इरफ़ान जयपुर से थे. बचपन वहीं बीता. एक्टिंग भी वहीं से शुरू की. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद जयपुर में ही थिएटर से जुड़ गए. वहां उन्हें एक्टिंग की ए, बी, सी, डी सिखाई रवि चतुर्वेदी ने. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से पास आउट होकर रवि जयपुर गए. उन्होंने कुछ होनहार बच्चों का एक ग्रुप बनाया, थिएटर के लिए. इस ग्रुप में इरफ़ान भी शामिल थे. बस यहीं से इरफ़ान के एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई. वो रवि को हमेशा अपना थिएटर गुरु मानते रहे.
कॉलेज के दिनों के ये किस्से पढ़ और तस्वीरें देख एक बार फिर इरफ़ान से प्रेम हो जाएगा
इरफ़ान के गुरु ने बताईं पुरानी बातें, जब इरफ़ान साइकल से चलते थे.

'आज तक' से जुड़े शरत कुमार ने रवि से बात की. इरफ़ान के बारे में. उन्होंने बताया इरफ़ान बहुत मेहनती थे. रात-दिन एक करते थिएटर में काम करते थे. उन्हें जो भी चुनौती दी जाती, वो उसमें खरे उतरते. रवि कहते हैं,
'वो मेरा बहुत अच्छा छात्र था. कुछ स्टूडेंट्स टीचर्स की बातों का अक्षरश: पालन करते हैं, इरफ़ान ने उसी तरह मेरी बातों का पालन किया और हमेशा मुझे क्रेडिट दिया. उसके अंदर कभी भी नाम मात्र का भी घमंड नहीं आया. वो बड़ा एक्टर बना, नेशनल अवॉर्ड भी जीता, हॉलीवुड में भी काम किया, उसके बाद भी उसमें घमंड कभी नहीं आया. न ही उसके साथ कोई विवाद हुआ. मुंबई में रहकर भी उसने खुद पाक-साफ रखा, जो बहुत मुश्किल होता है. उसने अपनी मेहनत से अपनी जगह बनाई थी.'
रवि कहते हैं कि इरफ़ान के जाने से वो बहुत दुखी हैं. उन्होंने कहा कि इरफ़ान को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी, जब उनकी तरह छोटी जगहों में रहने वाले टैलेंटेड लोगों को आगे लाया जाएगा, मौका दिया जाएगा.

थिएटर में अदाकारी करते इरफ़ान की कुछ तस्वीरें. (फोटो- शरत कुमार)
NSD में सेलेक्शन के पहले पिता की मौत
इरफ़ान ने नेशनल स्कूल ऑफ (NSD) में से भी थिएटर की पढ़ाई की थी. जयपुर के बाद वो NSD ही गए थे. रवि बताते हैं कि इरफ़ान के NSD के सेलेक्शन की खबर आने के 15 दिन पहले ही उनके पिता की मौत हो गई थी. रवि ने उन्हें कहा था कि वो ये मौका चूकने न दें, क्योंकि उन्हें बहुत आगे जाना है.
शेयरिंग साइकिल से स्टार का सफ़र
रवि ने बताया कि इरफ़ान की ज़िंदगी के कई साल अभावों में गुज़रें हैं. बताया कि जब वो थिएटर आते थे, तो शेयरिंग साइकिल से आते थे. जयपुर से इरफ़ान NSD गए, फिर बॉलीवुड में जगह बनाने मुंबई चले गए. जहां कई सालों तक उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा. रवि बताते हैं,
'मैं भी मुंबई चला गया था. इरफ़ान ने मुझसे मदद मांगी. मैंने कहा मैं तुम्हारी मदद नहीं करूंगा, तुम्हें खुद अपना मुकाम बनाना है. हालांकि मैंने कुछ डायरेक्टर्स के पास उसे भेजा ज़रूर. इरफ़ान हर फिल्म रिलीज़ होने पर मेरे से बात करता था. पान सिंह तोमर के वक्त भी उसका फोन आया था. मैंने कहा कि इस फिल्म के लिए अगर तुम्हें नेशनल अवॉर्ड नहीं मिला, तो समझना जूरी में ही कोई खोट है. मगर उसे अवॉर्ड मिला. स्लमडॉग मिलियनेयर के वक्त भी वो फोन करता था.'

अपने थिएटर ग्रुप के साथ इरफ़ान. (फोटो- शरत कुमार)
रवि के मुताबिक, इरफ़ान और उनके परिवारों के बीच भी अच्छे संबंध हैं. बताया कि इरफ़ान उनके बच्चों को गुरु भाई कहते थे. जब भी मिलते, गर्मजोशी से मिलते.
राजस्थान सरकार से इरफ़ान के लिए अवॉर्ड चाहते हैं
रवि कहते हैं कि इरफ़ान को हर तरह का अवॉर्ड मिला, लेकिन राजस्थान में आज तक उसे कोई अवॉर्ड नहीं मिला. संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड के लिए राजस्थान सरकार ने कभी उनका नाम तक नहीं भेजा. रवि कहते हैं कि शायद अब इरफ़ान के निधन के बाद राजस्थान सरकार कुछ सोचे या उनके नाम पर कुछ करे.
वीडियो देखें: क्या है न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर वो बीमारी जो इरफान खान को हुई है?










