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नोएडा से पकड़ाई फर्ज़ी IFS अधिकारी, नीली बत्ती की गाड़ी लेकर पीएम मोदी की रैली में भी पहुंची थी

खुद को 2 साल से IFS अधिकारी बताकर पुलिस पर रौब झाड़ती थी, एक गलती ने मामला खराब कर दिया.

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2 साल से फर्जी आइएफएस अधिकारी बनकर पुलिसवालों पर रौब झाड़ती थी ज़ोया खान
अक्षय कुमार की फिल्म स्पेशल 26 देखी है आपने? फिल्म में फर्जी सीबीआई ऑफिसर बने थे. फर्जी छापेमारी करते थे. लोगों से पइसे ऐंठ कर निकल लेते थे. उनके फर्जी काम में पूरी टीम थी. वो फर्ज़ी सीबीआई अफसर इसीलिए बने थे क्योंकि सीबीआई ज्वाइन करना चाहते थे. चूंकि वो परीक्षा में पास नहीं हुए इसीलिए फर्जी सीबीआई अफसर बन कर धौंस जमा लिया.
अब ये फिल्म की बात थी.  लेकिन कुछ ऐसा ही मामला रियल लाइफ में भी सामने आया है. नोएडा से एक फर्जी IFS (Indian Foreign Services) अधिकारी जोया खान की गिरफ्तारी हुई है. गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि उसने 2007 में पीसीएस एग्ज़ाम दिया था. जिसे वो पास नहीं कर पाई थी. जिसके बाद वो फर्जी आएएफएस अधिकारी बन गईं. उसके इस फर्जीवाड़े में उसके पति भी बराबर साथी है. अब आपको लग रहा होगा कि ऐसी खबरें तो कई बार सामने आ चुकी हैं. इसमें नया क्या है. तो इसमें नया ये है कि गिरफ्तार हुई ज़ोया पिछले 2 साल से फर्जी अधिकारी बन कर घूम रही थी. सरकारी आवास का फायदा उठा रही थी. पुलिस सुरक्षा में घूम रहीं थी. पुलिस की दो गाड़ियां नीली बत्ती के साथ चलती थीं. यहीं नहीं हाल ही में वो प्रधानमंत्री मोदी की मेरठ में हुई रैली में भी इसी पुलिस सुरक्षा के बीच गईं थी.
महिला ने सब कुछ मैनेज कैसे किया?
अब इस महिला ने खुद के फर्जी अफसर होने के बाद भी ये सब कैसे मैनेज किया ये एक बड़ा सवाला है. लेकिन सबसे पहले ये जान लीजिए कि ज़ोया के 2 साल के फर्जी खेल पर फुल स्टॉप कैसे लगा. खबरों के मुताबिक ज़ोया आईएफएस बनने की शानदार एक्टिंग करती थीं. वो फूलप्रूफ प्लानिंग के साथ काम करती थी. उसकी पोल उस वक्त खुल गई जब उसने नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्णा को हड़का दिया. इस हरकत के बाद एसएसपी को उसकी एक्टिविटी पर शक हुआ. वो उसके घर गए, तलाशी ली, तो सारा मामला साफ हो गया.
नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण ने ज़ोया के घर जाकर तलाशी ली.
नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण ने ज़ोया के घर जाकर तलाशी ली.

पोल खुलने में 2 साल कैसे लग गए?
पुलिस के मुताबिक ज़ोया को मेरठ, गाज़ियाबाद के साथ कई थानों की पुलिस सैल्यूट करती थी. सोचिए इतना कुछ मैनेज किया था महिला ने. अच्छा इनके रुतबे में चार चांद तब लग जाती थी जब अपनी नीली बत्ती वाली गाड़ी से ठस्के में उतरती थी. एसएसपी मेरठ के मुताबिक ज़ोया ने कभी अहसास नहीं होने दिया कि वो फर्जी है. पुलिस ने इस बात की भी जानकारी दी की ज़ोया मेरठ, गाज़ियाबाद, नोएडा और मुरादाबाद में भी रह चुकी है. उसने इन जगहों पर भी सरकारी सुविधा का लाभ लिया है. पुलिस के मुताबिक उसके पास कई फ्लैट्स भी हैं. ज़ोया के पिता पेशे से डॉक्टर हैं और उसके शादी कानपुर के जॉइंट कमिश्नर के बेटे निशांत के साथ हुई है. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस ने ज़ोया के पति निशांत को भी गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस ने ज़ोया के पति निशांत को भी गिरफ्तार कर लिया.

वैसे तो ये पूरा मामला ही चौंकाने वाला है. लेकिन दिमाग की नसें सबसे ज्यादा तब हिल गई जब इस बात की जानकारी मिली कि महिला ने पीएम मोदी की मेरठ रैली में सुरक्षा का कार्यभार संभाला था. मेरठ पुलिस के मुताबिक उसे पीएसओ के साथ-साथ दो थानों से एस्कॉर्ट मुहैया कराए गए थे. उसने खुद को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात बताया था. जिसकी जांच NIA कर रही है. वैसे तमाम तरह के सवाल भी अभी सुलझने बाकी है कि 2 साल से ज़ोया पर किसी को शक कैसे नहीं हुआ. साथ ही कहीं कोई दूसरा अधिकारी तो इसकी मदद नहीं कर रहा. वैसे पूछताछ में ज़ोया का अफगानिस्तान कनेक्शन भी सामने आया है. जिसकी विस्तार से जांच हो रही है.


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