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संभल में जामा मस्जिद के निर्माण से पहले क्या था? ASI ने ये बताया

Sambhal के एक वकील सत्य प्रकाश यादव ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन दायर करके ASI से पूछा था कि क्या मस्जिद को पहले से मौजूद किसी खंडहर की जगह बनाया गया था. इसके अलावा उन्होंने जमीन के मालिक का नाम और मालिकाना हक की जानकारी देने वाले दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी थी.

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संभल की जामा मस्जिद के बारे में कई नई जानकारी सामने आई हैं. (इंडिया टुडे)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह पता चल सके कि संभल में जामा मस्जिद पहले से मौजूद किसी संरचना को ध्वस्त करके बनाई गई थी या किसी खाली जमीन पर. ASI ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को ये जानकारी दी है. ASI ने ये भी कहा है कि उसके पास संभल जामा मस्जिद के निर्माण के समय (जोकि साल 1526 में माना जाता है) जमीन के मालिक की पहचान करने वाले डॉक्यूमेंट्स भी नहीं हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये जानकारी संभल के एक वकील सत्य प्रकाश यादव द्वारा दायर सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब में सामने आई है. उन्होंने मुगल काल की मस्जिद के निर्माण से संबंधित जानकारी मांगी थी. इसमें ये भी पूछा गया था कि क्या मस्जिद को पहले से मौजूद किसी खंडहर की जगह बनाया गया था. इसके अलावा सत्य प्रकाश ने जमीन के मालिक का नाम और मालिकाना हक की जानकारी देने वाले दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी थी.

इन सवालों पर ASI ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि उसके कार्यालय में ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. आवेदक सत्य प्रकाश यादव ये भी पूछा था कि जब स्थल को सरकारी संरक्षण में लिया गया था, तब वहां किस तरह की संरचनाएं मौजूद थीं. बाद में फिर क्या निर्माण हुए और मस्जिद से जुड़े पिछले विवादों का क्या रिकॉर्ड है. ASI ने इस पर जवाब दिया कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी दर्ज नहीं है.

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मस्जिद के निर्माण के समय के सवाल पर ASI ने कहा कि उसके अभिलेखों से पता चलता है कि इसका निर्माण साल 1526 में हुआ था. ASI ने सहायक सामग्री का जिक्र भी किया. उसके मुताबिक, साल 1920 में एक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से इसे ASI के संरक्षण में लिए जाने के बाद इसी नाम से संरक्षित किया गया है. एक और सवाल के जवाब में ASI ने बताया कि वर्तमान में यह संरचना एक मस्जिद के तौर पर मौजूद है. 

कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तर्क दिया था कि अनुपलब्धता के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी देने से गलत तरीके से इनकार किया गया था. इस पर ASI ने जवाब दिया कि उसके रिकॉर्ड में मौजूद सारी जानकारी दे दी गई है. और उसे ऐसी जानकारी जुटाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके पास मौजूद ही नहीं है.

वीडियो: आखिर क्या 1991 वाला पूजा स्थल अधिनियम, जिसकी संभल मस्जिद विवाद के बाद फिर से बात हो रही है ?

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