ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी वाला एक बड़ा होर्डिंग लगाया गया. इस पर लिखा है- 'We Will Kill Trump'. यानी ‘हम ट्रंप को मार डालेंगे.’ 3 नवंबर 2026 को तेहरान के मशहूर एंगेलाब स्क्वायर में ये विशाल बिलबोर्ड (Billboard) लगाया गया. इस पर ट्रंप का सिर झुका हुआ है और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे दिखाया गया है.
‘हम ट्रंप को मार डालेंगे,’ तेहरान में लगे बड़े पोस्टर, ईरान से अमेरिका को धमकी
ईरान की राजधानी तेहरान में 3 नवंबर को 'We Will Kill Trump' लिखा हुआ एक विशाल होर्डिंग दिखा. इसमें Donald Trump को जेल की सलाखों के पीछे दिखाया गया है. आसपास के पोस्टरों में JD Vance, Steve Witkoff और Benjamin Netanyahu की खून से सनी तस्वीरें भी हैं.

आसपास लगे दूसरे पोस्टर में डॉनल्ड ट्रंप, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चेहरे खून से सने हुए हैं. इनके पीछे अमेरिका और इजरायल के फटे हुए झंडे भी दिखाई देते हैं. लेकिन सवाल है कि आखिर ईरान ऐसा करके अमेरिका को क्या मैसेज देना चाहता है? क्या ये सिर्फ अमेरिका के खिलाफ गुस्से का इजहार है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति है?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 नवंबर को तेहरान के मशहूर एंगेलाब स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे. उनके हाथों में लाल झंडे थे. वे 'There Will Be Blood' यानी ‘खून बहेगा’ जैसे नारे लगा रहे थे. लोग ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की मांग कर रहे थे. खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमलों में हुई थी. इसी के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ था.
पोस्टरों में अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और इजरायल और उसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ ईरान का गुस्सा साफ नजर आता है. लेकिन तेहरान में ट्रंप के खिलाफ इस तरह के पोस्टर पहली बार नहीं लगे हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की राजधानी में कई मौकों पर ऐसे पोस्टर और प्रदर्शन देखने को मिले हैं. कहीं, ट्रंप को ताबूत से बाहर निकलते दिखाया गया, तो कहीं जेल की कोठरी में बंद दिखाया गया.
आर्ट एग्जिबिशन में भी लगी तस्वीर2 नवंबर को तेहरान के ताजरीश स्क्वायर में एक आर्ट एग्जिबिशन भी लगाई गई. इसमें ट्रंप की खून से सनी तस्वीरें प्रदर्शित की गईं. एक तस्वीर में उनके चेहरे पर पैर रखा हुआ दिखाया गया. दूसरी तस्वीर में बम से उनका चेहरा ढका हुआ था. ईरान में सार्वजनिक जगहों पर इस तरह के पोस्टर और म्यूरल लंबे समय से राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं. इनका मकसद अपने समर्थकों में जोश पैदा करना और विरोधियों को चुनौती देना होता है.

लेकिन इस बार इन पोस्टरों की टाइमिंग काफी अहम है. क्योंकि एक तरफ तेहरान की सड़कों पर अमेरिका के खिलाफ गुस्सा दिखाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत भी चल रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि ईरान के साथ समझौता हो सकता है. 2 नवंबर को भी उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच डील संभव है.
इस बातचीत में कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. कतर के जरिए दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है. 3 नवंबर को कतर ने उम्मीद जताई कि दोनों देश किसी अंतरिम समझौते पर पहुंच सकते हैं. कतर के मुताबिक, दोनों पक्ष उसके प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं.
लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है. ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए, उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करे और फ्रीज किए गए ईरानी पैसे जारी करे. इसके बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत के लिए तैयार हो सकता है.
ईरान क्या चाहता है?ईरान का कहना है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक समझौता आसान नहीं है. और इसी बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई भी की है. 2 नवंबर को अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म आइलैंड पर सीमित हवाई हमले किए. अमेरिकी अधिकारियों ने इन्हें 'Defensive Strikes' यानी रक्षात्मक हमले बताया. उनका दावा था कि ईरान की तरफ से अमेरिकी विमानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का खतरा था. इसलिए अमेरिकी सेना ने वहां मौजूद मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया.
ये हमले ऐसे वक्त हुए, जब ट्रंप ईरान के साथ समझौते की बात कर रहे थे. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया कि इन हमलों का मतलब दोबारा बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू करना नहीं है. ईरान ने इन हमलों की निंदा की है. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि जब तक सैन्य हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है.
अमेरिका में चुनाव जारीइस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव भी हुए. इन चुनावों में राष्ट्रपति नहीं चुना जाता. बल्कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की सीटों के लिए मतदान होता है.
डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है. शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेट्स को कुछ अहम सीटों पर कामयाबी मिली है. हालांकि संसद में किस पार्टी का बहुमत होगा, इसका फैसला अभी बाकी है. चुनाव में महंगाई और ईरान युद्ध भी बड़े मुद्दे रहे.
यानी इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच एक अजीब स्थिति बनी हुई है. एक तरफ बातचीत के जरिए युद्ध खत्म करने की कोशिश हो रही है. दूसरी तरफ सैन्य हमले और एक-दूसरे को धमकियां देने का सिलसिला भी जारी है.
फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी है. कतर के मध्यस्थों को दोनों पक्षों के जवाब का इंतजार है. वहीं अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का अधिकार अपने पास रखा है.
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ऐसे में तेहरान में लगा 'We Will Kill Trump' वाला Billboard सिर्फ एक पोस्टर नहीं है. ये ईरान की तरफ से अमेरिका को दिया गया राजनीतिक संदेश भी है. ईरान दिखाना चाहता है कि युद्ध में हुए नुकसान के बावजूद वह अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं है. लेकिन क्या दोनों देश बातचीत के जरिए युद्ध खत्म कर पाएंगे या फिर मिडटर्म चुनाव के बाद टकराव और बढ़ेगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा.
वीडियो: दुनियादारी: नेतन्याहू ईरान हमले से बचाएंगे चुनाव में कुर्सी?













