की खाड़ी के रास्ते अरब सागर में जाकर मिल जाती है.   

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