The Lallantop

जानिए, प्लास्टिक की बोरियों में शहीदों के शव भेजे जाने का पूरा सच क्या है

अरुणाचल में शहीद सात जवानों के शवों की वायरल तस्वीर पर सेना ने अपना पक्ष रखा है.

Advertisement
post-main-image
सोशल मीडिया पर ये तस्वीर काफी वायरल हुई. लोग सेना पर अपने शहीद सैनिकों का अपमान करने का आरोप लगे रहे थे.

राजा बोला रात है रानी बोली रात है मंत्री बोला रात है संतरी बोला रात है ये सुबह-सुबह की बात है                                                 - गोरख पांडे

गोरख पांडे ने शायद चमचों-चाटुकारों के लिए लिखी थीं ये पंक्तियां. हमने आज इसका इस्तेमाल अलग संदर्भ में किया है. भावुक होकर झूठ को सच मान लेने वालों के लिए. सुनी-सुनाई बातों पर आपा खो देने वालों के लिए. उनके लिए, जिन्होंने बिना पड़ताल किए मान लिया कि भारतीय सेना ने अपने शहीद सैनिकों का अपमान किया है.


भारतीय सेना के सात शहीद. सातों के शव प्लास्टिक की बोरियों में भरे हुए. बोरियां गत्ते में रखी हुईं. ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब चल रही है. सेना की लानत-मलानत की जा रही है. आरोप है कि सेना ने इन शहीदों का अपमान किया. आपने भी देखा होगा इन तस्वीरों को. आपके भी मन में टीस उठी हो शायद. ये तस्वीर आधी ही सच्ची है लेकिन. पूरी नहीं. सुनी-सुनाई बातों पर हवा में घूंसे चलाने जैसा मामला है ये. सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ट्वीट की थीं तस्वीरें शुक्रवार, 6 अक्टूबर. भारतीय सेना का एक MI-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. अरुणाचल प्रदेश के तवांग में. चीन की सीमा के पास. उसमें भारतीय वायु सेना के पांच अधिकारी थे. सेना के दो जवान भी थे. हादसे में ये सातों शहीद हो गए. लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एच एस पनाग ने ट्वीट कर दिया. तस्वीर के साथ. शहीदों की नहीं, उनकी लाशों की. प्लास्टिक की बोरियों में भरी हुईं. जमीन पर पड़ी थीं. उन्होंने लिखा:
कल सात जवान सूरज की रोशनी में बाहर निकले. अपनी मातृभूमि भारत की सेवा करने के लिए. वापस अपने घर वो इस तरह लौटे हैं.

लोग भड़क गए, सेना को खरी-खोटी सुनाने लगे पनाग के इस ट्वीट के बाद तहलका सा मच गया. लोग इस तस्वीर को शेयर करने लगे. नाराजगी जताई. सेना को खरी-खोटी सुनाई. जाहिर है. देश की सेवा में शहीद होने वालों को सबसे ऊंचे स्तर का सम्मान मिलना चाहिए. (अव्वल तो किसी की ऐसे मौत भी नहीं होनी चाहिए.) खूब कड़ी प्रतिक्रियाएं आईं. आमतौर पर सेना आलोचना से परे मानी जाती है. अंतिम सत्य टाइप. इस मामले में उस पर भी भरोसा नहीं किया गया. मान लिया गया कि सेना ने जान-बूझकर ऐसा किया है. मामले ने खूब तूल पकड़ लिया. सेना को सामने आकर सफाई देनी पड़ी. बोलना पड़ा कि हर शहीद को पूरा सैन्य सम्मान दिया जाता है. दुर्घटनास्थल पर खुले में पड़े थे शव, जल्द से जल्द लाना जरूरी था रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है. इसके मुताबिक, जहां हादसा हुआ उसके पास ही एक मिलिटरी पोस्ट है. इस पोस्ट तक कोई सड़क नहीं जाती. पोस्ट पर तैनात जवानों ने हेलिकॉप्टर को दुर्घटनाग्रस्त होते देखा. वो तुरंत वहां पहुंचे. हेलिकॉप्टर में आग लग गई थी. उसके अंदर जो जवान थे, उन्हें नहीं बचाया जा सका. उनके अवशेषों को जमा करके नजदीकी हेलिपैड ले जाया गया. ऊंचाई पर होने के कारण यहां हेलिकॉप्टर सीमित वजन उठा सकते हैं. शव खुले में पड़े थे. उन्हें वहां से लाना था. उस समय वहां बॉडी बैग उपलब्ध नहीं था. नजदीकी सैन्य बेस से बॉडी बैग लाने का समय नहीं था. ऐसे में स्थानीय स्तर पर वहां जो उपलब्ध हो सका, उसी में रखकर जवानों के शव को गुवाहाटी लाया गया. ऐसा आमतौर पर नहीं होता है. शहीदों के लिए एक प्रोटोकॉल तय है. उसी का पालन किया जाता है. असामान्य स्थितियों में दूसरे तरीके यूज होते हैं. ये स्वाभाविक है. फैसले हमेशा परिस्थितियों के हिसाब से लिए जाते हैं. ये शुरुआती तस्वीरें हैं गत्ते में प्लास्टिक की बोरियों वाली जो तस्वीरें शेयर की जा रही हैं, वो शुरुआती हैं. शवों को उसी हालत में उनके घर नहीं भेजा गया. शवों को पहले गुवाहाटी बेस हॉस्पिटल ले जाया गया. वहां पोस्टमॉर्टम हुआ. फिर पूरे सैन्य सम्मान के साथ शवों को भेजा गया. बॉडी बैग में भरकर. ताबूत के अंदर. ऊपर तिरंगा लिपटा हुआ.
भारतीय सेना के अडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन ने एक ट्वीट कर ये तस्वीर साझा की.
भारतीय सेना के अडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन ने एक ट्वीट कर ये तस्वीर साझा की.

