ऑटो सेक्टर वीनू श्रीनिवासन ने कहा कि ऑटो सेक्टर में तब तक सुधार देखने को नहीं मिलेगा, जब तक लोग गाड़ियां नहीं खरीदेंगे. लेकिन लोग गाड़ियां तब खरीदेंगे, जब उनके हाथ में पैसा होगा. इसके लिए टैक्स में कटौती करनी होगी. भारत की तुलना में अमेरिका का जीडीपी घाटा अधिक है. हमें वेस्ट मैनेजमेंट और रिसाइकिलिंग पर फोकस करना होगा. डिमांड बढ़ने में डेढ़ साल का वक्त लग जाएगा.
'सरकार को चीजें और क्लियर करनी होगी' CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि तीन मई के बाद आर्थिक गतिविधियों पर मजबूती से ध्यान देने की जरूरत है. यदि आपूर्ति श्रृंखला 95 प्रतिशत ठीक है, तो आप लॉकडाउन नहीं खोल सकते हैं. अगर आपूर्ति श्रृंखला 100 प्रतिशत ठीक है, तो आप खोल सकते हैं. हरे ज़ोन और लाल ज़ोन की परिभाषा को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की जरूरत है. आपको स्टोर खोलने की आवश्यकता है. इसका कोई मतलब नहीं, अगर सिर्फ डीलर्स को परमिशन मिले. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने कुछ गाइडलाइन जारी किए हैं, लेकिन इसकी व्याख्या की जरूरत है. जिला स्तर पर इंस्पेक्टर राज नहीं चाहते हैं. स्व-नियोजित श्रमिकों और एमएसएमई के लिए एक मजबूत, अच्छी तरह से तैयार किए गए वित्तीय पैकेज की जरूरत है. विदेशी कंपनिया भारत की ओर देख रही हैं. उन पर ध्यान देने का यह अच्छा समय है. मॉल में रौनक कैसे लौटेगी? अर्जुन शर्मा का कहना है कि शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया का मानना है कि शॉपिंग सेंटर सोशल डिस्टेंसिंग का अच्छे से पालन कर सकते हैं, जो कि खुले बाजारों में नहीं किया जा सकता है. यदि किसी व्यवस्थित जगह को खोलना है और आपके पास एक उचित एयर फिल्टरेशन है, तो वायरस का प्रभाव रुक सकता है. हम लोगों को बिना मास्क के घूमने नहीं देंगे और जगह को अच्छी तरह से साफ करेंगे. अर्जुन शर्मा ने कहा कि जब सरकार अनुमति देती, देगी हम 30 प्रतिशत की क्षमता के लिए फिर से काम शुरू करेंगे.
नौकरियों का क्या होगा? एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 50 प्रतिशत नौकरियां ख़तरे में हैं. इससे कैसे निपटा जाए? इस सवाल के जवाब में वेणु श्रीनिवासन ने कहा कि टियर -1 टियर -2 में हजारों लोगों की नौकरियां जाएंगी. लगभग 10 करोड़ लोग नौकरी खो रहे हैं. उनकी आजीविका को बचाने की जरूरत है. वहीं नौकरियों के सवाल पर पुनीत छतवाल ने कहा कि हमारे लिए यह एक तरह से मौका भी है. हमें तीन महीने की मोराटोरियम मिला है. हो सकता है 12 महीने का मिल जाए. बिजली और अन्य उपयोगिताओं पर राज्य सरकारों द्वारा छूट दी जा सकती है. लगभग 12 प्रतिशत रोजगार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हॉस्पिटैलिटी से जुड़ा है. सरकार का साथ चाहिए CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि इस समय नौकरियां एक बहुत बड़ा मुद्दा है. दुनियाभर में सरकारें नौकरियों को सपोर्ट कर रही हैं. अगर सरकार सपोर्ट करती है, तो बड़ी कंपनियां भुगतान कर सकेंगी. अतिरिक्त कार्यशील पूंजी प्रदान की जानी चाहिए. RBI की बैकस्टॉप सुविधा, तीन महीने का वेतन बिल और सरकार का समर्थन महत्वपूर्ण है. चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि हमें कुछ समय के लिए जीएसटी को खत्म करना होगा. कोई उत्पादन नहीं हो रहा है. हम उत्पादन और मांग को देख सकते हैं. सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. उपलब्ध श्रमिकों की कमी भी इस समय बड़ा मुद्दा है.
अर्जुन शर्मा का कहना है कि सरकार मॉल सेक्टर की दिक्कतों से वाकिफ है.बांग्लादेश में सरकार ने बेलआउट पैकेज के साथ ही कम इंट्रेस्ट रेट पर लोन की सुविधा भी दी है. अगर बांग्लादेश कर सकता है, तो हम क्यों नहीं. केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा. बड़ी कंपनियों के साथ दिक्कत नहीं है. समस्या MSME सेक्टर के साथ है. आरबीआई इससे वाकिफ है. अर्थात: इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान होगा, सरकार और RBI ने नहीं बताया!











