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इस मस्जिद में ऐसा क्या खास है कि मोदी जापान के पीएम शिंजो को लेकर वहां जा रहे हैं?

13 सितंबर को जापान के प्रधानमंत्री भारत को एक तोहफा देने आ रहे हैं.

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जापान के प्रधानमंंत्री 13 सितंबर को दो दिन के लिए भारत आ रहे हैं.
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 13 सितंबर को दो दिनों के लिए भारत आ रहे हैं. मकसद है भारत में बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखना. 14 सितंबर को पीएम मोदी की मौजूदगी में आबे अहमदाबाद से मुंबई के बीच बनने वाले बुलेट ट्रेन नेटवर्क की आधारशिला रखने जा रहे हैं. इसके अलावा आबे को जापान के इंडस्ट्रियल पार्क की भी आधारशिला रखनी है.
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14 सितंबर को भारत में बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखी जाएगी.

अब आबे भारत आ रहे हैं, तो उन्हें भारत की कुछ खास चीज़ें दिखाना तो बनता ही है. ऐसे में इस बार तय हुआ है कि आबे को एक मस्जिद दिखाई जाएगी. ये खास मस्जिद अहमदाबाद में है और इसका नाम है सीदी सैय्यद मस्जिद. जापानी पीएम हैं, तो उन्हें इस मस्जिद के बारे में बताने के लिए खास गाइड भी चाहिए. और ये खास गाइड बने हैं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. 13 सितंबर को जब आबे मस्जिद में जाएंगे तो उनके साथ बतौर गाइड पीएम मोदी मौजूद होंगे.
16वीं सदी में एक गुलाम ने बनाई थी ये मस्जिद
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सीदी सैयद मस्जिद बाहर से ऐसी दिखती है.

गुजरात सल्तनत के आखिरी सुल्तान का नाम था शमशुद्दीन मुजफ्फर शाह (तृतीय). उनकी सेना का एक जनरल था सुलतान अहमद शाह बिलाल झाजर खान. उसका एक गुलाम था सीदी सैयद, जो यमन से गुजरात आया था. वो गरीबों के लिए काम करता था और किताबें पढ़ने का शौकीन था. इसी सीदी सैयद ने 1572 में ये मस्जिद बनवानी शुरू की थी. 1573 में ये मस्जिद बनकर तैयार हो गई. इसी दौरान मुगल शासक अकबर ने मुजफ्फर शाह को गद्दी से हटाकर गुजरात सल्तनत पर कब्जा कर लिया. इतिहासकारों का मानना है कि मस्जिद के पूरा होने से पहले ही गुजरात सल्तनत बर्बाद हो गई थी. इसीलिए मस्जिद को देखकर ऐसा लगता है कि इसमें कुछ काम अब भी बाकी है. ये मस्जिद अहमदाबाद की पहचान रही है. इस मस्जिद में जालीदार नक्काशी का खूब काम हुआ है, इसीलिए इसे सीदी सैयद की जाली भी कहते हैं.
गजब की नक्काशी
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मस्जिद की खिड़कियों पर हुई नक्काशी बेहद खूबसूरत है. (दाएं) इसी के आधार पर IIM अहमदाबाद का लोगो बना है.

अहमदाबाद के ठीक बीचोंबीच लाल दरवाजा के पास बनी ये मस्जिद भारतीय-अरबी नक्काशी का बेजोड़ नमूना है. इसकी दीवारों पर मार्बल लगाए गए हैं. मस्जिद की पश्चिमी ओर की खिड़कियों में जालियां बनी हुई हैं. कुल आठ जालियों के साथ इस मस्जिद को बनाया गया है. इन जालियों पर ही पत्‍थर से नक्‍काशी और खुदाई करके पेड़ बनाया गया है, जो बेहद खूबसूरत है.
भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) पूरे देश में मैनेजमेंट के सबसे अच्छे संस्थान माने जाते हैं. अहमदाबाद में जो आईआईएम है, उसका लोगो बनाने की प्रेरणा इसी मस्जिद की जाली से मिली थी. कहा जाता है कि जब अंग्रेज़ भारत में काबिज हो गए तो उन्होंने इस मस्जिद की एक जाली निकाल ली थी और उसे ब्रिटिश म्यूज़ियम में रखवा दिया था. अंग्रेज़ इस मस्जिद का इस्तेमाल ऑफिस के तौर पर करते थे.
मोदी को भी पढ़ना पड़ रहा इतिहास
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पीएम मोदी मस्जिद के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं.

शिंजो आबे को मस्जिद के बारे में तफसील से बताने के लिए पीएम मोदी भी जानकारी जुटा रहे हैं. इसके लिए प्रधानंमत्री ऑफिस ने सुन्नी वक्फ कमिटी से मस्जिद के आर्किटेक्चर और इतिहास संबंधी जानकारियां भेजने को कहा है. सुन्नी वक्फ कमिटी के चेयरमैन रिजवान कादरी ने मीडिया में इस बात की पुष्टि की है.
यूनेस्को डायरेक्टर कर चुके हैं दौरा
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मस्जिद की खिड़कियों में जो जालियां लगी हैं, उनमें भी कई अलग-अलग डिजाइन्स बनी हैं.

संयुक्त राष्ट्र संघ का एक अंग है यूनेस्को. पूरा नाम है United Nations Educational Scientific and Cultural Organization (UNESCO). काम है शिक्षा, प्रकृति, समाज विज्ञान, संस्कृति और संचार के जरिए अंतरराष्ट्रीय शांति और समझबूझ को बढ़ावा देना. इसके डायरेक्टर हैं जनरल इरिना बोकोवा. म्युनिसिपल कमिश्नर मुकेश कुमार ने मीडिया को जानकारी दी है कि जनरल इरिना बोकोवा को छोड़कर कोई भी बड़ा आदमी हाल में इस मस्जिद को देखने नहीं आया है. अब पहली बार पीएम मोदी जापानी पीएम आबे के साथ सैयद मस्जिद देखने आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इससे पहले 2013 में ओमान के मंत्री मोहम्मद बिन कासिम तीन लोगों के साथ मस्जिद देखने आए थे, लेकिन ये अनौपचारिक दौरा था.


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