गोवर्धन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव प्रचार शुरू किया. जहां खेतों में काम कर रही महिलाओं से संपर्क किया. आपके लिए चुनाव प्रचार की कुछ तस्वीरें.
हेडलाइन पढ़कर आए हो तो पता चल गया होगा कि हम एक गलती बताने आपको यहां लेकर आए हैं. लेकिन खबर लिखते समय हमको एक नहीं दो गलतियां दिख गईं.
पहली गलती
नकलीपने और अज्ञानता की मात्रा इन तस्वीरों में बहुत ज्यादा है. हेमा मालिनी के साथ खड़ी बाकी औरतों को देखो. सबके सिर ढके हुए हैं. हेमा मालिनी का सिर खुला हुआ है. बाल उलझे जा रहे हैं. नहीं नहीं सिर पर पल्लू डालने वाली या घूंघट वाली भकुवापनी बतियाने नहीं जा रहे हम. दरअसल गेहूं हो या धान, इनकी कटाई के समय महिलाएं पूरा सिर ढककर रखती हैं. कई बार पूरा चेहरा भी. क्योंकि इनकी बालियों में जो रेशे होते हैं उनमें महीन कांटे होते हैं. वो बालों में फंस जाते हैं. होशियार आदमी लोग भी सिर ढककर रखते हैं. लंबे बालों में अगर दो चार बालियों के रेशे चले गए तो उनको निकालना लंबा काम है. जो उस टाइम पर बिजली की तेजी से काम कर रही महिलाएं अफोर्ड नहीं कर सकतीं. हेमा मालिनी ने ये सब नहीं किया. या तो उन्हें किसी ने बताया नहीं, या तो उन्होंने खेत काटा नहीं, या उन्होंने फोटो खराब होने के डर से सिर नहीं ढंका.

गलत तरीका बनाम सही तरीका
दूसरी गलती
महिलाएं सज धजकर खेत काटने नहीं जातीं. गले में चेन, कानों में बड़ी बालियां या कोई भी गहने जो फंसकर, खिंचकर गिरने का डर हो, वो नहीं पहनकर जातीं. हां फोटो खिंचाने जाया जा सकता है लेकिन असलियत की फील लाने के लिए करेक्टर में आना जरूरी होता है. ये हेमा मालिनी से बेहतर कौन जान सकता है. इतने सालों तक उन्होंने फिल्मों के जरिए दिलों पर राज किया है.
तीसरी बात कि ये कोई गलती नहीं है बल्कि जनता के लिए अपॉर्चुनिटी है. भैया हम तो साफ स्वच्छ शुद्ध निर्मल बात कहिते हैं. फसल पक गई है. उसके सौ टंटे होते हैं. खेत काटो. थ्रेशर तक लाओ. गेहूं अलग, भूसा अलग करो. फिर उसको ढोकर घर पहुंचाओ. मेरी जान निकलती थी भूसा रखवाने में. एक कोठरी में कई क्विंटल भूसा रखना होता था और उससे उड़ती धूल सांस रोक देती थी. तो भैया बहुत जानलेवा काम है ये. अगर इसमें हाथ बटाने वाला कोई मिल जाए तो क्या ही कहना. ये लोग आ रहे हैं चुनाव प्रचार के लिए. सब कुछ हम ही बताएं क्या अब?













