The Lallantop

2018 के हापुड़ लिंचिंग केस में 10 को उम्रकैद की सजा, गोकशी के शक में कासिम की हुई थी हत्या

हापुड़ के पिलखुवा थानाक्षेत्र में आने वाले बझैड़ा कला गांव में गोकशी की खबर फैल गई थी. सूचना मिलते ही गांव में कुछ लोगों ने 60 साल के मोहम्मद कासिम और 45 साल के समीउद्दीन की जमकर पिटाई कर दी थी. समीउद्दीन गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि कासिम की मौत हो गई थी.

Advertisement
post-main-image
हापुड़ में 6 साल पहले हुए मॉब लिंचिंग के मामले में कोर्ट ने 10 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. (तस्वीर:PTI)

यूपी के हापुड़ में लगभग 6 साल पहले हुई एक मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) से जुड़े मामले में 10 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. गोकशी के शक़ की वजह से हापुड़ के बझैड़ा कला गांव में जून 2018 में भीड़ ने दो लोगों पर हमला कर दिया था. उनमें से एक मोहम्मद कासिम की मौत हो गई थी. हापुड़ अपर जिला न्यायालय ने अपने फैसले में दस आरोपियों के खिलाफ आजीवन कारावास की सजा सुनाने के अलावा उन्हें 58-58 हज़ार रुपये का जुर्माना भरने को कहा है.

Advertisement
मामला क्या है?

हापुड़ के पिलखुवा थानाक्षेत्र में आने वाले बझैड़ा कला गांव में गोकशी की खबर फैल गई थी. सूचना मिलते ही गांव में कुछ लोगों ने 60 साल के मोहम्मद कासिम और 45 साल के समीउद्दीन की जमकर पिटाई कर दी थी. समीउद्दीन गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि कासिम की मौत हो गई थी. ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने कासिम पर पेचकस और दरांती से हमला किया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उनकी पीठ पर कई चोटें थीं, पसलियां टूटी हुई थीं और कंधे, घुटने, पेट और सिर पर चोट के निशान थे. रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के बाद गांव में दोनों समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था.

सोशल मीडिया पर उस वक्त अपराधियों द्वारा कासिम को घसीट कर ले जाने की एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसके बाद तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था. ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर में पहले बताया था कि यह घटना रोड रेज़ के कारण हुई थी. पुलिस ने इसे मॉब लिंचिंग का मामला नहीं माना था.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट को जारी करने पड़े निर्देश

पुलिस की इस रिपोर्ट का पीड़ित पक्ष ने विरोध करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में डीआईजी मेरठ को मामले की निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए, जिसके बाद पुलिस ने 4 नवंबर 2018 को 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जारी होने के बाद ही पुलिस ने गवाहों के बयान दर्ज किए थे. 

‘मौत की सज़ा नहीं चाहते’

कोर्ट ने 10 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 153ए (धर्म के आधार पर अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत दोषी ठहराया. ‘द हिंदू’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, समीउद्दीन के छोटे भाई मोहम्मद यासीन ने कहा कि दोनों पीड़ितों के रिश्तेदारों ने अदालत में कहा था कि वे आरोपियों की मौत की सजा नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा कि वे केवल न्याय चाहते हैं और किसी के खिलाफ कोई दुश्मनी नहीं रखते हैं.

वीडियो: 2 साल बाद सलमान खान ने अनाउंस की अपनी करियर की सबसे बड़ी फिल्म

Advertisement

Advertisement