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लॉकडाउन फिर से बढ़ाने पर कितना बड़ा नुकसान हो सकता है, इंफोसिस के नारायणमूर्ति ने बताया

ये भी बताया कि कोरोना और लॉकडाउन से क्या-क्या बदल गया.

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इंफोसिस के फाउंडर एन. आर नारायण मूर्ति का कहना है कि देश और दुनिया को कोरोना के साथ जीना होगा. (फोटो-फाइल)
एन. आर. नारायणमूर्ति. इंफोसिस के फाउंडर. लॉकडाउन को लेकर उन्होंने बड़ी बात कही है. उनका कहना है कि अगर भारत में लॉकडाउन आगे भी जारी रहता है, कोरोना की बजाय ज्यादा मौतें भुखमरी से होगीं. उन्होंने कहा कि भारत को कोरोना के साथ जीना सीखना होगा. नारायणमूर्ति ने एक बिजनेस इवेंट को संबोधित करते हुए कहा-
हमें ये समझना होगा कि भारत लंबे समय तक इस हालात में नहीं रह सकता है. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आने वाले वक्त में कोरोना से कहीं ज्यादा मौतें भुखमरी से होंगी.
उन्होंने कहा कि विकसित देशों की तुलना में भारत में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या काफी कम है. साथ ही वायरस से मरने वालों की दर महज 0.25 से 0.50 फीसदी है. इसका मतलब कि भारत कर्व को फ्लैट करने में सफल है. भारत में COVID-19 के कुल पॉजिटिव लोगों की संख्या 31,000 से अधिक है. जनवरी में मिले पहले केस के बाद अब तक करीब 1,008 लोगों की मौत हो चुकी है. नारायणमूर्ति ने कहा,
भारत में हर साल 90 लाख लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से होती है. इनमें से एक-चौथाई मौतें प्रदूषण की वजह से होती हैं, क्योंकि पूरी दुनिया में भारत सबसे ज्यादा प्रदूषित है. अगर आप 90 लाख लोगों की मौत की तुलना पिछले दो महीने में हुई मौतों से करेंगे, तो पाएंगे यह घबराने वाली स्थिति नहीं है.
आजीविका खोने का डर नारायणमूर्ति ने कहा कि 190 मिलियन यानी 19 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र या स्वरोजगार से जुड़े हैं. लॉकडाउन की वजह से देश के एक बहुत बड़े तबके ने अपनी आजीविका खो दी है. लॉकडाउन जारी रहता है, तो और लोग अपनी आजीविका खो देंगे. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से कारोबारी 15 से 20 फीसदी रेवेन्यू खो चुके हैं. इसका असर जीएसटी कलेक्शन और टैक्स पर पड़ेगा. IMF ने इस साल भारत की विकास दर को घटाकर 1.9 फीसदी कर दिया है, जो कि पहले तक 4.5 फीसदी अनुमानित थी. फिर से काम पर लौटना होगा मूर्ति ने कहा कि बुजुर्गों और जिन्हें हेल्थ को लेकर समस्या है, उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए. मास्क पहनना चाहिए. उन्होंने कि हमें कोरोना के साथ जीना शुरू करना चाहिए. महामारी से पहले जो हम कर रहे थे, उसे फिर से शुरू करना चाहिए. हमें कमजोर लोगों की सुरक्षा करनी होगी. मूर्ति ने कहा कि हमें ऑफिस फिर से शुरू करने चाहिए. एक शिफ्ट की बजाय तीन शिफ्ट में काम हो. हमने 10 से 15 प्रतिशत लोगों के साथ ऑफिस खोलने की सिफारिश की है. सभी लोग एक ही समय पर ऑफिस नहीं आएंगे. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे. इसके बाद धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि इसके लिए डाटा ड्रिवन अप्रोच अपनाना होगा. हम चाहते हैं कि सरकार 'रिटर्न टू ऑफिस' स्ट्रेटजी पर काम करे. यह देश और इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद होगा.
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