भारतीय सेना के ट्वीट के बाद इस सवाल ने जंग छेड़ दी है. दरअसल, भारतीय सेना ने पहली बार हिममानव की मौजूदगी को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की है जिसमें बर्फ पर पैरों के बड़े-बड़े निशान नज़र आ रहे हैं. भारतीय सेना के मुताबिक मुमकिन है कि ये निशान येती के हो सकते हैं. सेना की तरफ से ट्वीट में कहा गया-
पहली बार भारतीय सेना की पर्वतारोही टीम ने मकालू बेस कैंप के करीब 32x15 इंच वाले रहस्यमयी हिममानव 'येती' के पैरों के निशान देखे हैं. ये मायावी स्नोमैन इससे पहले केवल मकालू-बरुन नैशनल पार्क में देखा गया है.
आप भारतीय हैं कृपया येती को बीस्ट ना कहें. उनके प्रति सम्मान दिखाइये. अगर आपने कहा है कि वे एक 'स्नोमैन' है.भारतीय सेना के ट्वीट के बाद लोगों के बीच फिर से इस सवाल को लेकर जंग छिड़ गई है कि क्या सच में येती या फिर हिममानव जैसी कोई चीज़ होती है? ट्विटर पर भी कई यूज़र्स ने हिममानव वाली बात पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
बीजेपी ज़रूर इस दिशा में काम कर रही होगी कि कैसे इसका इस्तेमाल चुनावी कैंपेन में किया जाए.
कई बार दुनिया के कई कोनों में इन्हें देखे जाने के दावे किए जा चुके हैं. लद्दाख के कुछ बौद्ध मठों ने भी एक बार दावा किया था कि उन्होंने हिममानव देखे हैं.

दावें हैं कि 10 फीट से ज्यादा की लंबाई वाले हिममानव का वजन 300 किलो के आस पास होता है. (सांकेतिक तस्वीर)
हिममानव को येती नाम से भी जाना जाता है. येती शब्द नेपाल के शेरपा से लिया गया है. येती का मतलब येह यानी चट्टान और तेह यानी जीव. मतलब चट्टानों का जीव. दावों के मुताबिक हिममानव के भारी भरकम शरीर की वजह से ही इन्हें येती कहा गया. ये देखने में कोई बड़ी चट्टान जैसे होते हैं.
नेपाल और तिब्बती क्षेत्र के लोगों का मानना है कि येती लम्बे घने बालों वाले होते हैं. 10 फीट से ज्यादा की लंबाई वाले हिममानव का वजन 300 किलो के आस पास होता है. दावा ये भी किया जाता है कि इंसानों की तरह चलने वाला यह प्राणी सिर्फ रात में ही बाहर निकलता है.
साल 2016 में डेली मेल के मुताबिक स्टीव बैरी नाम के युवक ने भूटान में येती के पैरों के निशान देखने का दावा किया था. स्टीव ने ये भी दावा किया था कि वो निशान येती के हो सकते हैं.
जो वैज्ञानिक मानते हैं कि हिममानव एग्ज़िस्ट करते हैं उनके मुताबिक इनकी संख्या अब काफी कम बची हुई है. इसी वजह से ये छिपकर रहते हैं और रात के वक्त निकलते हैं. लेकिन ये सब दावे हैं, दावों का क्या?














