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चर्चित IRS अधिकारी सत्यब्रता कुमार ने VRS ले ली, नीरव मोदी, विजय माल्या जैसे बड़े केस देखे

सत्याब्रता कुमार कई बड़े नेताओं के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच का भी हिस्सा रह चुके हैं. उनका आधिकारिक रिटायरमेंट 2037 में होना था. लेकिन उन्होंने 11 साल पहले ही VRS ले ली जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है.

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सत्यव्रत कुमार (फोटो आज तक)

विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, महादेव ऑनलाइन स्कैम और कितने ही ऐसे बड़े घोटालों और घोटालेबाजों की जांच करने वाले IRS अधिकारी सत्याब्रता कुमार ने समय से पहले नौकरी छोड़ने का फैसला किया है. सत्याब्रता 2004 बैच के भारतीय राजस्व विभाग के अधिकारी हैं. उन्होंने 2013 से 2024 तक मुंबई और उसके बाद बंगाल में विभिन अहम पदों पर काम किया है. 

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सत्याब्रता कुमार कई बड़े नेताओं के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच का भी हिस्सा रह चुके हैं. उनका आधिकारिक रिटायरमेंट 2037 में होना था. लेकिन उन्होंने 11 साल पहले ही VRS ले ली जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है.  

ED में 12 साल से कार्यरत

48 साल के सत्याब्रता कुमार फिलहाल पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिशनर (अपील) के पद पर तैनात थे. इससे पहले उन्होंने लगभग 12 साल तक प्रवर्तन निदेशालय में डेप्युटेशन के तौर पर काम किया जो किसी भी अधिकारी के लिए काफी लंबा समय है. इसी बीच उन्होंने कई अहम केस संभाले जिनमें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़ा 12,500 करोड़ रुपये का पंजाब नैशनल बैंक घोटाला, विजय माल्या से जुड़ा 9,200 करोड़ रुपये का लोन डिफ़ॉल्ट केस, इकबाल मिर्ची के आतंकियों को पैसा भेजने और ड्रग्स से जुड़ा केस और अन्य कई मामले शामिल हैं. 

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सत्याब्रता ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप के करीब 1,700 करोड़ रुपये के मामले की भी जांच की. ये वही केस है जिसमें कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी सामने आया था.

सत्याब्रता कुमार की तरह पहले भी कई अधिकारी समय से पहले नौकरी छोड़ चुके हैं. इनमें एक बड़ा नाम है कपिल राज का जिन्होंने जुलाई 2025 में ED में ही संयुक्त निदेशक के पद पर रहते हुए रिटायरमेंट से करीब 15 साल पहले नौकरी छोड़ दी थी. कपिल 2009 बैच के IRS अधिकारी थे जो झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर चुके थे.

क्या होता है डेप्युटेशन?

डेप्युटेशन सरकार की वो प्रक्रिया है जिसमें किसी अधिकारी को किसी दूसरे विभाग या किसी अन्य स्थान पर नौकरी के लिया भेजा जाता है. इस प्रक्रिया के फायदे और नुकसान दोनों गिनाए जाते हैं. फायदा ये माना जाता है कि सरकार अधिकारियों को दूसरे विभाग में भेजती है ताकि उनका अनुभव बढ़ाया जा सके. साथ ही, अगर कोई अधिकारी किसी विषय में माहिर है तो उसके इस गुण का फायदा लिया जा सके. इसके लिए उसे समय-समय पर अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता है, जहां जाकर वो उस विषय पर काम करते हैं. 

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नुकसान ये कि नेता अपने करीबी अधिकारियों को अपने हिसाब से डेप्युटेशन पर भेजते हैं. माना जाता है कि कभी-कभी किसी अधिकारी को ‘सजा के तौर’ पर भी ऐसी जगह भेजा जाता है जो कई प्रकार की चुनौतियों से भरी होती है.

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