The Lallantop

टैरिफ से लेकर ट्रेड डील तक, अब भारत के आगे नरम पड़ेंगे 'अकड़ू ट्रंप'?

अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के दोनों सदनों का नियंत्रण गंवाने के बाद डॉनल्ड ट्रंप के लिए टैरिफ बढ़ाना मुश्किल हो सकता है.

Advertisement
post-main-image
डॉनल्ड ट्रंप की हार के बाद उनके तेवर बदलेंगे. (फोटो- India today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने टैरिफ बढ़ाने की क्षमता घट गई है, जिससे उनके टैरिफ आदेशों में बदलाव की संभावना प्रबल हुई है।
  • ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान विदेशों के खिलाफ टैरिफ को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले और चुनाव परिणामों ने उनकी रणनीति पर प्रभाव डाला है।
  • ट्रम्प की हार के बाद भारत को अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों में बेहतर शर्तें हासिल करने का मौका मिला है, जिससे नई दिल्ली पर दबाव कम होने और ट्रेड डील की प्रक्रिया धीमी होने की संभावना है।

अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन में मिली हार के बाद क्या डॉनल्ड ट्रंप के तेवर नरम होने के आसार हैं? उनकी टैरिफ धमकियों के पंजे ढीले पड़ेंगे? और क्या नई दिल्ली को अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक बातचीत में अपनी शर्तें बेहतर तरीके से रखने का मौका मिल सकता है?

Advertisement

अंग्रेजी अखबार टीओआई के मुताबिक, एक रिसर्च की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का कंट्रोल खत्म होने के बाद ट्रंप के लिए मनमाने तरीके से टैरिफ बढ़ाना मुश्किल हो सकता है. इससे भारत समेत दुनिया के दूसरे अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर ट्रंप दबाव नहीं बना पाएंगे.

अपने दूसरे टर्म में तमाम देशों पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप ने टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था. भारत पर भी ट्रंप ने पहले 26 फीसदी और बाद में रूस तेल खरीदने की पेनाल्टी जोड़ते हुए कुल 50 फीसदी तक का टैरिफ लगाया था. बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के Reciprocal टैरिफ सिस्टम को खारिज कर दिया, जिसके बाद से 10 पर्सेंट सेक्शन 301 टैरिफ भारतीय एक्सपोर्ट पर लागू होता है, जिसमें कुछ सामान शामिल नहीं हैं.  

Advertisement
टैरिफ व्यवस्था पर असर

रिपोर्ट में कहा गया कि मिड टर्म चुनाव के नतीजों के बाद अमेरिका में टैरिफ की जो मौजूदा व्यवस्था है, उसमें शायद ज्यादा बदलाव न हो. लेकिन अब ट्रंप की रणनीति बदल सकती है. टैरिफ बढ़ाने के विकल्प उनके पास कम होंगे. जनता को आर्थिक राहत देने का दबाव उन पर बढ़ेगा और इस वजह से 2028 से पहले ट्रेड डील की कोशिश तेज हो सकती है.

रिपोर्ट कहती है कि ट्रंप की हार से ट्रेड डील में भारत की स्थिति मजबूत हुई है. भारत के लिए अमेरिका से व्यापार समझौता पूरा करने की कोई जल्दबाजी नहीं होगी और नई दिल्ली पर वॉशिंगटन की शर्तें स्वीकार करने का प्रेशर भी पहले के मुकाबले काफी कम होगा. 

ये भी पढ़ेंः US मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की करारी हार से कितना बदलेगा भारत के शेयर बाजार का ट्रेंड?

Advertisement

लेकिन चुनावों में ट्रंप की हार से ऐसा भी नहीं है कि अमेरिका की व्यापार नीति अचानक से बदल जाएगी. ट्रंप कारोबार के मामले में अब भी कई फैसले अकेले ले सकते हैं और इसके लिए उन्हें सांसदों की जरूरत नहीं होगी. लेकिन घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई और बढ़ते लिविंग कॉस्ट को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा तो वह अपनी आर्थिक नीतियों पर दोबारा सोचने को मजबूर हो सकते हैं. इसी वजह से भारत को उम्मीद है कि अमेरिका टैरिफ के मामले में ज्यादा प्रैक्टिकल और सहयोगी रुख अपनाएगा.

वीडियो: राहुल गांधी की रैली में नहीं पहुंचे 60 नेता, MP कांग्रेस ने सस्पेंड कर दिया

Advertisement