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सरकारी नर्स ने गर्भवती को प्राइवेट अस्पताल भेजा, वहां डॉक्टर पेट चीरकर भाग गया, महिला की मौत

पुलिस ने आरोपी डॉक्टर नसीम अहमद और उनकी मेडिकल टीम के सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. सोमवार, 1 जून को इस केस में दो गिरफ्तारियां भी हुईं. एक नर्स सलमा और एक हेल्पर को पुलिस ने अरेस्ट किया है. फरार डॉक्टर पर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित किया है.

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ऑपरेशन के बाद आशा कार्यकर्ता की मौत. (सांकेतिक फोटो- India Today)

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के एक प्राइवेट अस्पताल में 34 साल की गर्भवती आशा कार्यकर्ता की मौत हो गई. उनके पति का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर उनकी पत्नी का पेट बिना टांका लगाए छोड़कर भाग गए. इसकी वजह से उनकी मौत हो गई. 

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पुलिस ने आरोपी डॉक्टर नसीम अहमद और उनकी मेडिकल टीम के सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. सोमवार, 1 जून को इस केस में दो गिरफ्तारियां भी हुईं. एक नर्स सलमा और एक हेल्पर को पुलिस ने अरेस्ट किया है. फरार डॉक्टर पर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित किया है. 

गर्भवती महिला का पेट चीरने के बाद भाग गया डॉक्टर?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के पति देव नारायण ने बताया कि 29 मई की रात को उनकी पत्नी सीमा को लेबर पेन हुआ. वो उन्हें लेकर सरकारी अस्पताल गए. वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. सिर्फ एक स्टाफ नर्स मौजूद थी. उसने सीमा को कुछ दवाएं दीं और देव नारायण से कहा कि सीमा की हालत खराब है. बिना ऑपरेशन के डिलीवरी नहीं हो पाएगी. उसने उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल के बारे में बताया और कहा कि वो वहां के डॉक्टरों को जानती है. वहां उसका ठीक से इलाज हो जाएगा.

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देव नारायण मान गए तो नर्स ने तुरंत सरकारी एंबुलेंस बुलवाई और सीमा को प्राइवेट हॉस्पिटल में भेज दिया. वहां पहुंचकर देव नारायण ने देखा कि अस्पताल की हालत तो काफी खराब है. वहां तो बेसिक चीजें भी नहीं हैं. फिर भी वहां मौजूद डॉ. नसीम और उनकी टीम ने देव नारायण पर ऑपरेशन के लिए जोर डाला. वो तैयार हो गए तो सीमा को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया. ऑपरेशन के बाद सीमा ने एक लड़के को जन्म दिया.

देव नारायण ने पुलिस को बताया कि इसके बाद सीमा की हालत बिगड़ने लगी. ऑपरेशन के बाद मरीज को जो जरूरी देखभाल चाहिए होती है, वो सीमा को नहीं दी गई. यहां तक कि सीमा के पेट पर टांका लगाए बिना ही डॉक्टर भाग गए. उनका दावा है कि इसी वजह से उनकी पत्नी की मौत हो गई. 

डॉक्टरों के खिलाफ केस

देव नारायण और सीमा की चार बेटियां हैं. इनमें जो सबसे बड़ी है वो 11 साल की है. उन्होंने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है. उन्होंने कहा कि बाद में पता चला कि जिस डॉक्टर से सीमा का ऑपरेशन किया था, उसके पास बीएएमस की डिग्री थी. वह बड़ा ऑपरेशन करने के लिए काबिल भी नहीं था. 

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उन्होंने आरोप लगाया कि नसीम अपने साथियों के एक नेटवर्क के जरिए काम करता है. उसके लोग कमजोर, गरीब और बेबस लोगों को पैसे के लालच में उसके अस्पताल भेज देते थे. 

पुलिस इन सभी आरोपों की जांच कर रही है. सोनभद्र के पुलिस अधिकारी हर्ष पांडेय ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है. लगातार छापेमारी चल रही है. अस्पताल को सील कर दिया गया है. उससे जुड़े रिकॉर्ड्स जुटाए जा रहे हैं ताकि कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके.

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