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मुस्लिमों को सरेआम कोड़े मारे थे, गुजरात हाई कोर्ट ने पुलिस वालों पर क्या एक्शन लिया?

गुजरात हाई कोर्ट ने 4 पुलिसकर्मियों के खिलाफ 2022 में खेड़ा जिले में कुछ मुस्लिम व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से पीटने के लिए 'अदालत की अवमानना' करने के तहत आरोप तय किए हैं. पीड़ित मालेक परिवार ने चारों पुलिसवालों के खिलाफ याचिका दायर की थी.

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गुजरात के खेड़ा जिले में पुलिसकर्मियों ने 2022 में मालेक परिवार के पांच लोगों को सरेआम पीटा था. (फोटो क्रेडिट - X)

गुजरात हाई कोर्ट (Gujarat High Court) ने 4 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) करने के तहत आरोप तय किए हैं. उन पर पिछले साल 2022 में खेड़ा जिले में कुछ मुस्लिम व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से पीटने का आरोप है. जस्टिस ए. एस. सुपेहिया और जस्टिस एम. आर. मेंगडे की पीठ ने 4 अक्टूबर को उन पर आरोप तय किए.

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बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये चार पुलिसकर्मी ए. वी. परमार, डी. बी. कुमावत, कनक सिंह लक्ष्मण सिंह और रमेशभाई डाभी हैं. इन पर डी. के. बासु बनाम बंगाल सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप हैं. इसमें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कहा गया था कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.

हलफनामे के लिए 7 दिन का समय

गुजरात हाई कोर्ट ने आरोपियों को अपने बचाव में हलफनामा दायर करने के लिए 11 अक्टूबर तक का समय दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान डी. बी. कुमावत ने दावा किया कि इस घटना में उनकी कोई सक्रिय भागीदारी नहीं थी.

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इस पर जस्टिस सुपेहिया ने कहा कि वे घटना के समय मौजूद थे. जब पीड़ितों को बेरहमी से पीटा जा रहा था, कुमावत ने उन्हें बचाने की कोई कोशिश नहीं की. जस्टिस सुपेहिया ने कहा,

"पीड़ितों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे जा रहे थे, बेरहमी से पीटा जा रहा था लेकिन कुमावत ने उन्हें बचाने की कोई कोशिश नहीं की. उन्होंने पुलिसकर्मियों को पीड़ितों को पीटने से रोकने की भी कोशिश नहीं की. ये गैरकानूनी और अपमानजनक है. वे वहां मौजूद थे इस पर कोई विवाद नहीं है, इसलिए ये साफ है कि उन्होंने इस घटना में सक्रिय भूमिका निभाई. पीड़ितों को कोड़े मारने में उनकी सहमति थी."

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खेड़ा जिले में क्या हुआ था?

खेड़ा जिले के मटर पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों ने मालेक परिवार के पांच लोगों को सरेआम पीटा था. इनके अलावा भी कुछ लोगों को पीटा गया था. पुलिस ने उन पर उंधेला गांव के एक नवरात्रि कार्यक्रम में पथराव करने का आरोप लगाया था. पीड़ितों को पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था.

मालेक परिवार ने गुजरात हाई कोर्ट में चारों पुलिसवालों के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में इस मामले पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था. 

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