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भारतीय सेना ने बताया, गलवान में चीन ने किन अनोखे हथियारों का इस्तेमाल किया था

सेना के ईयर एंड रिव्यू से क्या पता चला?

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भारत और चीन के जवानों के बीच जून-2020 में गलवान घाटी में LAC के पास हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. चीन को भी काफी नुकसान हुआ था. दोनों देशों के बीच 1975 के बाद पहली बार झड़प में सैनिकों की जान गई थी. (फाइल फोटो- PTI)
साल 2020 बीत चुका है. जब एक साल बीतता है तो हममें से तमाम लोग अपने पूरे साल का विश्लेषण करते हैं. देश के रक्षा मंत्रालय ने भी किया. और इस विश्लेषण के आधार पर जारी किया- ईयर एंड रिव्यू-2020. इस रिव्यू में भारतीय सेना ने पहली बार ऑन रिकॉर्ड इस बात का ज़िक्र किया कि गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में कुछ अलहदा किस्म के हथियारों का इस्तेमाल किया गया था. रिव्यू में इन हथियारों के लिए Unorthodox Weapons शब्द का इस्तेमाल किया गया है. यानी कि गैर-परंपरागत हथियार. ऐसे हथियार, जिनका इस्तेमाल अमूमन सरहदी लड़ाइयों में नहीं किया जाता. बंदूक, तोप, मिसाइल्स इन सबसे इतर हथियार. रिव्यू का वो हिस्सा पढ़िए, जिसमें गलवान घाटी की घटना का ज़िक्र है.
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास यथास्थिति को बदलने के लिए चीन की तरफ से एकतरफा और भड़काऊ कार्रवाई की गई. जवाब में हमने पूर्वी लद्दाख में अपनी स्थिति को मजबूत रखने के लिए ठोस जवाब दिया. दोनों देशों के बीच जो भी प्रोटोकॉल औऱ समझौते हैं, उसका भारतीय सेना ने पालन किया. लेकिन PLA ने Unorthodox Weapons का इस्तेमाल किया, बड़ी संख्या में फौज जुटाई और स्थिति को बिगाड़ने का काम किया.
अब दिमाग में ये बात आती है कि ये अनऑर्थोडॉक्स हथियार हैं क्या? रिपोर्ट में तो इसकी कोई व्याख्या नहीं दी गई है. लेकिन आपको एक बात याद होगी कि गलवान की झड़प के वक्त इस तरह की ख़बरें आई थीं कि जब दोनों देशों के जवान भिड़े तो बंदूकों जैसे किसी युद्ध हथियार से नहीं, बल्कि किसी अन्य धारदार  हथियार से चीन के सैनिकों ने हमारे सैनिकों पर हमला किया. ऐसी भी बातें आईं कि कटीले तारों से लिपटे हथियार से हमला किया. अब जब भारतीय सेना ने अनऑर्थोडॉक्स हथियार का ज़िक्र किया है तो मुमकिन है कि उनका इशारा भी उसी तरफ हो. हमारे 20 जवान शहीद हुए थे रिव्यू में आगे ये भी साफ-साफ बताया गया है कि इस झड़प में हमारा कितना नुकसान हुआ था. और गलवान की घटना के बाद सेना का क्या रुख़ रहा. पढ़िए रिव्यू का ये एक और हिस्सा–
इस झड़प में चीन को हमारे क्षेत्र में दाख़िल होने से रोकने की कोशिश में हमारे 20 बहादुर जवान शहीद हुए. चीन की सेना को भी भारी नुकसान हुआ. इसके बाद 28-29 अगस्त को हमारी सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर स्थिति को मजबूत किया. मुश्किल मौसम से जूझते हुए हमारी सेना इस हाइट पर तैनात है. भारतीय सेना चीन के किसी भी ग़लत कदम का जवाब देने के लिए तैयार है. साथ ही पूरे मसले को सुलझाने के लिए बातचीत भी जारी है.
रिव्यू की कुछ और ख़ास बातें जान लेते हैं – # जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है. यहां आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों की संख्या अब 200 से भी कम है. लोकल लेवल पर आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग में भी कमी आई है. # इसके अलावा रिव्यू में भारतीय सेना के लिए तैयार किए जा रहे रोड नेटवर्क्स का भी ज़िक्र है. ख़ासतौर पर दो नेटवर्क का- अटल टनल और 80 किमी लंबे उस रास्ते का, जो उत्तराखंड के धारचूला से चीनी सीमा के पास लिपुलेख तक जाता है. # इसके अलावा ये भी बताया गया है कि 2020 में 44 नए ब्रिज सेना को सौंपे गए.

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