लेकिन ज़्यादा देर नहीं हुई कि ट्विटर की नीली चिड़िया चीं-चीं करने लगी. कई लोगों ने इस तरफ ध्यान दिलाया कि प्रधानमंत्री को घोघा-दाहेज रो-रो फेरी को 'अपनी तरह का पहला' प्रोजेक्ट नहीं कहना चाहिए था. क्योंकि वैसी ही फेरी सेवा तो कोची में पहले से चल रही है.
इस ट्वीट में पीएम को उनका सोमालिया वाला बयान याद दिलाया जा रहा है-

कुछ लोगों ने पीएम की तुलना कोची की मेयर सौमिनि जैन से की. सौमिनी ने बतौर कोची मेयर फेरी सर्विस से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू किए हैं-

तो बात किसकी सही है, ये जानने के लिए हमने थोड़ी बहुत खोदा-खादी की. और नतीजा ये निकला कि घोघा-दाहेज पहली रो-रो सर्विस तो नहीं ही है. जो बहस हो सकती है, वो वर्डप्ले पर ही हो सकती है. माने इस पर कि घोघा दाहेज 'अपनी तरह का पहला' प्रोजेक्ट है या नहीं.
कोची की रो-रो फेरी
केरल के कोची शहर में आपको 10 किलोमीटर भी चलना हो, तो अनिवार्य रूप से कोई झील, नहर या नदी पार करनी पड़ती है. ये शहर बैकवॉटर में बसा है. तो कई सारे द्वीप हैं यहां. पुल बने हुए हैं, लेकिन लंबा फेरा बचाने के लिए कई लोग जंकर का इस्तेमाल करते हैं. ये एक चौड़ी और सपाट नाव की तरह होते हैं, जिन्हें बार्ज भी कहते हैं. कार या बाइक सीधे जंकर पर चढ़ा दी जाती है और वो काफी सस्ते में आपको झील या नदी पार करा देते हैं.
कोची में ही वायपिन द्वीप है. यहां से फोर्ट कोचिन के बीच काफी लोग आना-जाना करते हैं. ये एक व्यस्त रूट है, जिस पर खूब जंकर चला करते थे. यूट्यूब पर कई वीडियो मिल जाएंगे, जिनमें जंकर गाड़ियों और लोगों को कोची फोर्ट-वायपिन रूट पर ले जा रहे हैं. हम यहां 2013 से एक वीडियो दे रहे हैं.
फिलहाल ये जंकर बंद हैं, क्योंकि यहां नई रो-रो फेरी के लिए नया टर्मिनल बन रहा है. लेकिन अब भी एक फेरी है, पप्पी (Pappy) नाम की. ये कभी चालू तो कभी बंद होती रहती है. लेकिन ये बिलकुल सही है कि कोची में तब से फेरी चल रही है, जब घोघा-दाहेज रो-रो फेरी के लिए टर्मिनल का शिलान्यास भी नहीं हुआ था. इसका काम भी वही था, जो घोघा-दाहेज का बताया जाता है. स्केल का फर्क ज़रूर है, लेकिन कॉन्सेप्ट (अवधारणा) के स्तर पर दोनों सर्विस एक जैसी हैं.

इस ट्वीट में नज़र आ रही रोरो फेरी के लिए कोचिन में नया टर्मिनल बन रहा है
तो क्या हम कह सकते हैं कि एक Pappy के चक्कर में पीएम से गलती हो गई?
ये हम आपकी समझदारी पर छोड़ते हैं. क्योंकि 'अपनी तरह का पहला' का क्या मतलब था, ये तो मोदी जी के 'मन की बात' है. हमें पता चलेगी, तो आपको भी बता देंगे. चलते-चलते इतना बता दें कि केरल के अलावा असम और गोआ में भी रो-रो फेरी प्रोजेक्ट या तो बन रहे हैं या बनने वाले हैं. रही बात दक्षिण पूर्वी एशिया की, तो फिलिपींस, इंडोनेशिया और बांग्लादेश में भी रो-रो सर्विस चल रही हैं.
एक बोनस ज्ञान और ले लीजिए. ये वर्डप्ले के बारे में ही है. अगर आप इस तरह से खेलना चाहें कि कोची की रो-रो फिलहाल बंद है, तो ये जानें कि चल घोघा-दाहेज फेरी भी नहीं रही है. प्रधानमंत्री ने उद्घाटन बस किया है. असल सेवा शुरू होगी 'लाभ पंचम' से, जो इस साल 25 अक्टूबर को पड़ रही है. और इस दिन शुरू होने वाली सेवा भी सिर्फ यात्री ले जाएगी. सामान या गाड़ियांं नहीं. उसके लिए अगले साल का इंतज़ार करना होगा.
बुलेट ट्रेन के ये अनोखे फीचर्स शिंजो आबे को भी नहीं पता हैं!










