इरोम शर्मिला चानू. नाम सुनते ही एक चिर-परिचित फोटो सामने आ जाती है. अनशनरत. मुरझाया चेहरा, मगर हौसले कायम. अस्त-व्यस्त बाल. नाक में ड्रिप लगी है. मणिपुर. पूर्वोत्तर के ‘सेवेन सिस्टर्स’ राज्यों में से एक. प्राकृतिक खूबसूरती से भरा-पूरा. इरोम यहीं की हैं. 16 बरसों तक राज्य में कानून सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम(आफ्सपा) के खिलाफ अनशन. कुछ खाया नहीं इस दौरान. उनका अनशन दुनिया के सबसे लंबे भूख हड़तालों में से एक माना जाता है. 9 अगस्त 2016 का दिन. सरकार की लगातार अनदेखी के बाद इरोम ने अपना अनशन तोड़ दिया. उस वक्त उनके चेहरे से मायूसी साफ़ झलक रही थी. अब जबकि चुनाव आयोग ने मणिपुर समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है, उसके पहले इरोम ने सोमवार को कहा कि वो मणिपुर के वर्तमान मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी. ओकराम 3 बार से लगातार मणिपुर के मुख्यमंत्री हैं.
इरोम ओकराम इबोबी सिंह पर वादा नहीं निभाने का आरोप लगा रही हैं. इरोम ने कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री बन कर इस कठोर क़ानून को खत्म कर दूंगी.’ मुख्यमंत्री कहते हैं, ‘इरोम के आरोप निराधार हैं. 2014 में राज्य के सात विधानसभा क्षेत्रों से आफ्सपा हटा लिया गया है. बाकी के लिए प्रयास जारी है.’
इरोम शर्मिला ने ‘पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस एलायंस’ पार्टी का गठन किया है. दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल जिस तरह तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित के खिलाफ लड़े और जीत कर नायक बने. इरोम का ये दांव उसी राह पर है. उम्मीद की जा सकती है कि इरोम मणिपुर में बदलाव और विकास की नई लकीर खींचने में कामयाब होंगी.
ये स्टोरी अभिषेक ने की है.