ईरान में 23 साल की एक महिला को एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए मौत की सजा सुनाई गई है. महिला पर पोस्ट के जरिए 'ईशनिंदा' करने का आरोप है. इस साल की शुरुआत में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे. उसी दौरान नजमेह अमीनी नाम की इस महिला को गिरफ्तार किया गया था. वो ईरान के मशहद की रहने वाली हैं और अकाउंटिंग की स्टूडेंट हैं.
'मशरूम खाने के बाद' पैगंबर पर टिप्पणी की, महिला को ईरान ने मौत की सजा दी
पिछले महीने अमीनी ने जेल से एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की थी. इसमें अमीनी ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की थी. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, वकीलों और मानवाधिकार संगठनों से अपने मामले की जांच करने की मांग की थी.

इंंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नजमेह ने जेल से एक ऑडियो मैसेज भेजा है. इसमें उन्होंने बताया कि 16 सितंबर, 2026 को ईरान की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई.
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि ये फैसला अंतिम नहीं है. इसे अभी भी ईरान के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.
ईरान में साल की शुरुआत में कट्टरपंथी शासन के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे थे. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान कम से कम ‘7,000 लोगों की मौत’ हुई, जबकि ‘50,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार’ किया गया. इसी दौरान 31 जनवरी को सुरक्षा बलों ने अमीनी को गिरफ्तार किया था.
क्या-क्या आरोप लगे थे?ईरान ह्यूमन राइट्स मॉनिटर के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान अमीनी के साथ बुरी तरह मारपीट की गई थी. इसके बाद उन्हें मशहद की वकीलाबाद जेल में करीब तीन महीने तक अकेले रखा गया. करीब आठ महीने तक उन्हें वे बुनियादी अधिकार भी नहीं मिले, जो कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को मिलने चाहिए.
इसके बाद अगस्त में अमीनी को मशहद की रिवोल्यूशनरी कोर्ट में पेश किया गया. उन पर कई आरोप लगाए गए. इनमें ‘मोहारेबे’ यानी ईश्वर के खिलाफ दुश्मनी, ‘सब-अल-नबी’ यानी पैगंबर का अपमान, इजरायल जैसे दुश्मन देश के साथ सहयोग, ईरान के सर्वोच्च नेता का अपमान और सुरक्षा बलों और सरकारी कर्मचारियों से भिड़ने के आरोप शामिल थे.
मोहारेबे और सब-अल-नबी के आरोप उनके मामले में सबसे अहम साबित हुए. ईरान के इस्लामिक दंड कानून के तहत, इन दोनों अपराधों के लिए मौत की सजा दी जा सकती है. ईरानी अखबार खुरासान के हवाले से ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने बताया कि अमीनी ने अदालत में कहा था कि उन्होंने दोस्तों के साथ साइकेडेलिक मशरूम लिया था, जिसके कारण वो बाद में नशे और भ्रम की हालत में थीं. इसी के प्रभाव में उन्होंने वो टिप्पणियां की थीं. बचाव पक्ष ने भी दलील दी कि ये टिप्पणियां अनजाने में मुंह से निकली थीं.
हालांकि, सुनवाई कर रहे जज ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने उनसे पूछा, 'अगर आप उसी भ्रम की हालत में थीं, तो आपने अमेरिका और इजरायल जैसे दूसरे लोगों या सरकार के विरोधियों का अपमान क्यों नहीं किया?' एक दूसरे मामले में अमीनी को 12 साल और छह महीने जेल की सजा भी सुनाई गई.
'मेरा नाम याद रखना'पिछले महीने अमीनी ने जेल से एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की थी. इसमें अमीनी ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की थी. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, वकीलों और मानवाधिकार संगठनों से अपने मामले की जांच करने की मांग की थी. उन्होंने कहा,
मैं आज खुद को हीरो नहीं बनाना चाहती. मुझे बस एक चीज चाहिए- मेरी आवाज बनिए. मैं एक बेगुनाह लड़की हूं, जिसके कई सपने और उम्मीदें हैं. मेरे माता-पिता मेरा इंतजार कर रहे हैं. मेरा परिवार हर रात मुझे खोने के डर में जीता है. उनके लिए हर रात सुबह होने तक का इंतजार बन जाती है.
उन्होंने आगे कहा,
मेरा नाम याद रखना. हो सकता है कि मैं दोबारा बोल न पाऊं. लेकिन जब तक मैं जिंदा हूं, मेरे मन में एक उम्मीद है. फांसी का फंदा मेरी जिंदगी खत्म करे, उससे पहले मैं अपने ईरान को खुशहाल और आजाद देखना चाहती हूं.
मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जाहिर की है कि ईरान में अधिकारी लोगों में डर पैदा करने और सरकार का विरोध करने वालों की आवाज दबाने के लिए मौत की सजा को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. ओस्लो स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) के मुताबिक, इस साल ईरान में अब तक 600 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है.
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