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क्या खट्टर की रैली का विरोध करने वाले इस किसान नेता को किसानों ने कमिटी से बाहर कर दिया?

गुरनाम सिंह चढ़ूनी पर किस बात की जांच होगी?

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किसानों की सरकार से 19 जनवरी को बातचीत होनी है, इससे पहले ही गुरनाम सिंह चढ़ूनी को किसान संयुक्त मोर्चा से बाहर करने की खबर आई है.
गुरनाम सिंह चढ़ूनी. भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख. किसान आंदोलन के दौरान गुरनाम सिंह कहते थे कि किसान नेताओं को राजनीतिक पार्टियों से दूर रहना चाहिए. कहते थे कि राजनीतिक पार्टियों को भी आंदोलन से दूर रहना चाहिए. अब उन पर ख़ुद आरोप लगे हैं कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं से मुलाक़ात की. इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने उन पर जांच बिठा दी है. ख़बरें चलीं कि चढूनी को निष्कासित कर दिया गया है, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा ने निष्कासन की ख़बर का खंडन किया. राजनीतिक पार्टियों से मुलाकात के अलावा चढ़ूनी पर खुद अपनी तरफ़ से आंदोलन संबंधित कार्यक्रम आयोजित करने का भी आरोप लगा है. ख़बरों के मुताबिक़, गुरनाम सिंह 22 और 23 तारीख को किसान संसद का आयोजन करने की तैयारी में थे. इसमें कृषि कानूनों का विरोध करने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों के कई विधायकों, सांसदों और पूर्व जनप्रतिनिधियों को बुलाया गया है. आरोप है कि इस किसान संसद के लिए भी संयुक्त किसान मोर्चा से इजाजत नहीं ली गई थी. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब के दर्जनों समेत अन्य हिस्सों से शामिल किसान संगठनों का एक समूह है. इसी बैनर के तले किसानों का आंदोलन चल रहा है. ख़बरों में ये भी दावा किया जा रहा है कि 17 जनवरी को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में गुरनाम सिंह की तरफ से एक बैठक बुलाई गई थी. इसमें भी कृषि कानूनों का विरोध करने वाले मौजूदा और पूर्व विपक्षी विधायकों, सांसदों को बुलाया गया था. आरोप है कि ये कार्यक्रम भी संयुक्त किसान मोर्चा की इजाजत के बिना किया गया था. इस मामले में संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि मोर्चा चढूनी द्वारा बुलाई "समस्त राजनैतिक दलों की बैठक" और राजनीतिक गतिविधियों से कोई  संबंध नहीं रखता है. भाकियू (चढ़ूनी ) के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी के खिलाफ इन आरोपों की जांच के लिए 4 सदस्यीय समिति बनाई गई है. समिति के सामने चढ़ूनी को अपना पक्ष रखना होगा. जांच पूरी होने तक संयुक्त किसान मोर्चा की आंतरिक बैठकों से चढ़ूनी बाहर भी रहेंगे. समिति को 3 दिनों में अपनी जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट देनी होगी. हाल में जब करनाल के कैमला गांव में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यक्रम में किसान नेताओं ने विरोध किया था, उस समय भी गुरनाम सिंह का नाम ख़बरों में आया था. गुरनाम ने बयान जारी करके कहा था कि कैमला गांव में जो घटना हुई थी, वो हमने करवाई है. उन्होंने ये भी कहा था कि आगे जहां भी मुख्यमंत्री खट्टर ऐसी रैली करेंगे, वहां उनका विरोध करेंगे. उनका आरोप था कि भाजपा किसान आंदोलन के समानांतर रैली करके आंदोलन को तोड़ना चाहती है.

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