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ज्ञानवापी विवाद: याचिकाओं का दौर खत्म नहीं, अब मस्जिद की एक खास दीवार तोड़ने की मांग

एक याचिकाकर्ता ने एडवोकेट कमिश्नर के रूप में अजय कुमार मिश्रा को वापस लेने के लिए कोर्ट से अपील की है. याचिका में कहा गया है कि उनके सपोर्ट के बिना रिपोर्ट अधूरी होगी.

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ज्ञानवापी मस्जिद और वकील विष्णु जैन (फाइल फोटो)

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पूरा होने के बाद भी याचिकाओं का दौर खत्म नहीं हुआ है. अब लोकल कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर मस्जिद के भीतर वजूखाने के नीचे की दीवार तोड़ने की मांग की गई है. इस मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कोर्ट में यह आवेदन दिया है. इसमें उन्होंने दीवार तोड़े जाने के साथ वहां जाने की इजाजत भी मांगी है. इसके अलावा यूपी सरकार ने भी एक आवेदन दिया है. इसमें मस्जिद के भीतर तालाब की मछलियों के संरक्षण की मांग की गई है.

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वजूखाना वो जगह होती है जहां मुसलमान नमाज से पहले अपने हाथ-पैर धोते हैं. मस्जिद के सर्वे के दौरान इसी जगह पर एक आकृति मिली थी, जिसे हिंदू पक्ष के लोगों ने 'शिवलिंग' बता दिया. लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि वह फव्वारा है. हालांकि अभी तक सर्वे की रिपोर्ट लोकल कोर्ट में पेश नहीं की गई है.

अजय मिश्रा को वापस लेने की मांग

वहीं एक याचिकाकर्ता ने एडवोकेट कमिश्नर के रूप में अजय कुमार मिश्रा को वापस लेने के लिए कोर्ट से अपील की है. याचिका में कहा गया है कि उनके सपोर्ट के बिना रिपोर्ट अधूरी होगी. सर्वे रिपोर्ट सौंपने से पहले जानकारी लीक होने के कारण कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा को हटा दिया था. वकील विष्णु जैन ने एएनआई से कहा कि अजय मिश्रा को इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने प्राइवेट कैमरामैन हायर किया था और सर्वे की सारी बातें लीक की थीं.

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इसके अलावा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को आपत्ति याचिका दाखिल करने के लिए एक दिन का समय दिया है. मुस्लिम पक्ष ने इसके लिए दो दिन की मांग की थी. इन सभी आवेदनों पर अब 19 मई को सुनवाई होगी. क्योंकि वाराणसी में वकीलों की हड़ताल है. ये हड़ताल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वकीलों को जारी एक नोटिस के खिलाफ हो रही है.

वजूखाने की जगह सील

इस बीच वाराणसी प्रशासन ने वजूखाने की जगह को सुरक्षित करने के लिए सील कर दिया है. उस जगह पर सीआरपीएफ जवानों को भी सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है. हिंदू पक्ष की तरफ से 'शिवलिंग' का दावा किए जाने के बाद लोकल कोर्ट ने ये आदेश दिया था. मंगलवार, 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी उस जगह को सुरक्षित रखने को कहा था.

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सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा था कि 16 मई का आदेश एकतरफा था. उन्होंने कहा था,

"ये आदेश याचिकाकर्ता के मौखिक रूप से कहने पर दे दिया गया. अगर ये कोर्ट कहता है कि शिवलिंग को सुरक्षित रखा जाए तो इसका एक अलग अर्थ निकलता है. कोर्ट कमीशन ने नहीं कहा है कि वहां शिवलिंग है."

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिमों को नमाज अदा करने से नहीं रोका जाएगा. कोर्ट ने वजू करने की भी इजाजत दी और कहा कि ये धार्मिक रीतिरिवाज का हिस्सा है. हालांकि कोर्ट ने निचली अदालत में चली रही सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार किया था. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा था कि वो निचली अदालत को याचिका के निपटारे का निर्देश देगा.

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