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ट्रेडिंग ऐप पर 10 हजार का निवेश किया, फिर कुछ खटका, बंदे ने 100 करोड़ का स्कैम खोल दिया

Cyber trading scam: दिल्ली पुलिस ने एक गिरोह को पकड़ा है, जो नकली ऐप के जरिए लोगों को ट्रेडिंग करने का लालच देते थे. एक शख्स को ऐप पर शक हुआ, तो उसने इसकी शिकायत पुलिस को की. अब तक की कार्रवाई में पुलिस 3 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं.

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नकली ट्रेडिंग ऐप के जरिए आरोपियों ने 600 से ज्यादा लोगों को ठगा. (फोटो-Pexels)

एक व्यक्ति की ‘कुछ सही नहीं लग रहा' वाली गट फीलिंग ने एक नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का पर्दाफाश करा दिया. ऐप चलाने वाले गिरोह ने 600 से ज्यादा लोगों को झांसा देकर करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करवा लिया था. पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. नाम हैं- रवि राठौर, सुदामा और विकास राठौर. रवि राठौर ‘मास्टरमाइंड’ बताया गया है.

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रवि ने ही ये एप्लिकेशन बनाया और उसे मैनेज किया था. इसे असली दिखाने के लिए रिव्यूज में भी ‘हेरफेर’ की थी, जिसके जाल में 28 साल के अरविंद गुप्ता नाम के एक शख्स भी फंस गए. अरविंद गुप्ता वही शख्स है, जिन्होंने इस फर्जी ट्रेडिंग ‘तिकड़ी’ का भंडाफोड़ करवाया. 

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अरविंद गुप्ता ने बताया कि 20 फरवरी को उन्हें WhatsApp नोटिफिकेशन आया. मैसेज में कथित तौर पर लाइन लिखी थी - हैलो सर, मैं TRADEMAKERALGO Software Pvt Ltd से ऋतिक सिंघानिया हूं. उसने Google Play पर TRADEMAKERALGO का एक लिंक भी दिया था.

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सर्च करने पर पता लगा कि ये एक एल्गोरिद्मिक ट्रेडिंग ऐप है. मतलब पहले से तय नियमों के आधार पर फाइनेंशियल मार्केट में खरीदने और बेचने की प्रक्रिया को अपने आप करता है. और इसका काम पैटर्न का विश्लेषण करना और कुछ ही मिलीसेकंड में सौदे पूरे करना है. मगर अरविंद गुप्ता ने ऐप को फेक समझ कर इग्नोर कर दिया.

ऐप में किया निवेश, फिर दिखी गड़बड़ियां

31 मार्च को उन्हें कथित तौर पर TRADEMAKERALGO ने फिर से संपर्क किया. इस बार पीड़ित का ध्यान तीन बातों पर गया. ये थी- ऑटोमेटेड ट्रेडिंग, कम ब्रोकरेज और Google Play Store पर ऐप का भरोसेमंद दिखना.

गुप्ता मान गए और 3 अप्रैल को ऐप में 10 हजार रुपये का इन्वेस्टमेंट किया. अगले दो दिनों में उन्हें 700-800 रुपये का मुनाफा भी हुआ. कुछ दिन ये सिलसिला चलता रहा. मगर एक दिन गुप्ता को ऐप पर 'डेबिट' का ऑप्शन नहीं दिखा. प्लेटफार्म में कुछ और भी गड़बड़ियां थीं.

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- ऐप पर बैंक की जानकारी के बजाय आधार नंबर होना.

- QR कोड लगातार बदलना.

- कंपनी का बार-बार ज्यादा निवेश के लिए जोर देना.

दो राज्यों में बंटा था काम

गुप्ता को लगा कि ये फ्रॉड है और उन्होंने 11 अप्रैल को दिल्ली के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन में निवेश धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने पाया कि TRADEMAKERALGO का काम दो राज्यों में बंटा हुआ था. बैकएंड का काम बेंगलुरु में था. कॉलिंग का काम और पैसों का लेन-देन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सनावद से होता था.

पुलिस की एक टीम ने 5 मई को क्रिकेट कोच सुदामा और कॉल सेंटर ऑपरेटर विकास राठौर को गिरफ्तार किया. वहां पुलिस को कॉल सेंटर का सेटअप भी मिला. आरोपी कमाए गए पैसों को म्यूल अकाउंट (अवैध पैसे को छिपाने या ट्रांसफर करने के लिए यूज) जरिए इधर-उधर भेजते थे. जांच में फर्जी ऐप पर 636 पीड़ितों के अकाउंट और करीब 14,232 ट्रांजैक्शन मिले. जिनकी कुल रकम 99.77 करोड़ रुपये थी.

दो पीड़ित पहले ही सामने आ चुके हैं. एक ने कथित तौर पर 1.3 लाख रुपये का निवेश किया है, जबकि दूसरे पीड़ित ने 70,000 रुपये लगाए हैं. 636 निवेशकों में से पुलिस अब तक 109 की पहचान कर चुकी है. 48 महाराष्ट्र से, 27 बिहार से, 14 दिल्ली से, 9 हरियाणा से, 4-4 केरल और असम से, 2 जम्मू से, और 1 तमिलनाडु से. जांचकर्ताओं को विदेशी साइबर अपराध गिरोहों से भी कोई लिंक नहीं मिला है. मामले की जांच जारी है. 

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