हैदराबाद में नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक गैंग का भंडाफोड़ हुआ है (Child Trafficking Racket Hyderabad). आरोप है कि गैंग के लोग निसंतान कपल्स को बच्चा बेचते थे. खरीदने वाले लोग वॉट्सएप पर फोटो देखकर बच्चे चुनते थे. कीमत डेढ़ से पांच लाख रुपये तक. 28 मई को गैंग के पास से 16 बच्चों को रेसक्यू किया गया.
नवजात बच्चों की तस्करी! फोटो देखकर 'खरीदने' वाले आरोपी बोले- अपने बच्चे की तरह पाला
रेस्क्यू किए गए 16 बच्चों में से नौ को Hyderabad और पड़ोसी इलाकों में ‘बेचा’ गया. सात को Andhra Pradesh में ‘बेचा’ गया. मामले के तार Delhi-Pune से जुड़े हुए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए 16 बच्चों में से नौ को हैदराबाद और पड़ोसी इलाकों में ‘बेचा’ गया जबकि सात को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, श्रीकाकुलम और गुंटूर में ‘बेचा’ गया था.
गैंग मेंबर्स के अलावा बच्चा खरीदने वाले 15 कपल्स के खिलाफ बाल तस्करी और किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. इन लोगों ने कथित तौर पर पिछले दो से छह महीनों में बच्चे खरीदे थे. रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे फिलहाल राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग के पास हैं.
मामले में अब तक तीन लोगों को अरेस्ट किया गया है. शोबा रानी, एम स्वप्ना और शेख सलीम. ये तीनों कथित तौर पर बच्चों को बेचने का सौदा करने की कोशिश कर रहे थे.
बच्चे वापस देने की गुहार!खबर है कि 29 मई को राचाकोंडा पुलिस आयुक्त के कार्यालय के बाहर आरोपी कपल्स इकट्ठा हुए और बच्चों को सौंपने की मांग की. मेडिपल्ली पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर गोविंद रेड्डी ने बताया कि कपल्स का बच्चों के साथ बॉन्ड बन गया था लेकिन उन्होंने जो किया वो अवैध है.
मणिकोंडा की एक महिला ने बताया कि वो बच्ची का खूब ध्यान रखती थी और उससे बहुत प्यार करती है. पूछा कि अब बच्चे की देखभाल कौन करेगा? महिला पर तीन महीने की बच्ची खरीदने का आरोप है. महिला ने बताया कि शादी के कई साल बाद भी उनका कोई बच्चा नहीं है और वो बच्ची उनके जीवन में बहुत सारी खुशियां लेकर आई है.
दूसरी महिला ने कहा,
मुझे नहीं पता कि क्या करना है. मेरा जीवन खत्म हो गया. मेरा बच्चा मुझसे छीन लिया गया. अगर ये गैरकानूनी है तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं एक मां की तरह उसकी देखभाल कर रही थी. जैसे वो मेरा अपना बच्चा हो. अब उसे ले जाने का क्या मतलब है?
एक महिला ने तीन दिन की बच्ची को ‘खरीदा’ था. कई लोगों ने बच्चों को ले जा रही गाड़ियों के सामने खड़े होकर कांस्टेबलों से उन्हें वापस सौंपने की गुहार लगाई.
जांच में क्या पता चला?अधिकारियों ने बताया कि कपल्स ने वॉट्सऐप पर एजेंटों और बिचौलियों द्वारा शेयर की गई फोटो देखकर बच्चों को चुना था. एक अधिकारी ने बताया,
इन लोगों को लगता है कि वो बच्चों की देखभाल करके उन्हें एक नया जीवन दे रहे हैं.
पुलिस ने बताया कि एक केस में बच्चे को नई दिल्ली या पुणे से ट्रेन या निजी गाड़ी में लाया गया और कपल को सौंपा गया. एक इंस्पेक्टर ने कहा कि ये काम हमेशा रात में किया जाता था. रचाकोंडा पुलिस बच्चों के असली माता-पिता को ढूंढने की कोशिश में जुटी हुई ही. एक टीम दिल्ली रवाना हो गई है. एक अधिकारी ने बताया कि अगर पुलिस असली माता-पिता ट्रैक नहीं कर पाई तो बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए रखा जाएगा.
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