
विधायक अशोक सिंह चंदेल ने घर में जनता दरबार लगाया.
किस मामले में विधायक को सजा मिली?
26 जनवरी 1997 की शाम थी. ये घटना हमीरपुर के सुभाष नगर में हुई थी. इस दिन अशोक सिंह चंदेल अपने कुछ लोगों के साथ सुभाष नगर पहुंचे. यहां पर उन्होंने अपने राजनीतिक कॉम्पटिटर राजेश शुक्ला के साथ 10 लोगों पर गोलीबारी की, इस गोलीबारी में 5 लोगों की मौत हो गई और 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. मरने वाले में एक ही परिवार के 4 लोग थे जबकि एक प्राइवेट गार्ड था. इस घटना के बाद इसी गोलीबारी में घायल होने वाले राजीव शुक्ल ने अशोक सिंह चंदेल के अलावा 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया. राजीव शुक्ल के बयान पर पुलिस ने केस दर्ज किया. फिर अशोक सिंह चंदेल उनके ड्राइवर रक्कू सिंह, रघुवीर सिंह, डब्बू सिंह, उत्तर सिंह, प्रदीप सिंह, नसीम, श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू सिंह और भान सिंह के खिलाफ कई धाराओं के साथ चार्जशीट फाइल की गई.

26 जनवरी 1997 की शाम इन्हीं 5 लोगों की हत्या हुई थी. (फाइल फोटो)
हत्या के पीछे वजह क्या थी?
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद हमने इस मामले में मुख्य आईविटनेस राजीव शुक्ल से बात की. राजीव शुक्ल ही वो इंसान हैं जिनके भाई की हत्या हुई थी और जिन्होंने कोर्ट में इतनी लंबी लड़ाई लड़ी. राजीव शुक्ल ने बताया:
हत्या राजनीतिक वजहों से की गई थी. 1996 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद हमीरपुर में अशोक सिंह चंदेल का वर्चस्व घटता जा रहा था. उससे पहले वो निर्दलीय और जनता दल के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीत चुका था. लेकिन 1996 का चुनाव हारने के बाद अशोक सिंह की स्थिती खराब होती जा रही थी. राजेश शुक्ल और उनके भाई बीजेपी से जुड़े थे तो कई बार टकराव की स्थिती उत्पन्न हो जाती थी. मौका देखकर 26 जनवरी 1997 की देर शाम अपने ड्राइवर रक्कू सिंह के अवाला दूसरे लोगों के साथ मिलकर पूरे परिवार को खत्म करने की योजना बनाई. और काफी हद तक अशोक सिंह चंदेल इस मामले में कामयाब भी हो गया. क्योंकि 26 जनवरी की शाम हुई इस वारदात में 5 लोगों की मौत हुई, जिसमें एक ही परिवार के 4 लोग शामिल थे.

राजेश शुक्ल के भाई राजीव शुक्ल जिन्होंने इस मामले में 22 साल कानूनी लड़ाई लड़ी
अशोक सिंह चंदेल का क्या हुआ?
राजीव शुक्ल के बयान के आधार पर फिर केस दर्ज हुआ, मामले में कार्रवाई होती उससे पहले ही अशोक सिंह चंदेल फरार हो गया. करीब डेढ़ साल वो पुलिस से बचते रहा फिर साल 1998 में डेढ़ साल के बाद सीधा कोर्ट से जमानत ले आया. जमानत का विरोध हाईकोर्ट में हुआ तो अशोक सिंह की जमानत कैंसिल हो गई. साल 1999 में लोकसभा का चुनाव आया. पैसा, पावर और दबंगई के बल पर अशोक सिंह चंदेल बीएसपी का टिकट ले आया और चुनाव जीत गया. यानी जिसके ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज था वो लोकसभा का सदस्य बन गया, हमीरपुर का सांसद बन गया.

साल 1999 में बीएसपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़कर जीता (फाइल फोटो)
अशोक सिंह ने फिर चला पैसों का खेल
ये बात 2002 की है जब अशोक सिंह चंदेल पैसों के दम पर अपनी आजादी भी खरीद लाया. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अशोक सिंह चंदेल के साथ बाकी के 10 लोगो को आरोप मुक्त कर दिया. सभी लोगों को क्लीन चिट मिल गई. अदालत ने उस वक्त एफआईआर में देरी के साथ फॉरेंसिंक रिपोर्ट को संदेहास्पद माना था. साथ ही साथ कोर्ट ने आईविटनेस राजीव शुक्ल के बयान को भी शक की नज़र से देखा था. कुल मिलाकर अशोक सिंह चंदेल इस मामले में बरी हो गया थे. लेकिन बाद में ये फैसला सुनाने वाले जज अश्विनी कुमार को बर्खास्त किया गया था. जज पर अशोक सिंह से चंदेल से 1 करोड़ 20 लाख रुपये घूस लेने के आरोप लगे थे.
अशोक सिंह चंदेल का राजनीति सफर
अशोक सिंह चंदेल 4 बार का विधायक और एक बार बीएसपी के टिकट से सांसद रह चुका है. अशोक सिंह चंदेल के राजनीति करियर की शुरुआत 1989 में हुई थी जब वो निर्दलीय चुनकर विधानसभा पहुंचा था. फिर 1993 में जनता दल के टिकट पर विधायक बना था. इसके बाद साल 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में हार मिली थी. उसके बाद साल 1999 में बीएसपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा जिसमें जीत हासिल हुई. फिर एक बार समाजवादी पार्टी से विधायक बने और 2017 में बीजेपी के हो लिए.

2017 में चंदेल सिंह के बीजेपी में शामिल होने पर कई नेताओं ने विरोध किया था. (फाइल फोटो)
बीजेपी का क्या कहना है?
जब 2017 में अशोक सिंह चंदेल की बीजेपी में एंट्री हुई थी तो कुछ नेताओं ने विरोध किया था. लेकिन कुछ खास फर्क नहीं पड़ा. एंट्री भी हुई और चुनाव भी जीता. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से आदेश आने के बाद भी बीजेपी की तरफ से कोई खबर नहीं आई है. क्योंकि लोकसभा चुनाव को देखते हुए चंदेल पर किसी तरह के एक्शन के मूड में पार्टी नहीं दिख रही है. हमीरपुर में 29 अप्रैल को चुनाव होना है. उसके बाद मुमकिन है कि उसकी पार्टी से बर्खास्तगी हो जाए.
अब हाईकोर्ट के आदेश पर राजेश शुक्ल के घर में खुशी की लहर है तो अशोक सिंह चंदेल चुपचाप अपने घर में बंद है. हमीरपुर के एसपी हेमराज मीना के मुताबिक अभी हाईकोर्ट के आदेश की चिट्ठी नहींं आई है, जिसकी वजह से अशोक सिंह चंदेल की गिरफ्तारी नहीं हुई है. चिट्ठी आते ही विधायक को कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा, अगर ऐसा वो नहीं करता है तो उसकी गिरफ्तारी की जाएगी.










