अब खबर आई है कि असम में एक फिल्म जब 'काबिल' और 'रईस' की रिलीज़ के चलते थिएटरों से हटाई जाने वाली थी, तब उसके निर्देशक ने युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम - इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) के चीफ परेश बरुआ से अपनी फिल्म को बचाने की गुहार लगा दी. उल्फा-आई एक अलगाववादी संगठन है जो भारत से अलग स्वतंत्र असम चाहता है. ये संगठन भारत सरकार से बातचीत के भी खिलाफ है. बकौल इंडियन एक्सप्रेस इसी संगठन ने आज असम में आधा दर्जन के करीब धमाके ठीक उस वक्त करवाए जब दिल्ली में राजपथ पर परेड शुरु होने को थी.

पोस्टर फिल्म क्लब असम की साइट से साभार
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेश्नल स्कूल ऑफ ड्रामा) से पढ़े हिमांग्शू प्रसाद दास की असमिया फिल्म 'शकीरा आहिबो बोकुलतोलोर बिहुलोए' 20 जनवरी को रिलीज़ हुई थी. थिएटर मालिक बुधवार 25 जनवरी से पहले इसे हटाना चाहते थे ताकि एक साथ रिलीज़ हो रही दो बड़ी बॉलीवुड फिल्में - शाहरुख की 'रईस' और ऋतिक की 'काबिल' लगाई जा सकें.

हिमांग्शू का बरुआ को लिखा खत.
हिमांग्शू ने अपने फेसबुक वॉल पर बरुआ के नाम एक चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने सवाल किया, "अगर हम असमिया नहीं बने रहे तो तब क्या होगा जब असम आज़ाद होगा. " इसके बाद बरुआ ने कुछ लोकल टीवी चैनलों को फोन किया और सिनेमा हॉल मालिकों के नाम बयान जारी कर कहा कि 'अगर लोग फिल्म देखना चाहें ' तो उसे न हटाया जाए. वरना उल्फा - आई इसका विरोध करेगा. मामला सामने आने के बाद असम पुलिस के डीजीपी मुकेश सहाय ने कहा है कि वे थिएटर्स को सुरक्षा देने को तैयार हैं.
वैसे भी ये फिल्म 50 फीसदी से भी कम दर्शकों के साथ चल रही थी. और ये बात भी सामने आई है कि हिमांग्शू 'काबिल' और 'रईस' की रिलीज़ डेट के बारे में पहले से जानते थे. ये सब जानते हुए उन्होंने फिल्म रिलीज़ की.
असम में लोकल और 'बाहरी' का मुद्दा बड़ा संवेदनशील है. इसके आसपास असम की राजनीति की धुरी है. कुछ गुट मानते हैं कि बॉलीवुड फिल्मों के कारण ही असमिया फिल्में पनप नहीं रहीं. इसे वे असमिया संस्कृति पर हमले की तरह देखते हैं. इसलिए ये मामला फिल्म बनाम फिल्म का बस नहीं है. लाज़मी तौर पर इस मुद्दे के आसपास भी राजनीति हो रही है. कुछ गुट हिमांग्शू के पक्ष में तो कुछ उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं.
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