फोटो- रूद्र राजेश सिंह के फेसबुक से ली गई है.9 नवंबर को जारी किए गए लेटर में आगे लिखा है कि स्टाफ व जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि नगर निगम हिसार स्थित सभी अधिकारीगण, चाहें वह महिला हो या पुरुष, अपने व्यक्तिगत शौचालय का इस्तेमाल नहीं करेंगे बल्कि सार्वजनिक शौचालय का ही इस्तेमाल करेंगे. इस निर्णय को लागू करने के लिए यह निर्देश दिए जाते हैं कि सभी अधिकारीगण अपने व्यक्तिगत शौचालयों को ताला लगाकर चाबी अद्योहस्ताक्षरी को सौंप दें. केवल इमरजेंसी की स्थिति में ही व्यक्तिगत शौचालय का इस्तेमाल चाबी लेने के बाद करेंगे.
IAS अधिकारी अशोक गर्ग ने इसी दिन अपने फेसबुक पर पोस्ट भी लिखा. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा,
सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों द्वारा अपने कमरों में पर्सनल टॉयलेट बनवाना और उनका प्रयोग करना उनकी जनता और स्टाफ के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है. साथ ही यह भी दर्शाता है कि उन्हें अपने ही कार्यालय में सार्वजनिक शौचालयों की उनके कर्मचारियों द्वारा की जा रही सफाई पर विश्वास नहीं है. यदि अधिकारी पर्सनल टॉयलेट को ताला लगा कर पब्लिक टॉयलेट प्रयोग करना शुरू कर दें तो दफ्तरों के पब्लिक टॉयलेट तुरंत साफ सुथरे चमचमाते नजर आने लगेंगे.अक्सर यह देखने को मिलता है कि सार्वजनिक शौचायल आमतौर पर इतने गंदे होते हैं कि उनका कोई इस्तेमाल नहीं करता. लेकिन इस तरह की व्यवस्था अगर हर जगह लागू हो शायद हालात बदले और जनता को साफ सुथरे शौचालय इस्तेमाल करने को मिले.