सच जाने बिना भावुक हो जाना बेवकूफी है जहां ये हादसा हुआ, वो पहाड़ी इलाका है. ऐसे ऊंचे इलाकों में हेलिकॉप्टर्स को बहुत सावधानी बरतनी होती है. वो सीमित वजन उठा सकते हैं. वैसे भी, ताबूत बहुत भारी होते हैं. हर जगह मौजूद नहीं होते. उन्हें हर जगह नहीं ले जाया जा सकता है. लोग अक्सर अधूरी जानकारी रखते हैं. फिर बेमतलब भावुक हो जाते हैं. बेवकूफी और भावना दो अलग-अलग शब्द हैं. सच जाने बिना भावुक हो जाना बेवकूफी है. कई लोग किसी भी मौके पर राजनीति करने में माहिर होते हैं. सिद्धहस्त. वो इस मौके पर भी राजनीति कर रहे हैं. शहीदों के शवों के बहाने सेना को घेर रहे हैं. सेना के बहाने सरकार को निशाने पर ले रहे हैं. सवालों से परे कोई नहीं हो सकता, लेकिन बेमतलब आलोचना तो नहीं की जानी चाहिए. ऐसा करने वालों का कुछ नहीं हो सकता. समझाना उनको है, जो सच में भावुक हैं. ऐसे लोगों से कहना है. संवेदनशील होना अच्छी बात है. मगर बिना सच जाने नहीं. बिना पूरी बात सुने फैसला सुना देना बेवकूफी मानी जाती है.
 सेना ने कहा है कि शहीदों को हमेशा समुचित सैन्य सम्मान दिया जाता है. शहीदों के शवों को ले जाने के लिए बॉडी बैग्स, लकड़ी के बॉक्स और ताबूतों का इस्तेमाल होता है. सेना ने इस मामले को असामान्य बताया है.
सेना ने कहा है कि शहीदों को हमेशा समुचित सैन्य सम्मान दिया जाता है. शहीदों के शवों को ले जाने के लिए बॉडी बैग्स, लकड़ी के बॉक्स और ताबूतों का इस्तेमाल होता है. सेना ने इस मामले को असामान्य बताया है.



सुनिए दो जांबाज़ पुलिसवालों को, एक ने वीरप्पन को मारा, एक ने ददुआ को: 



ये भी पढ़ें: 
भारतीय सेना की अनूठी कहानियों पर एक-दो नहीं, 8 फिल्में बन रही हैं!

उरी अटैक: वायरल हो रही है भारत के सिपाही की ललकार वाली कविता

शहीद का 10 साल का बेटा बदला लेगा, लेकिन तरीका अलग होगा

जानो पूरा प्लान: किस तरह आर्मी ने घुसकर पाकिस्तान के 38 आतंकियों को मारा!

'जब सुनाई दी भारतीय सेनाओं के पीछे हटने की खबर'

शहीद नैमन की पत्नी उनका बदला लेने के लिए आर्मी में जाना चाहती हैं

अब उनके बारे में भी जान लो, जिन्हें इंडियन आर्मी ने मार डाला

शर्मनाक: इस शहीद के जनाज़े में न कोई नेता पहुंचा, न अफसर

Advertisement
Advertisement