ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मारने के लिए इजरायल ने ब्लू स्पैरो मिसाइल का इस्तेमाल किया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है. ये मिसाइल अपनी लंबी रेंज और बेहद सटीक निशानेबाजी के लिए जानी जाती है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान में बड़े पैमाने पर हमले किए. इन्हीं हमलों के दौरान खामेनेई के कंपाउंड को निशाना बनाया गया.
खामेनेई को 'ब्लू स्पैरो' से मारा गया? किसी को मारने के लिए नहीं बनी थी ये मिसाइल
Iran vs Israel: इस मिसाइल का मकसद अलग-अलग तरह की बैलिस्टिक मिसाइलों की नकल करना था, ताकि एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता जांची जा सके. बाद में इसे मॉडिफाई कर इसमें वॉरहेड जोड़ा गया, ताकि यह वास्तविक हमलों में इस्तेमाल की जा सके.


इराक में हमले के संभावित रास्ते पर इस मिसाइल का मलबा मिलने का दावा किया गया है, जिसे कुछ रिपोर्ट्स इस ऑपरेशन से जोड़कर देख रही हैं. तो क्या है इस मिसाइल की खासियत और इस जंग में इसका इस्तेमाल क्यों और कैसे किया गया? सब कुछ जानते हैं.
क्या है ब्लू स्पैरो मिसाइल?
इंडिया टुडे से जुड़े आदित्य बिदवई की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लू स्पैरो मिसाइल को इजरायल की कंपनी Rafael Advanced Defense Systems ने विकसित किया है. ये एक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है, यानी इसे लड़ाकू विमान से दागा जाता है. शुरुआत में इसका इस्तेमाल इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम को टेस्ट करने के लिए एक टारगेट मिसाइल के रूप में किया जाता था. यानी ये युद्ध में किसी को मारने के लिए या नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बनाई गई थी.
स्पैरो फैमिली में तीन प्रकार की मिसाइलें बताई जाती हैं-
- ब्लैक स्पैरो
- ब्लू स्पैरो
- सिल्वर स्पैरो
इनका मकसद अलग-अलग तरह की बैलिस्टिक मिसाइलों की नकल करना था, ताकि एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता जांची जा सके. बाद में ब्लू स्पैरो को मॉडिफाई कर इसमें वॉरहेड जोड़ा गया, ताकि यह वास्तविक हमलों में इस्तेमाल की जा सके.

ब्लू स्पैरो की लंबाई लगभग 6.5 मीटर, वजन 1900 किलोग्राम और रेंज 2000 किलोमीटर तक है. ये बहुत तेज स्पीड से उड़ती है. हाई बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर जाती है. बाद में इसे मॉडिफाई करके इसमें वॉरहेड लगाया गया, ताकि यह दुश्मन के टारगेट पर हमला कर सके.
ब्लू स्पैरो की खासियत
- लंबाई: लगभग 6.5 मीटर
- वजन: करीब 1900 किलोग्राम
- रेंज: 2000 किलोमीटर तक
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: F-15 लड़ाकू विमान
इसका गाइडेंस सिस्टम इतना एडवांस्ड है कि ये छोटे से टारगेट जैसे टेबल या कुर्सी को भी निशाना बना सकती है. इजरायल के F-15 लड़ाकू विमानों ने कथित तौर पर 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी से ये मिसाइलें दागीं, ताकि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम की जद में आए बिना हमला किया जा सके.

खामेनेई की मौत में क्या रोल?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ज्वाइंट ऑपरेशन से पहले सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) ने महीनों तक खामेनेई की लोकेशन ट्रैक की. जब वे एक निश्चित स्थान पर मौजूद थे, तब तेहरान स्थित उनके कंपाउंड पर प्रिसिजन मिसाइलें दागी गईं.
कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि ब्लू स्पैरो या इसके वेरिएंट जैसे- ब्लैक स्पैरो का इस्तेमाल किया गया. हमले में खामेनेई के साथ उनकी पत्नी और कुछ अन्य लोगों की मौत हो गई. जबकि उनके बेटे मोहम्मद के गंभीर रूप से घायल होने का दावा है. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

हमले की रणनीति
बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में सिर्फ ब्लू स्पैरो ही नहीं, बल्कि अन्य स्टैंड-ऑफ मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया, जिनमें रैम्पेज, रॉक्स और एयर लोरा जैसी मिसाइलें शामिल बताई जा रही हैं. रणनीति ये थी कि पहले ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और कमांड सेंटर को कमजोर किया जाए, ताकि बाद के हमले आसान हो सकें. इराक में मिले कथित मलबे को ब्लू स्पैरो के बूस्टर से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे इसके इस्तेमाल के दावे को और मजबूती मिल रही है.
युद्ध की मौजूदा स्थिति
अमेरिका–इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का ये चौथा दिन है. दोनों ओर से मिसाइल हमले जारी हैं. ईरान ने इजरायल के साथ-साथ बहरीन और कुवैत जैसे देशों पर भी मिसाइलें दागीं. वहीं अमेरिका और इजरायल का कहना है कि वे ईरान के शासन तंत्र को कमजोर करने के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे.
वीडियो: इजरायल-ईरान युद्ध के बीच स्पेन ने अमेरिका को कैसा झटका दे दिया?
















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