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मध्य प्रदेश में निर्दलीय जीतने वाले विधायक कौन, जिनके हाथ में है सत्ता की चाबी

एमपी में ये अन्य इतने अहम क्यों हो गए हैं.

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फोटो - thelallantop
एमपी अजब है. ये 11 दिसंबर को उस वक्त फिर देखने को मिला, जब देर रात तक एमपी के चुनावी नतीजे देश भर की धुकधुकी तेज किए रहे. मध्य प्रदेश में सत्ता का ऊंट आखिर किस करवट बैठेगा, इसका फैसला देर रात तक नहीं हो पाया. बहुमत के लिए ज़रूरी 116 सीटों का जादुई आंकड़ा छूने में कांग्रेस के पसीने छूटते रहे. एमपी में अब सरकार गठन का सारा दारोमदार कुछ निर्दलीय विधायकों और सपा-बसपा जैसे दलों पर आकर टिक गया लगता है. सत्ता की दौड़ में वैसे तो कांग्रेस, बीजेपी से आगे नजर आ रही है, लेकिन राजनीति भी क्रिकेट की तरह संभावनाओं को खेल है. खासकर बीजेपी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अध्यक्ष अमित शाह के दौर में. अगर कुछ उलटा-पुलटा नहीं हुआ, तो सत्ता में कांग्रेस काबिज हो सकती है. कांग्रेस के लिए सरकार बनाना इसलिए भी आसान नजर आ रहा है कि निर्दलीय जीतने वाले ज्यादातर विधायकों में उसके ही बागी हैं. इनको पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो इन्होंने आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर्चा भर दिया था और जीतकर आ गए हैं. आइए जाने  हैं ये कौन लौग हैं, जो निर्दलीय या फिर सपा-बसपा जैसी पार्टियों से जीतकर आए हैं.
1- कैंडिटेट- केदार चिदाभाई डावर
पार्टी- निर्दलीय
सीट - भगवानपुरा, जिला खरगोन
किसको हराया - जमना सिंह सोलंकी, भाजपा
कितने वोट से - 9,716 वोट से जीते
क्या ख़ास है? - ये पूर्व कांग्रेसी हैं. साल 2003 में धूलकोट से विधायक चुने गए थे. इस बार टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़े. और भाजपा उम्मीदवार जमना सोलंकी को हराया.
 
2- कैंडिटेट- ठाकुर सुरेंद्र सिंह नवल सिंह, 'शेरा भैया'
सुरेंद्र सिंह नवल 'शेरा भैया'.
सुरेंद्र सिंह नवल 'शेरा भैया'.

पार्टी- निर्दलीय
सीट - बुरहानपुर, जिला बुरहानपुर
किसको हराया - अर्चना चिटनिस, मंत्री प्रदेश सरकार, भाजपा
कितने वोट से -5,120 वोट से जीते
क्या ख़ास है? -ये कांग्रेस के बागी हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया से अदावत के चलते टिकट नहीं मिल पाया. निर्दलीय मैदान में कूदे और प्रदेश सरकार की दिग्गज मंत्री अर्चना चिटनिस का किला ध्वस्त कर दिया.
 
3- कैंडिटेट- विक्रम सिंह, 'राणा गुड्डू भैया'
 विक्रम सिंह. 'राणा गुड्डू भाई'.
विक्रम सिंह. 'राणा गुड्डू भाई'.

पार्टी- निर्दलीय
सीट - सुसनेर, जिला खरगोन
किसको हराया - महेंद्र भैरो सिंह बापू, कांग्रेस
कितने वोट से- 27,062 वोट से जीते
क्या ख़ास है? - कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया, तो निर्दलीय मैदान में आ गए. कांग्रेस के ही महेंद्र भैरो सिंह बापू को तगड़े मार्जिन से पटखनी दी.
 
4- कैंडिटेट- प्रदीप अमृतलाल जायसवाल 'गुड्डा'
पार्टी- निर्दलीय
सीट - वारासिवनी, बालाघाट
किसको हराया - डॉक्टर योगेंद्र निर्मल, भाजपा
कितने वोट से- 2,631 वोट से जीते
क्या ख़ास है? -कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं. साल 2008 में कांग्रेस के विधायक चुने गए थे. 2013 का चुनाव हार गए थे. इस बार भाजपा को पटखनी दी.
 
5- कैंडिटेट- राजेश कुमार ' बब्लू भैया'
राजेश कुमार चुनाव प्रचार के दौरान.
राजेश कुमार चुनाव प्रचार के दौरान.

पार्टी- समाजवादी पार्टी
सीट - बिजावर, छतरपुर
किसको हराया - पुष्पेंद्र नाथ पाठक 'गुड्डन भैया', भाजपा
कितने वोट से- 36,714 वोट से जीते
क्या ख़ास है? - साल 2013 का चुनाव कांग्रेस से लड़े थे.  पुष्पेंद्र नाथ पाठक से करीब 10 हज़ार वोटों से चुनाव हार गए थे. इस बार कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया, तो सपा से लड़ गए.
 
6- कैंडिटेट- संजीव सिंह संजू
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पार्टी- बहुजन समाज पार्टी
सीट - भिंड, जिला भिंड
किसको हराया - चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, भाजपा
कितने वोट से- 11,991 वोट से जीते
क्या ख़ास है? -संजीव सिंह संजू बीता चुनाव भी बसपा से लड़े थे. भिंड के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं. बसपा से पहले भाजपा में थे. चौधरी राकेश सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे. साल 2013 चुनाव से पहले भाजपा में चले गए और जीते. तब संजू दूसरे नंबर पर रहे थे.
 
7-कैंडीडेटः रामबाई गोविंद सिंह
जीत के बाद समर्थकों के साथ रामबाई.
जीत के बाद समर्थकों के साथ रामबाई.

पार्टी-बहुजन समाज पार्टी
सीट-पथरिया, दमोह
किसको हराया- लखन पटेल, भाजपा
कितने वोट से- 2205 वोट से जीते
क्या खास है? इस सीट पर बसपा ने पूरा जोर लगाया था. पार्टी प्रमुख मायावती ने रामबाई के समर्थन में एक जनसभा भी की थी. इसमें जबरदस्त भीड़ उमड़ी थी. तभी से रामबाई का पलड़ा भारी नजर आने लगा था.
 
 


 
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