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लॉकडाउन के बाद ज्यादा से ज्यादा लोगों की नौकरी कैसे बचेगी, एक्सपर्ट्स ने बताया

इंडिया टुडे ई-कॉन्क्लेव में अलग-अलग फील्ड के एक्सपर्ट ने चुनौतियों पर बात की.

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कोरोना के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था और इंडस्ट्री को सामान्य होने में कितना वक्त लग सकता है एक्सपर्ट ने बताया. (सांकेतिक फोटो-पीटीआई)
इंडिया टुडे ई-कॉन्क्लेव चल रहा है. कोरोना वायरस के दौर में अलग-अलग फील्ड के लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की जा रही है. इंडस्ट्री के लोगों से बात की ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने. 30 अप्रैल को कॉन्क्लेव से जुड़े टीवीएस ग्रुप के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, अरविंद लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कुलीन लालभाई, सेलेक्ट ग्रुप के चेयरमैन अर्जुन शर्मा,  इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत छतवाल, अर्बन क्लैप के सह-संस्थापक वरुण खेतान और भारतीय उद्योग परिसंघ CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी. इनसे क्या बात हुई, आइए जानते हैं. इंडियन होटल्स के पुनीत छतवाल का कहना है कि आने वाले छह से 12 महीने में बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) ने उपभोक्तावाद की ABC समझाई है. Attitude, Behaviour and Consumption लोगों के खरीदारी की प्रवृत्ति में बदलाव देखने को मिलेगा. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई की शादी-विवाह का कारोबार फिर से पटरी पर लौटेगा. रिटेल सेक्टर कुलीन लालभाई ने कहा कि अगर रिटेल सेक्टर को जरूरी और गैर जरूरी सेक्टर में बांट दिया जाए, तो फिलहाल लोग जरूरी चीजें ही खरीद रहे हैं. चीन में देखने को मिला कि दो महीने के लॉकडाउन के 30 से 40 प्रतिशत बिजनेस घट गया. भारत में बिजनेस को फिर से पटरी पर आने में चार से छह महीने लग जाएंगे. हर कोई सुरक्षित खरीदारी के बारे में सोच रहा है. इंडस्ट्री और सरकार को इस पर काम करना होगा. हर तरह के रिटेल को सुरक्षित बनाना होगा.उन्होंने कहा कि निर्माताओं के लिए फिर से सामान्य बिजनेस में लौटने पर तब तक दिक्कत होगी, जब तक लोग फिर से खर्च करना शुरू नहीं कर देते. aapki-dukan-kirana-and-general-store-pratap-nagar-jaipur-grocery-stores-35hvb82 ऑटो सेक्टर वीनू श्रीनिवासन ने कहा कि ऑटो सेक्टर में तब तक सुधार देखने को नहीं मिलेगा, जब तक लोग गाड़ियां नहीं खरीदेंगे. लेकिन लोग गाड़ियां तब खरीदेंगे, जब उनके हाथ में पैसा होगा. इसके लिए टैक्स में कटौती करनी होगी. भारत की तुलना में अमेरिका का जीडीपी घाटा अधिक है. हमें वेस्ट मैनेजमेंट और रिसाइकिलिंग पर फोकस करना होगा. डिमांड बढ़ने में डेढ़ साल का वक्त लग जाएगा. Auto 'सरकार को चीजें और क्लियर करनी होगी' CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि तीन मई के बाद आर्थिक गतिविधियों पर मजबूती से ध्यान देने की जरूरत है. यदि आपूर्ति श्रृंखला 95 प्रतिशत ठीक है, तो आप लॉकडाउन नहीं खोल सकते हैं. अगर आपूर्ति श्रृंखला 100 प्रतिशत ठीक है, तो आप खोल सकते हैं. हरे ज़ोन और लाल ज़ोन की परिभाषा को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की जरूरत है. आपको स्टोर खोलने की आवश्यकता है. इसका कोई मतलब नहीं, अगर सिर्फ डीलर्स को परमिशन मिले. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने कुछ गाइडलाइन जारी किए हैं, लेकिन इसकी व्याख्या की जरूरत है. जिला स्तर पर इंस्पेक्टर राज नहीं चाहते हैं. स्व-नियोजित श्रमिकों और एमएसएमई के लिए एक मजबूत, अच्छी तरह से तैयार किए गए वित्तीय पैकेज की जरूरत है. विदेशी कंपनिया भारत की ओर देख रही हैं. उन पर ध्यान देने का यह अच्छा समय है. मॉल में रौनक कैसे लौटेगी? अर्जुन शर्मा का कहना है कि शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया का मानना है कि शॉपिंग सेंटर सोशल डिस्टेंसिंग का अच्छे से पालन कर सकते हैं, जो कि खुले बाजारों में नहीं किया जा सकता है. यदि किसी व्यवस्थित जगह को खोलना है और आपके पास एक उचित एयर फिल्टरेशन है, तो वायरस का प्रभाव रुक सकता है. हम लोगों को बिना मास्क के घूमने नहीं देंगे और जगह को अच्छी तरह से साफ करेंगे. अर्जुन शर्मा ने कहा कि जब सरकार अनुमति देती, देगी हम 30 प्रतिशत की क्षमता के लिए फिर से काम शुरू करेंगे. lock down shopping नौकरियों का क्या होगा? एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 50 प्रतिशत नौकरियां ख़तरे में हैं. इससे कैसे निपटा जाए? इस सवाल के जवाब में वेणु श्रीनिवासन ने कहा कि टियर -1 टियर -2 में हजारों लोगों की नौकरियां जाएंगी. लगभग 10 करोड़ लोग नौकरी खो रहे हैं. उनकी आजीविका को बचाने की जरूरत है. वहीं नौकरियों के सवाल पर पुनीत छतवाल ने कहा कि हमारे लिए यह एक तरह से मौका भी है. हमें तीन महीने की मोराटोरियम मिला है. हो सकता है 12 महीने का मिल जाए. बिजली और अन्य उपयोगिताओं पर राज्य सरकारों द्वारा छूट दी जा सकती है. लगभग 12 प्रतिशत रोजगार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हॉस्पिटैलिटी से जुड़ा है. सरकार का साथ चाहिए CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि इस समय नौकरियां एक बहुत बड़ा मुद्दा है. दुनियाभर में सरकारें नौकरियों को सपोर्ट कर रही हैं. अगर सरकार सपोर्ट करती है, तो बड़ी कंपनियां भुगतान कर सकेंगी. अतिरिक्त कार्यशील पूंजी प्रदान की जानी चाहिए. RBI की बैकस्टॉप सुविधा, तीन महीने का वेतन बिल और सरकार का समर्थन महत्वपूर्ण है. चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि हमें कुछ समय के लिए जीएसटी को खत्म करना होगा. कोई उत्पादन नहीं हो रहा है. हम उत्पादन और मांग को देख सकते हैं. सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. उपलब्ध श्रमिकों की कमी भी इस समय बड़ा मुद्दा है. अर्जुन शर्मा का कहना है कि सरकार मॉल सेक्टर की दिक्कतों से वाकिफ है.बांग्लादेश में सरकार ने बेलआउट पैकेज के साथ ही कम इंट्रेस्ट रेट पर लोन की सुविधा भी दी है. अगर बांग्लादेश कर सकता है, तो हम क्यों नहीं. केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा. बड़ी कंपनियों के साथ दिक्कत नहीं है. समस्या MSME सेक्टर के साथ है. आरबीआई इससे वाकिफ है.
अर्थात: इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान होगा, सरकार और RBI ने नहीं बताया!

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