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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस्तीफा दिया? आखिरी पोस्ट में जता गए बड़ी चिंता

ईरान इंटरनेशनल ने लिखा है कि ये झगड़ा ईरानी सेना और अधिकारियों के बीच का है. ऊंचे पदों पर बैठे लोग जंग रोकना चाहते हैं, लेकिन सेना राज़ी नहीं है. नतीजतन, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपना इस्तीफा दे दिया.

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान | फ़ाइल फोटो: इंडिया टुडे

क्या ईरान में अब बगावत, नाराजगी और मतभेद का दौर शुरु हो गया है. ये सवाल इसलिए क्योंकि खबर है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपना इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे का दावा ईरान इंटरनेशनल न्यूज़ पोर्टल की एक रिपोर्ट में किया गया है. ये झगड़ा ईरानी सेना और अधिकारियों के बीच का है. ऊंचे पदों पर बैठे लोग जंग रोकना चाहते हैं, लेकिन सेना राज़ी नहीं है. नतीजतन, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपना इस्तीफा दे दिया. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ने इस नाराज़गी के साथ इस्तीफा दिया कि जब सब कुछ सेना ही संभाल रही है तो हमारा क्या काम है.

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इस रिपोर्ट में लिखा है,

‘सूत्र के अनुसार, पेजेश्कियान ने कहा कि उनकी सरकार को देश के बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों की प्रक्रिया से लगभग बाहर कर दिया गया है. रिवोल्यूशनरी गार्ड के कट्टरपंथी गुटों ने सब कुछ अपने कंट्रोल में ले लिया है. पेजेश्कियान ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में उनके लिए सरकार चलाना और अपनी संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों को निभाना संभव नहीं रह गया है. इस वजह से उन्होंने तुरंत पद छोड़ने की इच्छा जताई है.’

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पेजेश्कियान के इस्तीफे में बड़ा पेच!

पेजेश्कियान के इस्तीफे का दावा ईरान इंटरनेशनल ने किया है. खुद पेजेश्कियान ने इसका कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. कुछ संस्थान ऐसे भी हैं जो इस्तीफे वाली बात से इनकार करते हैं. Iran's Today ने X पोस्ट में कहा कि इस्तीफे वाली बात अफवाह है. पोस्ट में लिखा,

‘ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के करीबी सूत्रों ने राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. ईरानी राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट पर शेयर किए गए एक वीडियो में पेजेश्कियान ने कहा कि वो ईरान की तरक्की और समृद्धि के लिए पूरी दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे. उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि वो अपने पद पर बने हुए हैं और देश के विकास के लिए काम जारी रखने का इरादा रखते हैं.’

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इसके साथ कुछ मंत्रियों ने भी इस्तीफे वाली खबर को गलत बताया है. लेकिन खुद राष्ट्रपति ने इसपर कुछ नहीं बोला है. पेजेश्कियान ने अपने आखिरी X पोस्ट में लिखा, 

‘बड़ी चुनौतियों का सामना बिना कठिनाइयां झेले नहीं किया जा सकता. इन उतार-चढ़ाव भरे हालात से निकलने के लिए लोगों की जागरूकता और सबके सहयोग की जरूरत है. हमें देश की असली स्थिति और समस्याओं के बारे में लोगों को सही जानकारी देनी चाहिए, ताकि समाज का हर वर्ग उनके समाधान में भागीदारी कर सके. ये एक ऐसी समस्या है, जिसे अलग-अलग रहकर नहीं, बल्कि मिलकर ही हल किया जा सकता है.’

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पेजेश्कियान का ये पोस्ट भी कंफ्यूजन से भरा है. इस बयान में ईरान के प्रति उनकी चिंता और नाराज़गी दोनों झलकती है. अमेरिका-ईरान युद्ध में ईरान सीना चौड़ा कर लड़ रहा है. ना झुकने को तैयार है, ना एक कदम पीछे हटने को. अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को लगातार टक्कर दे रहा है. लेकिन बाहर से जितना मज़बूत दिख रहा है, क्या अंदर से भी उतना ही ठोस है?  

पिछले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के नेता अब जंग रोक देना चाहते हैं. लेकिन, ईरानी सेना के आगे उनका ज़ोर नहीं चल रहा. खुद सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इस हालत में नहीं हैं कि सत्ता संभाल सकें.

23 अप्रैल को अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोजतबा खामेनेई को लेकर एक खबर छापी थी. रिपोर्ट में दावा किया था कि मोजतबा खामेनेई के ट्रीटमेंट को सीक्रेट रखा जा रहा है. बताया गया कि उनके एक पैर का पहले ही तीन बार ऑपरेशन हो चुका है. उनके एक हाथ की भी सर्जरी हुई है. उनका चेहरा और होंठ भी बुरी तरह जल चुके हैं. इतना कि उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम लीडर की ऐसी हालत के बीच देश की कमान सेना के हाथ में है. राष्ट्रपति को सुप्रीम लीडर से मिलने तक नहीं दिया गया. ऐसी ही तमाम चीज़ों से नाराज़ राष्ट्रपति के इस्तीफा देने की खबर है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स इसे अफवाह बता रही हैं. बाकी, आपकी क्या राय है, कॉमेंट करके बता सकते हैं.

वीडियो: दुनियादारी: क्या ट्रंप ने ईरान के आगे घुटने टेक दिए?

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