सऊदी अरब ने तेल की बेहद अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को फिलहाल बंद कर दिया है. वजह बनी है ड्रोन की बमबारी. रियाद और मदीना इलाके में 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन को कई ड्रोन अटैक में निशाना बनाया गया. इसके बाद सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एहतियातन पाइपलाइन का कामकाज रोक दिया. सऊदी अरब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है. ऐसे में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के सहारे ही सऊदी, होर्मुज से गुजरे बिना तेल सप्लाई करता है. सऊदी को ये कदम तब उठाना पड़ा, जब ईरान समर्थित हूती ग्रुप ने रेड सी के किनारे यमन में मुखा और पेरिम आइलैंड जैसे अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया.
होर्मुज से बचकर जिस पाइपलाइन से तेल बेच रहा था सऊदी अरब, हमलों से तंग आकर बंद करनी पड़ी
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन इराक से लॉन्च किए गए थे. इसके बावजूद रियाद ने फिलहाल जवाबी हमले नहीं करने का फैसला किया है. ये फैसला तब हुआ, जब हूती लाल सागर से लगते यमन के इलाकों पर कब्जा बढ़ा रहा है.

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब को अपना तेल पश्चिमी तट तक पहुंचाने में मदद करती है. होर्मुज बंद है, तो सऊदी इसी पाइपलाइन से रेड सी यानी लाल सागर के जरिए दुनिया भर में अपना तेल सप्लाई करने की कोशिश करता है. सऊदी की एनर्जी मिनिस्ट्री ने शुक्रवार, 11 सितंबर की देर रात X पर एक पोस्ट किया. इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद करने की जानकारी दी गई.
सऊदी अरब ने क्या कहा?सऊदी अरब क ऊर्जा मंत्रालय ने X पर लिखा,
“ऊर्जा मंत्रालय के एक आधिकारिक सोर्स ने बताया कि गुरुवार, 10 सितंबर 2026 की सुबह रियाद और मदीना इलाकों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर कई हमले हुए. एहतियात के तौर पर पाइपलाइन को बंद कर दिया गया. इन हमलों में कई लोग घायल हुए और प्रभावित लोगों को मेडिकल मदद दी गई.”
बयान में आधिकारिक सूत्र के हवाले से आगे बताया गया कि हमलों के तुरंत बाद इमरजेंसी और स्पेशल टेक्निकल टीमों ने मौके पर पहुंचकर काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने पाइपलाइन की सुरक्षा जांची और यह पता लगाया कि कहीं इसे और नुकसान तो नहीं पहुंचा है.

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि पाइपलाइन को सिर्फ एहतियाती तौर पर बंद किया गया है. हालात की समीक्षा की जा रही है और आगे की स्थिति के बारे में जरूरत के मुताबिक जानकारी दी जाएगी.
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल कारोबार की अहम नस है. देश के पूर्वी हिस्से में तेल का बड़ा पैमाने पर प्रोडक्शन होता है. ये पाइपलाइन उस तेल को पश्चिमी तट तक ले जाने में मदद करती है. वहां से लाल सागर के रास्ते तेल का एक्सपोर्ट किया जा सकता है. माने, सऊदी अरब के लिए फारस की खाड़ी से निकलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मजबूरी कुछ हद तक कम हो जाती है.
इराक से हुआ पाइपलाइन पर हमलालेकिन अब इसी वैकल्पिक रास्ते पर ड्रोन हमलों ने संकट खड़ा कर दिया है. सऊदी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि पाइपलाइन पर ड्रोन इराक से लॉन्च किए गए थे. इसके बावजूद रियाद ने फिलहाल जवाबी हमले नहीं करने का फैसला किया है. मंत्रालय ने बताया कि इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की गुजारिश पर सऊदी अरब ने अभी जवाबी कार्रवाई रोक दी है.
सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा,
"हम इराक की भाईचारे वाली सरकार को मौका देंगे कि वह सऊदी अरब और पड़ोसी देशों पर इराकी क्षेत्र से होने वाले हमलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए."

सऊदी अरब ने चेतावनी दी कि अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, ठिकानों और नागरिकों की रक्षा के लिए वो हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है.
इराक ने राहत की सांस लीइराक ने सऊदी के इस संयम का वेलकम किया. प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने हमले के पीछे मौजूद मिलिशिया और उसके मददगारों की तुरंत जांच के आदेश दिए. बगदाद ने कहा कि उसकी जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा.

इराकी प्रधानमंत्री ने मयसान ऑपरेशंस कमांड को लेकर एक इन्वेस्टिगेटिव कमिटी बनाने का निर्देश दिया. इसके अलावा, उन्होंने ऑपरेशंस कमांडर को पद से हटाने का भी आदेश दिया.
हूती के बढ़ते कदमउधर, ईरान समर्थित हूती पहले ही सऊदी अरब के अबहा, खमीस मुशैत, जजान और नजरान में नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना चुके हैं. हमलों से दक्षिणी इलाके की कुछ तेल फैसिलिटी में आग लगी और कई काम अस्थायी तौर पर रोकने पड़े.
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जो पाइपलाइन सऊदी अरब के होर्मुज के जोखिम से बचने का रास्ता थी, अब वही ड्रोन हमलों की जद में आ गई है. इसने सऊदी की तेल के सहारे चलने वाली इकोनॉमी के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है. वैसे भी होर्मुज बंद होने की वजह से सऊदी का तेल एक्सपोर्ट घटा है. अब ये पाइपलाइन बंद होने से तेल की सप्लाई में और गिरावट आ सकती है.
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